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Twinflam and soulmate's epi 8

ट्वीनफ्लेम कनेक्शन वह होता है। जिसमें आपका पार्टनर आप ही के समान गुण दोषों वाला होता है। जो आपको अपनी आदतों और हरकतों से ट्रीगर करता है। तुम्हारे कमजोर हिस्सों पर चोट देता है। जैसे कि अगर आपको किसी बात के लिए डर लगता था। तो आपका ट्वीन आपको उसी डर से सामना करवाएगा। जैसे अगर आप अकेले रहने से डरते थे। तो आपका ट्वीन ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न कर देगा कि आपको अकेला रहना पड़ जायेगा। और दुनिया को और समाज को साबित करना पड़ जायेगा कि आप अकेले रह सकते हैं। लोग आप पर भरोसा नहीं करेंगे कि आप जीवन में अपनो के बीना रिश्तेदारों के बीना जीवन जी ही नहीं सकतें हैं। और ना ही आप अपनो रिश्तेदारों के बीना कुछ कर ही नहीं सकतें हों। यह डर बचपन से था मेरे भीतर में अकेला कहीं आने-जाने से अकेले लोगों से महिलाओं से बातचीत करने से डरता था। भीड़ में जाने से अपने हुनर को लोगों के सामने रखने से डरता था। महिला पेशेंट को जेन्ट्स डाॅक्टर का चेकअप करना ग़लत मानता था। और इस बात के लिए जेन्ट्स डाॅक्टर पर शक करता था। और महिलाओं को जेन्ट्स डाॅक्टर से दुर रखने के बारे में सोचता था। कि एक महिला मरीज को महिला डॉक्टर ही चेकअप कर सकतीं हैं। जेन्ट्स डाॅक्टर महिला मरीज पर चेकअप के बहाने ग़लत नियत रखतें हैं। लेकिन भगवान आपके ट्वीन के माध्यम से आपके सामने ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न करवा देंगे कि आपको अपने पार्टनर का जेन्ट्स डाॅक्टर से ही इलाज करवाना पड़ जायेगा। और अब आपके पास दो नजरिए होते हैं। आप चाहों तो डाक्टर के चेकअप प्रक्रिया को डाक्टर कि ग़लत नियत मान लिजिए। या फिर यह सोच लिजिए कि डाक्टर सिर्फ एक बिमार शरीर का इलाज कर रहे हैं। और अगर फिर भी डाक्टर कि नियत में खोट होगा तो उस डाक्टर को भगवान देखेगा। मतलब आपका ट्वीन आपको अपने डर और शक का सामना करवायेगा। और ट्वीन कनेक्शन आत्मीक रिश्ता होता है। इसमें आपका जुड़ाव आत्मा से होता है। और भगवान आपके ट्वीन के माध्यम से आपके सामने ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न कर देगा कि आपको यह प्रुफ करना पड़ेगा कि आप आत्मा से प्रेम करते है। और अगर आप ट्वीन के शरीर से प्रेम करते होंगे तो ट्वीन के शरीर को दुसरे पुरुषों का स्पर्श सहन नहीं कर पाएंगे। या फिर अपने ट्वीन को किसी और के साथ देख नहीं पाएंगे। यह सोच साधारण कनेक्शन में भी हो सकती है। लेकिन ट्वीनफ्लेम कनेक्शन आत्मीक कनेक्शन होता है। जहां एक आत्मा दुसरी आत्मा को उसके डर से शक से सामना करवातीं है। ताकि दुसरी आत्मा अपने डर और शक पर विजय प्राप्त कर सकें। साथ ही अपनी शक्तीयों को अपने पर्पज को पहचान सकें। कि परमात्मा ने दोनों को धरती पर क्युं भेजा है। और परमात्मा धरती पर दोनों के माध्यम से लोगों को क्या संदेश देना चाहते हैं। और सोलमेट्स वै कनेक्शन होते हैं। जो आपके हुनर को पहचानने में आपकी सहायता करते हैं। जैसे कि मेरे भीतर सिंगिंग का हुनर था। तो मुझे मेरे ट्वीन से दुर होने के बाद वह सोलमेट्स मिलेगा जो उसने भी किसी न किसी से चोट खाई होगी धोखा बर्दाश्त किया होगा। और उस चोट और धोखे के बाद उसके जीवन में परिवर्तन आया होगा। और उसने सिंगिंग चेनल क्रिएट किया होगा। लेकिन उसके पास या उसके चेनल कि पाॅपेलेरिटी बढ़ाने के लिए चेनल को ग्रो करवाने वाले सिंगर्स कि जरुरत होगी। और मुझे भी ऐसे ही एक प्लेटफार्म कि जरुरत होगी। जब हम दोनों भगवान से प्रार्थना करेंगे तो भगवान हम दोनों को आपस में किसी भी माध्यम के ज़रिए मिलवा देंगे। जैसे में आपके चेनल के माध्यम से अपनी कहानी लिख रहा हूं। सोलमेट्स वै होंगे जिन्होंने मेरी ही तरह बचपन से बहुत सारे दुःख तकलीफ परेशानीयां देखी हो। लोगों ने कुटुंब परिवार वालों ने उसके सीधेपन और भोलेपन का फायदा उठाया हो। उसको हमेशा यह एहसास करवाया हो कि उसका क्या होगा वह जिंदगी में क्या ही कर पायेगा। तुम हमारे बीना कुछ नहीं कर पाओगे। अगर हम तुम्हारा साथ नहीं देंगे तो तुमसे जिंदगी में कुछ हासिल नहीं हो पायेगा। हमारे बीना तुम अकेले जिंदगी जी ही नहीं पाओगे। और भी बहुत सारी नकारात्मक बातें उसको सुनने को मिली हो। जो अपने अकेले के दम पर सबकुछ प्राप्त करना चाहता होगा एक लक्जरी लाइफ जीना चाहता होगा। शुकुन और शांति वाली जिंदगी को जीने की चाहत रखता होगा। जिसे मेहनती ईमानदार और सच्चा पार्टनर कि तलाश कर रहा/रही होगी ऐसे व्यक्ति से मुझे मिलवाया जायेगा। क्योंकि हम दोनों ने एक जैसे दुःख तकलीफ परेशानियां देखीं है। हम दोनों के सपने भी एक जैसे ही होंगे। इसी कारण हम दोनों एक दूसरे कि चाहत और जरुरत को महसूस करके एक-दूसरे को आगे बढ़ाने में एक-दूसरे के सपने पुरे करने में एक-दुसरें का सहयोग करेंगे। लेकिन में अभी तक: सात साल का था। और मेरी ट्वीन आठ साल की थी। लेकिन हमारे गुण और दोष एक समान थे। में भी सीधा साधा भोला भाला मासुम डरपोक कमजोर और भावनात्मक था। और मेरी ट्वीन भी मेरी तरह ही सीधी-सादी भोली-भाली मासुम डरपोक कमजोर और भावनात्मक थीं। लेकिन अब जमाना बहुत चतुर और चालाक था। और हम दोनों भावनात्मक रूप से कमजोर सीधे साधे भोले भाले मासुम और चतुर चालाक जमाना सीधे साधे भोले भाले मासुम बच्चों को सुख शांति से जीवन जीने देंगे। बिल्कुल भी नहीं और समाज ऐसे पुरुष को कमजोर घोषित कर देता है। कि यह पुरुष विवाह कि जिम्मेदारी उठाने के काबिल नहीं हैं। लेकिन अभी तो हम दोनों ही बच्चें थें और अपने अपने माता-पिता भाई-बहन और परिवारों में खुश रह रहे थे। हमारे शरीर अलग-अलग थे। लेकिन हमारी आत्मा एक ही थी। मतलब आधी आत्मा का हिस्सा मेरी ट्वीन के पास था। और आधी आत्मा मेरे पास थीं। मतलब सात चक्रों में से साढ़े तीन चक्र मेरी ट्वीन के पास और साढ़े तीन चक्र मेरे पास थें। मतलब हम दोनों में एक-एक गुण ही विद्यमान थे। दोनों ही सीधे-सादे भोले-भाले डरपोक कमजोर और भावनात्मक खेर अभी हम दोनों मिले नहीं थें। लेकिन दोनों कि आत्मा एक होने कि वजह से दोनों के शरीर में चेंज एक जैसे होते थे। अगर मेरी ट्वीन किसी कारण वस आंशु बहा रही है तो मेरी आंखों से भी बेवजह ही आशुं बहने लगेंगे। अगर उसे शरीर में कहीं दर्द हो रहा होगा तो मुझे भी शरीर में दर्द होने लगेगा। लेकिन अभी हम एक दूसरे से दुर थें। अलग-अलग जगहों पर रह रहे थे। तो हमें इस बात के बारे में कुछ समझ नहीं आ रहा था। कि हमारे साथ ऐसा क्युं हो रहा था। और अगर घरवालों को बताएं भी तों घरवाले साधारण घटना बताकर हमारी बातों को नजरंदाज कर दिया करते। लेकिन हमारे साथ जो कुछ भी हो रहा था। वह देविय प्रक्रिया के अंतर्गत हो रहा था। लेकिन अब हमें तो हमारे घरवाले जो बात बोल दें हम उसी को सच मानकर फिर से मस्त मोला बनकर रहते थे। भगवान ने भले ही मुझे सीधा साधा भोला भाला मासुम डरपोक कमजोर बनाकर धरती पर भेजा था। वैसे तो हर बच्चा जन्म से सीधा भोला मासुम डरपोक कमजोर और भावनात्मक होता है। चतुर चालाक उसे या तो उसके घरवाले बनाते हैं। या फिर उसे जिंदगी में बहुत बड़ा धोखा मिला हो। या फिर घर परिवार कि जिम्मेदारी सर पर आ जाएं तब लेकिन अब हम दोनों में एक अलग बात थी। और वह बात यह थी कि हम दोनों थें एक ही आत्मा के दो हिस्से लेकिन भगवान ने हमें अलग-अलग परिवारों में भेज दिया और अब अगर हम दोनों का अलग अलग परिवारों में जन्म हुआ है तो फिर हम दोनों पर अपने अपने परिवार वालों कि आदतों हरकतों सोच विचार व्यवहार भी अपने अपने परिवार वालों के समान ही होंगे। जैसे कि मेरे नाना-नानी दादा-दादी मेरे माता-पिता सभी सत्य के मार्ग पर चलकर धर्म का पालन करते हुए लोगों का भला करने में मदद करने में विश्वास करते थे। मेहनती और ईमानदार थे। भगवान कि भक्ति और दान पुण्य करने में विश्वास करते थे। और अब मैं ऐसे संस्कार वालों के साथ रहा हूं तो फिर मेरे भीतर भी ऐसे ही संस्कार विद्दमान होंगे। और मेरी ट्वीन के परिवार वालों कि सोच विचार संस्कार कुछ इस तरह के थे। कि वै सभी लोग प्रेक्टीकल लाॅजिकल ईगोस्टीक सेल्फिश नारसिस्ट थें। जिन्हें दुसरों पर दया बिल्कुल भी नहीं आती थी। वै लोगों को अपनी चालाकियों से बेवकुफ बनाकर लुटना जानते थे। लुटाना नहीं और ऐसे ही संस्कार मेरी ट्वीन के भीतर भी विद्यमान होंगे। लेकिन मेरी ट्वीन में ऐसे गुण या संस्कार नहीं थें। वह बिल्कुल सीधी साधी भोली भाली मासुम डरपोक कमजोर और भावनात्मक थीं। लेकिन अब समय के साथ-साथ हम दोनों कि उम्र भी बढ़ती जा रही थी। मेरी ट्वीन के दो भाई और एक बहन थीं। और उसके माता-पिता मेरी ट्वीन के पिता एक छोटा भाई और मेरी ट्वीन इन तीनों कि सोच मेरे परिवार वालों कि सोच के जैसी ही थी। लेकिन मेरी ट्वीन कि मां बहन और सबसे बड़ा भाई इन तीनों कि सोच चतुर चालाक और लुटेरी सोच थीं। मेरी ट्वीन के पिता पढ़े-लिखे थे तो उनकी सरकारी नौकरी भी लग गई थी। जिससे उनके घर में पैसे कि आवक बढ़ चुकी थी। तो मेरे ट्वीन के पिता ने चारों भाई बहनों को पड़ने लिखने के लिए स्कूल में भर्ती करवा दिया। मेरे माता-पिता कि तरह ही। मेरी ट्वीन के पिता के परिवार में सभी मेहनत मजदुरी करते थे। लेकिन सिर्फ ट्वीन के पिता ही सरकारी नौकरी में थे। तो परिवार के बाकी लोग जरुरत पड़ने पर ट्वीन के पिता से ही मदद कि उम्मीद करते थे। लेकिन मेरी ट्वीन के ट्वीन सहीत चार भाई बहन थें। और ट्वीन के माता-पिता और ट्वीन के पिता कि तनख्वाह इतनी ज्यादा भी नहीं थी कि इन छः लोगों के अलावा परिवार में किसी और कि भी मदद कि जा सकें। लेकिन अब परिवार में जरुरत पड़ेगी तो आपको मदद तो करना ही पड़ेगी। कई बार तो परिवार के लोगों को सच में पैसों कि जरुरत पड़ती थी। लेकिन कई बार तो परिवार के लोग मेरे ट्वीन के माता-पिता को झुट बोलकर बेवकुफ बनाकर पैसे ऐंठ लेते थे। और जब मेरी ट्वीन कि मां को पता चलता कि जरुरत नहीं थीं। पर शराब और नशे पत्ते करने के लिए झुट बोलकर बेवकुफ बनाकर बहाने बनाकर पैसे लिए है। अब यही बातें मेरी ट्वीन कि माता के दिमाग में बेठ गई। और वह अब से उनके पास कोई भी व्यक्ति पैसे मांगने कि उम्मीद से आता तो मेरी ट्वीन कि मां को मदद मांगने वाले कि बातों पर भरोसा ही नहीं आता था। और उस व्यक्ति को झुटा धोखेबाज और दिखावा करने वाला समझकर घर से बाहर भगा दिया करतीं थीं। और समय के साथ-साथ लोगों के लिए मन में नफ़रत ने जन्म ले लिया। कि लोग सीधे साधे भोले भाले बनने का दिखावा करके पैसे वालों को लुटते हैं। उनके पैसे देखकर ही उनसे रिश्ता जोड़ने। कि चालाकियां करते हैं। और जब रिश्ता बन जाएं तब अपने हालातों का अपनी मजबूरी का झुटा दिखावा करके पैसे लुटते हैं। यहीं सोच मेरी ट्वीन कि मां के दिमाग में बैठ गई। और अब से जो कोई भी उनसे पैसे कि मदद मांगने उनके घर आते। मेरी ट्वीन कि मां यही सोचकर उन्हें घर से बाहर निकाल दें कि यह व्यक्ति अपने हालातों का बहाना बनाकर हमारे पास आया/आई है। अपने खराब हालातों के बारे में झुट बोलकर रोने धोने का कलपने का दिखावा करके हमसे पैसे मांगने आया/आई है। तो इसे घर से भगाओ। और यही सोच धीरे-धीरे दिमाग में आकार लेने लगी और मेरी ट्वीन कि मां को घर के इंसानों से ज्यादा पैसों से प्यार होने लगा। हर समय पैसों कि बचत कि टेंशन में रहने लगीं। और अपने बच्चों को भी यही पाठ पढ़ाने लगी कि लोगों के बच्चे तुमसे जानबूझकर दोस्ती करते हैं। ताकि तुम्हारे सामने अपने खराब हालात बताकर तुमसे पैसे लुट सके। लेकिन घर में पहला बच्चा लड़का था। तो मेरी ट्वीन कि मां ने उसे अच्छी खासी तरीके से लोगों कि चालाकियों झुटे इरादों के बारे में बता दिया। और समझा दिया। और उसने अपनी मां कि सारी बातों को अपने दिमाग में फिट कर लिया फिर दुसरा भी लड़का ही था। और तीसरे नंबर पर मेरी ट्वीन आतीं थी। और जब पहला बच्चा लड़का पैदा हुआ तो। ट्वीन के माता-पिता ने उसे ढेर सारा लाड़ प्यार दिया। और माता-पिता के इस लाड़ प्यार से वह जिद्दी और अड़ियल स्वभाव का बनता चला गया। फिर दुसरे नंबरपर एक और लड़का था। तो मेरी ट्वीन के माता-पिता ने उसे कम लाड़ प्यार दिया और फिर तीसरे नंबर पर मेरी ट्वीन आती थी। और उसे भी माता-पिता ने कोई खास लाड़ प्यार दिया नहीं। क्योंकि ट्वीन के पिता पैसे कमाने में व्यस्त हो गए और माता पैसे बचाने में व्यस्त रहतीं थीं। इसलिए बीच के बच्चों पर ज्यादा ध्यान दिया नहीं और चोथे नंबर पर एक और लड़की थी जो कि आखिरी थीं। और आखिरी लड़की को भी पहले वाले लड़के जितना ही लाड़ प्यार मिला। और यह लड़की भी पहले वाले लड़के की तरह जिद्दी और अड़ियल स्वभाव कि बनती चली गई। मतलब पहले लड़के और आखिरी लड़की की सोच विचार मेरी ट्वीन कि मां के सोच विचार से मेल खाते थे। जैसे कि ट्वीन कि मां सीधे साधे भोले भाले गरीब कमजोर असहाय लोगों के दुःख तकलीफ परेशानी को दिखावा समझते थे। और उन्हें बीना मदद के घर से बाहर निकाल देते थे। लेकिन जो दुसरे और तीसरे नंबर के बच्चे थे वै दोनों मेरी तरह थें। दुसरो के दुःख में शामिल हो जाना दुसरो के दुःख तकलीफ को अपने दुःख तकलीफ समझना और उनकी मदद करना। सहयोग करना। और अब समय के साथ-साथ चारों बच्चे बड़े होते जा रहे थे। और मेरी ट्वीन कि मां के नियम कायदे कानुन भी बढ़ते जा रहे थे। कि हम अमीर है पैसे वाले हैं। तो बढ़िया से और अच्छे अच्छे कपड़े पहनो और बिल्कुल बढ़िया से रहो ताकि लोगों को लगना चाहिए कि हम अमीर लोग हैं। लेकिन घर के बाहर किसी से दोस्ती नहीं करना बातचीत नहीं करना लोग अपने बच्चों को तुमसे दोस्ती करवाकर फिर तुम्हारे सामने अपनी हालातों का झुटा दिखावा करके तुमसे पैसे ऐंठने लग जाएंगे। लेकिन अब मेरी ट्वीन को तो सीधे साधे भोले भाले मासुम कमजोर डरपोक भावनात्मक गरीब कमजोर लाचार लोगों से ही मिलना था। क्योंकि वह भी वैसी ही थी। तो वह अपने जैसे लोगों का दुःख दर्द तकलीफ समझ सकतीं थीं। और उसे उसके जैसे ही लोग पसन्द आयेंगे। जो उसकी भावनाओ को समझ सके। क्योंकि परमात्मा ने उसे ऐसे घर में ही भेजा था जिसके भाग्य से लक से घर में पैसे कि आवक होती रहें। और परमात्मा उसके माध्यम से अपने दुःखी कमजोर लाचार सीधे-साधे भोले-भाले लोगों कि मदद कर सकें। लेकिन मेरी ट्वीन जिस घर में रहती थी। उस घर के नियम कानून कायदे बहुत सख्त थे। कि घर के बाहर किसी से दोस्ती नहीं करना है। और किसी पर पैसे लुटाने का काम करना मत नहीं तो घर में घुसने नहीं दिया जाएगा। सारे रिश्ते नाते तोड़कर घर से भगा दिया जाएगा। और मेरी ट्वीन तो थी सीधी-साधी भोली भाली डरपोक मां कि झुटी बातों पर भरोसा तुरंत कर लेती थी। लेकिन परमात्मा ने उसकी आत्मा को धरती पर यहीं काम करने के लिए भेजा था। तो वह उस काम को रोक भी नहीं सकतीं थीं। अगर रोकती तो परमात्मा कि तरफ से उसकी आत्मा को शोक दिए जाते। और यह सोल शोक उसे सपनों में दिखाई देते थे। कि कोई मुसीबत में फंसा है और उसे मदद के लिए पुकार रहा/रहीं हैं। या फिर उसे घर वालों कि किसी भी बात पर डांट-फटकार पढ़ती थी। या किसी भी तरह से परमात्मा उसे परेशान करते थे। ऐसा मेरे साथ नहीं होता था। क्योंकि में ग़रीब परिवार में जन्मा था। लेकिन परमात्मा मेरे माध्यम से पशु-पक्षियों कि मदद करवाते थे। और नहीं तो मुझ पर डिवाइन कि ब्लेसिंग तो थी ही सही मेरे हाथों के माध्यम से परमात्मा बहुत से नेक काम करवा दिया करते थे। लेकिन में तो उस समय बच्चा था। मुझे क्या पता चलता था कि मेरे भीतर कौन-कोनसी शक्तियां विद्यमान है। या फिर परमात्मा मेरे शब्दों के माध्यम से लोगों का भला करवा देते। या फिर जैसे मुझे परमात्मा ने आवाज बहुत सुंदर दी है। तो अगर मैं गीत गाऊ तो उससे लोगों को शुकुन और शांति का अनुभव होता था। मेरी आवाज़ से लोग हील हो जाते थे। और बिल्कुल आनंद आ जाता था। परमात्मा मेरे हाथों से ऐसे कार्यों को करवा रहे थे। लेकिन अब समय के साथ-साथ हम दोनों कि उम्र भी बढ़ने लगी और हमारे दोस्त भी बड़ी उम्र के बनने लगे। और अब हमारे द्वारा होने वाले कार्यों से दुसरो को जलन भी होने लगी। मेरी ट्वीन के दान पुण्य करने के कार्यों से उसकी बहन को जलन होने लगी। और उसकी बहन उसके द्वारा होने वाले कार्यों पर नजर रखने लगीं। और अगर मेरी ट्वीन किसी सहेली कि मदद कर देती तो उसकी बहन आकर उसकी मां को बता दिया करें। जिससे मेरी ट्वीन को माता-पिता कि डांट फटकार सुननी पड़ती थी। लेकिन वह उस डांट-फटकार को अनसुना करके अपनी बहन को बेवकुफ बनाकर उससे झुट बोलकर अपनी सहेलियों के पास चली जाती थी। और उन सहेलियों के साथ घुमती फिरती मोज मस्ती करती। लेकिन उसकी मां ने उसकी बहन को उसके पिछे सांए कि तरह चिपक कर रहने के लिए बोल दिया था। तो उसकी बहन उसके बारे में कैसे भी करके पता लगा लेती थी। और घर जाकर अपनी मां से सारी बातें बता दिया करतीं थीं। और इधर मेरे साथ परमात्मा मेरी आवाज़ के जरिए लोगों को हील करवा रहे थे। जिससे मुझे स्कूल में ईनाम मिलते थे। और इन इनामों और स्कूल में तारीफों को देखकर मेरी चाचीयों के लड़को को जलन होने लगती थी। और वै घर जाकर अपनी मांओं से बोल दिया करते थे। तो अब मेरी चाचीयां फिर अपने बच्चों को सीखाती पढ़ाती कि तुम दीपक को नशीला पदार्थ खिलाना सिखाओ इससे उसका गला खराब हो जाएगा। फिर वह बहुत ही बेसुरा गीत गायेगा। और अब चाचा के लड़कों ने मुझे गुटखा पान मसाला खाना सिखाने लगे। में खाता तो मुझे उल्टी हो जाएं। तो चाचा के लड़के पहले खुद खाकर मुझे दिखाएं। कि देख हम भी तो खा रहे है। कुछ भी नहीं होता है। तु भी खां। अगर मुझे फिर भी गुटखा खाने से उल्टी हो जाएं तो मेरे गुटखे में शक्कर डालकर खिलाते थे। ताकि मुझे गुटखा खाने कि लत लग जाएं।

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