मेरी दीदी ने मेरी चाचीयों और अपनी सहेलियों कि अपने पति कि झुटी बातों पर विश्वास करके ससुराल जाने से मना कर दिया। और जीद पकड़ कर बेठ गई। कि वह अब ससूराल नहीं जाएगी। मेरी दीदी को सभी लोगों ने खुब समझाया मीन्नते कि कि वह ससूराल चली जाएं अगर वह ससुराल नहीं जाएगी तो उसके माता-पिता कि बहुत बदनामी होगी। साथ ही उसकी भी बदनामी होगी। लेकिन मेरी दीदी के दिमाग में उसकी सहेलियों कि बातें बैठ गई कि उसका पति अच्छा नहीं दिखता है। और अगर वह इस व्यक्ती के साथ रहेंगी तो उसकी सहेलियां उसे हसेगी उसका मजाक उड़ाएगी। सभी लोग मेरी दीदी कि जीद के सामने हार गये। और फिर आखिर में माता-पिता को रिश्ता तोड़ना पड़ा। और अब रिश्ता तोड़ने के बाद मेरी दीदी के ससुराल वाले अच्छे लोग थे। इसलिए उन लोगों ने मेरी दीदी और मेरे माता-पिता कि बदनामी नहीं कि लेकिन लड़की का पहला रिश्ता टुट जाएं तो जमाना उसे एक नाम दे देते हैं। उतरन" दुसरे के घर से आई है। और भी तरह-तरह कि बातें करते हैं। दुनिया वाले और मेरी तीनों चाचीयां तो अफवाह उड़ाने में बदनाम करने में अव्वल दर्जे कि महिलाएं थीं। मेरे घर में ऐसा हो और वै तीनों अपना मुंह बंद रखे ऐसा तो कभी हो ही नहीं सकता था। देखिए आप लोगों कि झुटी बातों पर भरोसा करके कोई भी काम करते हैं। या किसी भी काम को छोड़ते है तो इसमें नुकसान आपको ही उठाना पड़ेगा। या परेशान आप ही होंगे। और अब मेरी दीदी ने अपनी सहेलियों कि झुटी बातों पर भरोसा करके अपने अच्छे खासे रिश्ते को तोड़कर खुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली। क्योंकि दुसरा रिश्ता कोई पेड़ पर तो लटका नहीं था जो तुरंत मिल जाता। लेकिन माता-पिता के कर्म और दीदी के सीधेपन और भोलेपन कि वजह से भगवान ने सोचा कि इस लड़की कि जल्दी शादी करवाना जरूरी है। नहीं तो मेरे माता-पिता को मेरी चाचीयां गांव मोहल्ले और रिश्तेदारों में बदनाम करेंगी उनका मजाक उड़ाएगी। लेकिन भगवान मेरी दीदी को भी सबक सिखाना चाहते थे। माता-पिता बच्चों के दुश्मन नहीं होते हैं। पर अगर आपको ऐसा जीवनसाथी चाहिए कि जिसे देखकर आपकी सहेलियां खुश रहें। तो अब हम तुम्हारी शादी ऐसे व्यक्ति से ही करवाएंगे। जिसे देखकर आपकी सहेलियां खुश हो जाएं। लेकिन मेरी चाचीयां चाहतीं थीं कि मेरी बहन कि शादी मेरी तीनों चाचियों के रिश्तेदारों में हों ताकि मेरी तीनों चाचीयां अपने रिश्तेदारों को बोलकर भड़काकर मेरी बहन को दुःख तकलीफ दिलवा सकें। जब मेरी बहन को दुःख तकलीफ होगी तो जाहिर सी बात है कि फिर मेरे माता-पिता को भी दुःख तकलीफ होगी। ही सही। और तीनों चाचीयों ने यही चाल सोचकर मेरी बहन का रिश्ता अपनी लड़की के मामा ससुर के लड़के से करवा दी। ताकि अगर चाचीयां मेरी बहन से उसके पति या ससुराल वालों के बारे में कुछ पुछे और अगर मेरी बहन अपने पति या ससुराल वालों के बारे में बातें बता दें तो मेरी चाचीयां झट से अपने रिश्तेदारों को बता दिया करें कि मेरी बहन तो उन लोगों के बारे में ऐसा-वैसा बोल रहीं थीं। और ऐसा बोलकर लड़ाई भरकर मेरी दीदी को उसके ससुराल वालों से मारपीट करवा सकें। या दुःख तकलीफ दिलवा सकें। और जब मेरी दीदी को दुःख तकलीफ होगी तो फिर मेरे मां बाप को भी दुःख तकलीफ होगी ही। और मेरी चाचीयों ने फिर मेरी बहन का रिश्ता अपनी ही लड़की के मामा ससुर के लड़के से करवा दिया। शुरुआत में तो दीदी के ससुराल वाले दीदी को कोई दुःख तकलीफ नहीं देते थे। सबकुछ बढ़िया से चल रहा था। इस वजह से मेरे माता-पिता भी खुश रहते थे। लेकिन मेरी दीदी कि जीद कि वजह से और पहले पति से रिश्ता तोड़ने कि वजह से गांव मोहल्ले और रिश्तेदारों में बदनामी मुंह देखना पड़ा इसके लिए माता-पिता कि गांव मोहल्ले और रिश्तेदारों में थोड़ी इज्जत कम हो गई थी। लेकिन मेरे दो भाई बहन का पढ़ाई लिखाई में दिमाग अच्छा था। और दोनों परिक्षाओं में अच्छे नंबरों से पास होते थे तो गांव मोहल्ले वाले मेरी दीदी वाली बातों को भुलाकर फिर मेरे भाई बहनों कि तारीफ करने लगे। साथ ही मेरे माता-पिता कि भी तारीफ होती थी। और अब मेरे माता-पिता कि तारीफ सुनकर तीनों चाचीयां आग बबूला होती थी। कि जेठानी को दुःख तकलीफ दिलवाने के लिए उसकी बड़ी लड़की का रिश्ता तुड़वाया यह सोचकर कि जेठानी कि लड़की को बदनाम करेंगे लड़की कि अफवाह उड़ाएंगे। गांव मोहल्ले और रिश्तेदारों में बदनामी करेंगे। लेकिन इसकी लड़की को तो बहुत जल्दी ही दुसरा रिश्ता मिल गया है। और जेठानी के दुसरे छोटे बच्चे पढ़ाई लिखाई में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। और जेठानी कि तो गांव मोहल्ले और रिश्तेदारों में फिर से तारीफ होने लगी है। फिर से लोगों में इज्जत कदर बढ़ने लगी है। अब और जेठानी का नाम करने के लिए छोटे भाई बहन तैयार हो गए हैं। अब इनको भी परेशान करों और इनको भी किसी ग़लत कार्यों में लिप्त करवाओ जिससे गांव मोहल्ले और रिश्तेदारों में हमारी जेठानी कि बदनामी हो। और मोहल्ले वाले हमारे जेठ जेठानी का तमाशा बनाएं। और फिर हम भी दुर से तमाशा देखेंगे। लेकिन अफ़सोस ऐसा हो नहीं पाता था। क्योंकि हम पांच भाई बहन थें। अगर चाचीयां एक भाई या बहन को बेवकुफ बनाकर ग़लत कार्यों में संलग्न करके मेरी कि बदनामी करवाने जाती तो दुसरा भाई या बहन अपने हुनर से या अच्छे कार्यों से लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेते और माता-पिता को गांव मोहल्ले और रिश्तेदारों के सामने निचा देखने या बदनाम होने से बचा लेते थे। जिससे मेरी तीनों चाचियों का जो मेरे माता-पिता को बदनाम करने का प्लान असफल हो जाता था। और गुस्से से आग-बबूला हो जाया करती थी। और फिर जो भाई-बहन अपने हुनर से या अच्छे कार्यों से लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता मेरी तीनों चाचीयां उस भाई बहन को ग़लत कार्यों में फसाने या सिखाने के लिए चालाकियां चलतीं। अब जैसे कि मेरा बड़ा भाई स्कुल में पढ़ाई लिखाई करने में भी अच्छा था। और मेहनत मजदूरी करने में भी अव्वल था। पढ़ाई भी कर लिया करता था और माता-पिता को पैसे कमाने में भी मदद कर दिया करता था। जिससे गांव मोहल्ले वाले मेरे माता-पिता और भाई-बहनों कि खुब तारीफ करते थे। और इस तारीफ से मेरी तीनों चाचीयां जल-भुन कर ख़ाक हो जाती थी। और फिर अपने बच्चों को मेरे भाई बहनों कि तरह पढ़ाई लिखाई और काम करने के लिए मारते पिटते या परेशान करते। कि वै मेरे भाई-बहनों कि तरह ही पढ़ाई-लिखाई और काम करें। पर चाचीयों के बच्चों से एक साथ दो-दो काम होते नहीं थें। और अब चाचीयों के बच्चों से एक साथ दो दो काम होते नहीं थें तो फिर उनकी वजह से मेरी चाचीयों कि कोई भी गांव मोहल्ले वाले तारीफ नहीं करते थे। इसलिए फिर मेरी तीनों चाचीयां मेरे भाई-बहनो को अपने और दुसरे बच्चों को भड़काकर बेवकुफ बनाकर उन्हें मेरे भाई-बहनों को ग़लत कार्यों में संलग्न करने के लिए कहती थीं। और अब ऐसे ही मेरी तीनों चाचियों ने अपने और गांव के दुसरे बच्चों को सीखाया पढ़ाया कि वै बच्चे मेरे भाई को भी नशा और ताश के पत्ते खेलना सिखाएं। और मेरा भाई गांव के बच्चों कि झटी बातों पर भरोसा करके ताश के पत्ते खेलना सिख गया। और स्कुल से घर आने के बाद अपने दोस्तों के संग में पत्ते खेलता रहता था। और अब मेरे भाई को पत्ते खेलते देख वहीं लड़के पुरे गांव मोहल्ले में इस बात का ढिंढोरा पीटेंगे। और अब जब भी गांव मोहल्ले वाले मेरे भाई के अच्छे कार्यों कि तारीफ करेंगे तो फिर वही लड़के और मेरी तीनों चाचीयां मेरे भाई कि बदनामी करेंगे कि किसने कह दिया कि वह ग़लत कार्य नहीं करता है। वह तो ताश के पत्ते खेलता है। और आवारा गर्दी करता है। और ऐसे काम करना मेरे भाई को मेरी तीनों चाचियों के बच्चों ने ही सिखाएं थें। फिर जैसे ही मेरे माता-पिता को मेरे भाई कि हरकतों के बारे में पता चला तो फिर मां ने मेरे भाई कि खुब पिटाई कर दी। लेकिन फिर मेरे भाई ने इन कार्यों को करना बंद कर दिया। और अब सिर्फ पढ़ाई लिखाई ही करते थे। और पढ़ाई के साथ कभी कभार माता-पिता के साथ मजदुरी करने चलें जाया करते थे। फिर भाई के बाद में भी अपने हुनर दिखाने के लिए तैयार हो चुका था। और पहला हुनर मेरा था सिंगिंग का मेरे माता-पिता ने मुझे भी स्कुल में पढ़ाई लिखाई करने के लिए स्कुल में भर्ती करवा दिया। और तीनों चाचियों ने भी मेरी उम्र वाले बच्चों को स्कुल में भर्ती करवा दिया। और अब जब में स्कुल जाने लगा तो स्कुल टीचर्स ने शनिवार के रोज बालसभा का कार्यक्रम आयोजित किया और सभी बच्चों से उनके फ्युचर प्लान के बारे में पुछने लगे। कि बच्चे अपने जीवन में क्या-क्या बनना चाहते हैं। या फिर सभी बच्चों के भीतर कोन कोन से हुनर है। बच्चों के हुनर को देखकर फिर बच्चों को ए इन्डीपेंडेंस के दिन परफॉर्म करवाना। ताकि बच्चों कि परफॉर्मेंस से स्कूल और टीचर्स का नाम हो। और अब ऐसे ही सभी बच्चों से पुछते-पुछते टीचर मेरे पास भी आएं और मुझे खड़े होकर सभी बच्चों के सामने अपने फ्युचर ड्रिम के बारे में बताने के लिए बोला गया। और में था सीधा-साधा भोला-भाला मासुम डरपोक सहमा हुआ शर्मिला सा मुझे तो टीचर्स ने खड़े होकर बोलने के लिए बोल दिया तो जैसे मानो मुझे टीचर्स ने फ्युचर ड्रिम नहीं बल्कि मुझसे ऐसी चीज बताने के लिए पुछ लिया हो जिसको बताने में में इतना डर गया कि अगर मेने बच्चों के सामने अपने सपनों के बारे में बता दिया और अगर मेरे सपने दुसरे बच्चों के सपनों से छोटे हुए तो मुझे सब लड़के हंसेंगे मेरा मजाक उड़ाएंगे। इसलिए मैं बताने में डर भी रहा था और शर्मा भी रहा था। लेकिन टीचर्स मेरे चेहरे कि मासुमियत देखकर समझ गये कि में शर्मा रहा हूं। और इतने बच्चों के सामने बोलने से डर भी रहा हुं। इसलिए फिर टीचर्स ने मुझे बालसभा का आध्यक्ष बना दिया कि जब सारे बच्चे परफार्म करगे और उनकी परफॉर्मेंस पर तालियां बजेगी तो मेरे भीतर भी सबके सामने अपने हुनर का प्रदर्शन करने का होंसला और जज्बा जागेगा। और हिम्मत जागेगी। लेकिन शनिवार के आधे दिन के बाद टीचर्स ने बालसभा रखी गई थी। तो पुरा दिन खतम हो गया। सारे बच्चों ने अपना परफार्मेंस दे दिया लेकिन मेरे भीतर हिम्मत नहीं आई। मेरे भीतर कोई जोश जुनून नहीं जागा। लेकिन फिर बालसभा का कार्यक्रम टीचर्स ने समाप्त कर दिया। लेकिन स्कूल कि छुट्टी होने के बाद मेरी चाचीयों के बच्चों ने स्कूल कि सारी बातें अपने माता-पिता को जाकर बता दि की आज स्कूल में दीपक को अध्यक्ष बनाया था। तो चाचीयों ने पुछा कि अध्यक्ष बनाया था। किस बात के लिए अध्यक्ष बनाया था। और यह बात बाकी बच्चों ने भी अपने अपने माता-पिता से जाकर बोल दिया कि आज स्कूल में दीपक को अध्यक्ष बनाया था। छः सात साल का तो था। मे लेकिन मोहल्ले कि महिलाओं ने मेरी इस छोटी सी उपलब्धि कि भी खूब तारीफ की अब यह तारीफ मेरी चाचीयों को अखर गई। तो तीन चाचीयों में से एक चाची के बच्चें बड़े बड़े हो गए थे। तो एक चाची के बच्चें मेरे साथ नहीं पढ़ते थे। लेकिन दो चाचीयों के बच्चे मेरी उम्र के ही थे। तो दो चाचीयों के बच्चे मेरे साथ ही स्कूल जाते थे। और इन दो चाचीयों को ही मेरी मां कि तारीफों से ही जलन होती थी। कि मेरी मां कि गांव मोहल्ले में इतनी तारीफ कैसे होती है। और लोग हमारी जेठानी का ही सपोर्ट क्युं करते हैं। अगर गांव के किसान फसल कटने के बाद कि बची हुई फसल मेरे माता-पिता को मुफ्त में ले जाने के लिए बोलते तो मेरी चाचीयां मोहल्ले के लोगों को भड़का दिया करते थे कि हमारी जेठानी के पास तो कोई तंत्र मंत्र टोने टोटके करने के तरीके हैं। जिससे वह किसानों को अपने वश में कर लेती है। और उन्हें लुट-लुटकर घर ले आती है। और अब मोहल्ले वाले फिर किसानों को मेरे माता-पिता के खिलाफ भड़काते कि मेरी मां के पास तो कोई टोने टोटके है। जिसकी सहायता से वह तुम लोगों को बेवकुफ बनाया करतीं हैं। और तुम्हारी फसल घर लाया करतीं हैं। लेकिन अब जो किसान मेरे माता-पिता कि मेहनत और ईमानदारी को जानते थे। वै किसान मोहल्ले वालों कि बातों को नजरंदाज कर दिया करते थे। तो मोहल्ले वाले और मेरी तीनों चाचीयां मेरे माता-पिता पर खुब गुस्सा करते थे। क्योंकि गांव के किसान उनकी बातें सुनते ही नहीं थें। और इस बात से मेरी तीनों चाचियों को और मोहल्ले वालों को मेरे माता-पिता पर और भी ज्यादा गुस्सा आता था। कि साले किसान भी उनकी बातों पर विश्वास नहीं करते है। और मेरे माता-पिता को ही अपने खेतों में मजदूरी करवाने लेकर जाएं। जिससे माता-पिता कि पुरे मोहल्ले में आर्थिक स्थिति मजबूत थीं। और मेरे पिता और हम पांच भाई बहन भी किसी ग़लत आदतों में संलिप्त नहीं थें। जिससे पैसों कि बचत अच्छी खासी हो जाती थी। लेकिन ऐसा होता है ना कि अपने ही बीच रहने वाला अपनी ही जाति का व्यक्ति अगर सुख शांति से और ईमानदारी से अपने जीवन को व्यतीत कर रहा हों तो लोग उसे सुख शांति से कैसे रहने दे सकते हैं। अगर मोहल्ले के सभी लोग पैसे कमाने के लिए चोरी चकारी बेईमानी मक्कारी कर रहे हैं। परेशान हो रहे हैं। और तुम सुख शांति से जीवन बिता रहे हो। तुम्हें सुख शांति से जीवन बिल्कुल भी नहीं जीने दिया जाएगा। लोग आपको भी परेशान करेंगे। आपको भी दुःख तकलीफ देंगे। और आपको परेशान करने के लिए आपके घर कि सुख शांति भंग करने के लिए या तो आपके पति के दिमाग में आपके नाम से शक भरा जाएगा। या फिर आपके पति को ग़लत आदतों संगतियों में फसाएंगे। या फिर आपके बच्चों को ग़लत आदतों का शिकार बनाएंगे जिससे आपके पैसों का नुक़सान भी हों। और आपके पति और बच्चों कि ग़लत आदतों और हरकतों कि वजह से आपको बदनाम किया जा सके। और अब मेरे पिता और हम पांच भाई बहन सभी सीधे साधे भोले भाले थें। लोगों कि झुटी बातों पर विश्वास तुरंत कर लेते थे। अगर मोहल्ले वाले मेरे पिता को मेरी मां कि झुटी बातें बोलकर भड़काते तो मेरे मोहल्ले वालों कि बातों पर भरोसा कर लेते थे। और मेरे पिता मेरी मां पर शक करके भड़क जाते थे। और इन बातों से फिर लड़ाई झगड़े करते थे। या फिर कभी मोहल्ले वाले मेरे पिताजी को शराब पीने के लिए उकसाते थे। कि क्या तुम महिलाओं कि तरह घर में ही बेठे रहते हो क्या तुम कमाते ही रहते हों। हमें देखो हम हर जगह घुमते फिरते हैं। खाते पीते हैं। हमारी पत्नियां हमें कभी किसी वस्तु को खाने-पीने से कभी रोकती है। क्या। और तुम्हारी पत्नी तो तुम्हारे ऊपर पुरी नज़र रखतीं हैं। हर जगह आने जाने से खाने-पीने से रोकती टोकती रहतीं हैं। हम तों हमारी पत्नीयों कि बातें बिल्कुल भी नहीं सुनते हैं। और यह सारी बातें झुटी होती थी। और मेरे पिता से इसलिए करते थे। ताकि मेरे पिता गुस्से में आकर वै भी मेरी मां कि बातों को नजरंदाज करे और नशे पत्ते करने लगे। लेकिन पिता का शरीर शराब को सहन नहीं कर पाता था। थोड़ी सी शराब ही पिता को चढ़ जाती थी। और ऐसा भगवान कर दिया करते थे। क्योंकि भगवान नहीं चाहते थे कि उनके सच्चे और ईमानदार भक्त को लोग बदनाम करें।