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Twinflam and soulmate's epi 11

इस समय भी मेरे माता-पिता और चाचा-चाची आपस में एक-दूसरे से बातचीत नहीं करतें थे। लेकिन केवल में ही अपने चाचा -चाची और उनके बच्चों से बातचीत करता था। उनमें रहता था। क्योंकि गांव के दुसरे बच्चों में मेरा मन नहीं लगता था। और जब मेरे चाचा-चाची देखते थें कि में उन्ही लोगों के बच्चों में और उनमें ही रहता हूं तो मेरे चाचा-चाची मुझे मेरे माता-पिता के खिलाफ भड़काते थें। मेरे माता-पिता को मेरी नज़रों में झुटा धोखेबाज बताकर ग़लत आदतों और हरकतें सीखाते थें। जब मेरे माता-पिता मुझे ग़लत आदतें हरकतें करने से रोकते थे। तों चाचा -चाची मेरे माता-पिता को मेरा दूश्मन बताते थें। कि तेरे माता-पिता तुझसे प्यार नहीं करते हैं। इसलिए तो तुझे कुछ खाने पीने नहीं देते हैं। तुझे कुछ लाकर देते नहीं है। ना तुझे कहीं घुमने फिरने देते हैं। देख हम हमारे बच्चों को को कोई भी रोक-टोक नहीं करते हैं। और मैं था सीधा-साधा भोला-भाला मासुम में अपने चाचा -चाची कि झुटी बातों पर यकीन कर लिया करता था। और अपने माता-पिता कि बातें ना सुनकर अपने चाचा -चाची और उनके बच्चों कि बातें सुनता था। और उनकी सीखाई हुई बातों हरकतों पर अमल करता था। और अपने माता-पिता भाई-बहन को अपना दुश्मन मानता था। खैर अभी मुझे और चाचा -चाची ने अपने बच्चों को गांव से दस किलोमीटर दूर शहर में स्थित छात्रावास में भर्ती करवाया था। क्योंकि मेरे माता-पिता मुझे सरकारी नौकरी लगवाना चाहते थे। इसलिए वै मुझे पढ़ा लिखा रहें थे। लेकिन मेरे चाचा-चाची चाहते थे कि अब उनके बच्चे पढ़ाई लिखाई छोड़कर कोई काम धंधा करने लग जाएं। लेकिन मेरे माता-पिता मुझे पढ़ा लिखा रहें थे तों चाचा -चाचीयों को भी मेरे पीछे-पीछे स्कूल में और छात्रावास में भर्ती करवाना पढ़ा। लेकिन सोच तो चाचा -चाची कि यही थीं कि दीपक को पढ़ाई-लिखाई करने नहीं देना है। और दीपक को किसी भी कार्य में उलझाकर रखना है। बच्चे का मन पढ़ाई लिखाई में तब पुरी तरह से फोकस्ड रहता है। जब वह ब्रम्हचर्य का पालन करता है। और उसके भीतर पुरी ऊर्जा संचित होती है। जब पुरी ऊर्जा संचित होती है तो वह बच्चा पढ़ाई लिखाई या दुसरे कार्यों में भी पुरी तरह से फोकस्ड रहता है। लेकिन चाचा -चाची तो चाहते ही नहीं थे कि मेरा पढ़ाई-लिखाई में मन लगे। चाचा -चाची तो चाहते थे कि मेरा मन पढ़ाई लिखाई में ना लगकर किसी ऐसे कार्य में लगें जिससे मेरे भीतर कि संचित ऊर्जा नष्ट हो। साथ ही ऐसे कार्य करने में मेरी बदनामी भी हों। और अब मुझसे ऐसे कार्य करवाने के लिए मेरी चाचीयों को मेरे शरीर को मेरे मन को अपने नियंत्रण में करना पड़ेगा। और उसके लिए मेरे ऊपर कोई तंत्र मंत्र टोने-टोटके करवाने पड़ेगे। ताकि मुझे ऐसे कार्य को करने कि आदत लगें जिससे मेरी संचित ऊर्जा नष्ट हो जाएं। और पढ़ाई लिखाई में मेरा बिल्कुल भी मन ना लगे। और चाचा -चाची के बच्चे जो कार्य करने के लिए मुझसे कहें में उन्हीं कार्यों को करने लग जाऊं। खैर अभी हम सभी बच्चे घर से छात्रावास जाने के लिए निकल पड़े। गांव से दो किलोमीटर पैदल चलकर मेन सड़क तक पहुंचे। और थोड़ी देर इंतजार करने के बाद बस आई। फिर हम सभी बच्चे बस में बैठ गए। और थोड़ी देर बाद शहर में जाकर बस से उतर गए। और फिर थोड़ी देर चलने के बाद छात्रावास आ गया और हम सभी बच्चों ने छात्रावास में एन्ट्री लें लिया। जब छात्रावास के भीतर गये। तो छात्रावास में हमारे गांव के दुसरे मोहल्ले के दो लड़के पहले से ही छात्रावास में रह रहे थे। वै दोनों छात्रावास में पुराने हो गए थे। जब हम सब छात्रावास में गये तो मेरे चाचा चाची के बच्चे तो कोई भी प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं कर रहे थे। कि उन्हें अपने माता-पिता कि याद आ रही है। भाई-बहन कि याद आ रही है। लेकिन मुझे अपने घरवालों कि याद आ रही थी। तों में सुबह से शाम तक छात्रावास में बिल्कुल उदास बेठा रहा। लेकिन फिर शाम के समय छात्रावास वार्डन ने सभी बच्चों को एक जगह एकत्रित करके छात्रावास के नियम कानून बताएं। और सभी बच्चों से नियम कानूनों को पालन करने के निर्देश दिए गए। साथ ही नियम तोड़ने कि सज़ा भी बताई। तो सभी बच्चों ने हामी भर दी। लेकिन मेरा छात्रावास में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था। और एक कोने में बेठकर घरवालों को याद करता रहता। क्योंकि मैं कभी भी अपने गांव से घरवालों से पहले कभी भी दुर नहीं हुआं था। इसलिए अभी छात्रावास में मेरा मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा था। तो वार्डन के साले ने मेरे चाचा के लड़कों से कहा कि तुम सब मिलकर इसे थोड़ा बाहर घुमाने फिराने के लिए लें जाओ। ताकि मेरा मन घरवालों से हटकर शहर में आ जाएं। फिर चाचा चाची के लड़के मुझे छात्रावास से बाहर शहर में घुमाने फिराने के लिए लें गये। फिर जब घुम फिरकर वापस आएं तो छात्रावास में खाना खाने के लिए बैठा दिया तों खाना बहुत ही बुरा लग रहा था। लेकिन मजबूरी थी। इसलिए खा गया। फिर सोने के लिए बिस्तर पर लेट गया। और सो गया। उस दिन पहली बार माता-पिता और भाई बहनों के बिना रात कटी थी। लेकिन पढ़ाई करना भी जरूरी था। क्योंकि माता-पिता ने सरकारी नौकरी का सपना देख रखा था। फिर अगली सुबह छात्रावास में चाय नहीं मिलती थीं। तो बीना चाय के तैयार हुआं और हम सभी स्कूल के लिए रवाना हो गए। फिर नो बजे ब्रेक टाइम हुआं तों छात्रावास के सभी बच्चे स्कूल से छात्रावास में नाश्ता करने के लिए आएं। फिर नाश्ता करने के बाद दोबारा से स्कूल के लिए रवाना हो गए। मेरे माता-पिता मुझे पुरे हफ्ते के केवल बीस रुपए देते थे। जिनमें से छः रुपए बस का किराया था। और बाकी पैसे खर्च करने के लिए थें। क्योंकि छात्रावास में सभी वस्तुएं हमें दि जाती थी। जैसे कि तेल साबुन खाना किताबें पेन पेंसिल रबर अस्पताल सबकुछ फ्रि था। लेकिन अगर हम छात्रावास के बाहर जाकर कुछ खाना पीना चाहे तों वह अपने पैसों से खरीद कर खा पी सकते थे। लेकिन मेरा छात्रावास में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था। और चाचा-चाची के बच्चों का मन भी बिल्कुल नहीं लग रहा था। वै लोग भी छात्रावास से घर भागने कि सोच रहे थे। फिर जैसे -तैसे शनिवार तक स्कूल किया और दोपहर बाद हम सभी बच्चे अपने घर लोट आएं। फिर घर आने के बाद मोहल्ले में हम पांच छः बच्चे ही थें जो शहर जाकर पढ़ाई कर रहे थे। हमारे पहले के पढ़ाई करने वाले बच्चों ने घर कि समस्याओं को देखते हुए पढ़ाई लिखाई छोड़कर काम धंधे करने लगे थें। तो हम जब छात्रावास के लिए गये थें तब भी मोहल्ले वाले हमें सम्मान कि नजरों से देख रहे थे। और जब छात्रावास से घर लोटकर आएं थें। तब भी हमें सम्मान कि नजरों से देख रहे थे। कि हमारे मोहल्ले के बच्चे हैं। खैर हम सभी बच्चे अपने अपने घर पर दों दिन कि छुट्टी को इंजॉय कर रहे थे। मेरे माता-पिता मुझसे छात्रावास कि बातें पुछने लगें कि तुझे छात्रावास में क्या -क्या मिला है। और क्या -क्या मिलता है। और कब कब मिलता है। तो मेने माता-पिता को सबकुछ बता दिया। कि छात्रावास में मुझे क्या क्या और कब कब मिलता है। तो माता-पिता खुश हो गए। कि चलों दीपक अच्छी जगह ही गया है। लेकिन माता-पिता को क्या पता था कि मेरे चाचा-चाची के लड़के मुझे बिल्कुल भी पढ़ाई लिखाई नहीं करने देंगे। और दीपक को गंदी हरकतों में संलिप्त करवाएंगे। क्योंकि मेरी चाचीयां जानतीं थीं कि दीपक सीधा-साधा भोला-भाला और मासुम है। यह हामारी झुटी बातों पर भी विश्वास कर लेता है। और यह रहता भी है हमारे बच्चों के साथ में ही। और इसके माता-पिता कि जान दीपक में ही अटकी हुई रहती है। तों हम दीपक को नियंत्रित करके इसके माता पिता को अपने मन मुताबिक चला सकते हैं। अपना गुलाम बना सकते हैं। क्योंकि दीपक के माता-पिता डरपोक है। मतलब हम दीपक को चोट पहुंचाएंगे तों तकलीफ उसके माता-पिता को होगी। तो हम दीपक के माता-पिता को अपने मन मुताबिक चलाने के लिए दीपक का इस्तेमाल करते हैं। पहले में चिकन मटन खाता था। तो मेरे माता-पिता मेरे लिए रविवार के दिन मटन लेकर आएं और हम सभी घरवालों ने पेट भरकर खाया। और फिर सब लोग सो गए। लेकिन मुझे अगले दिन स्कूल जाना था। तों मां ने मुझे सुबह पांच बजे निंद से जगा दिया लेकिन में उठा नहीं तों मां फिर मुझे गालियां देने लगी। फिर मां कि गालियां सुनकर फिर मैं बिस्तर से उठकर फटाफट तैयार हो गया। तब तक चाचा के लड़के भी मुझे बुलाने के लिए मेरे घर पर आ गए थे। फिर हम सभी एक साथ गांव से मेन सड़क के लिए पैदल पैदल निकल पड़े। फिर जब मेन सड़क पर पहुंच गए तब थोड़ी देर इंतजार करने के बाद बस आ गई। और हम सभी बस में बैठकर शहर कि और निकल पड़े। फिर दस पंद्रह मिनट के बाद बस ने हम सबको शहर पहुंचा दिया था। फिर शहर पहुंचने के बाद हम सभी बच्चे फटाफट छात्रावास में पहुंचे और अपना सामान रखते हुए स्कूल में पहुंच गए। फिर दोपहर बाद छात्रावास में पहुंचे नाश्ता किया और दोबारा से स्कूल पहुंच गए। फिर बारह बजे फाइनल छुट्टी हो जाती थी। फिर स्कूल से छात्रावास आने पर खाना खिलाते और फिर आपको पढ़ाई करना है तो पढ़ाई करों नहीं तो अपने काम कर लो जैसे कि कपड़े धोना स्कूल का होमवर्क आदि। लेकिन आप छात्रावास से बाहर नहीं जा सकते हैं। लेकिन हम पांच छः लड़के अपनी ही धुन में मगन रहते थे। हम छः बच्चे सोमवार से शनिवार तक छात्रावास में रहते। और शनिवार के दिन बारह बजे के बाद वापस घर लौट जाते थे। क्योंकि शनिवार रविवार को हम अपने घरवालों से मिल जाया करते थे। और दोबारा से सोमवार से स्कूल पहुंच जाया करते थे। लेकिन एक महिने तक ऐसा चलता रहा और हमें किसी ने कुछ नहीं कहा। लेकिन फिर एक महिने के बाद छात्रावास के वार्डन के साले को किसी ने हमारे बारे में बता दिया कि हम छः लड़के शनिवार के दिन छुट्टी होते ही घर भाग जाते हैं। तों इस शनिवार के दिन हम जब छहों लड़के जब स्कूल से छात्रावास में आएं तो छात्रावास के वार्डन का साला छात्रावास के गेट पर खड़ा हो गया। ताकि हम छहों छात्रावास से बाहर ना निकल सके। लेकिन फिर क्या था। हम उस दिन छात्रावास में ही रुकें। लेकिन फिर हम छहों लड़के छात्रावास में शाम का खाना खाने के बाद शहर में घुमने निकल गये। और घुमते घुमते हमें नो दस बज जातीं थीं। फिर घुमते घुमते छात्रावास में आ जाया करते थे। और अब हर रोज का ऐसा ही हो गया था। तब हम छः लड़को के बारे में फिर से किसी ने पुराने लड़को से बोल दिया कि यह छः लड़के छात्रावास से बाहर शहर में घुमते रहते हैं। में छः लड़को में कमजोर और डरपोक था। जब हम छः लड़को को पुराने लड़को ने एक कमरे में बुलाकर हमारी रेगिंग ली तों में बहुत बुरी तरह से डर गया था। असल में लोग आपको डराने धमकाने के लिए चीखते हैं चिल्लाते हैं। करते कुछ नहीं है। बस आपको डराने के लिए आप पर चिखते चिल्लाते हैं। ताकि आप डरकर उनकी बातें मान लें। और पुराने लड़को ने हमें यही कहा कि अब से बाहर घुमते दिखाई दिए तो तुम सबको मार पड़ेगी। में तो डरपोक ही था। पुराने लड़को कि जोर से चिखने चिल्लाने पर ही डर गया। और अगले दिन से घुमने जाने से मना कर दिया। लेकिन चाचा के लड़के कहा मानने वाले थे। क्योंकि वै घुमते फिरते इसलिए थें कि ना हम पढ़ाई-लिखाई करेंगे ना दीपक को पढ़ाई-लिखाई करने देंगे। शुरुआत में मुझे छात्रावास से हर शनिवार के दिन घर लें आतें थें। और जब छात्रावास वालों ने घर जाने से मना किया तो चाचा के लड़कों ने शहर में घुमना फिरना शुरू कर दिया ताकि मैं पढ़ाई लिखाई ना कर पाऊं लेकिन अब पुराने लड़को ने हमें शहर में भी घुमने फिरने पर रोक लगा दी। लेकिन चाचा के लड़कों ने पुराने लड़को कि बातों को नजरंदाज करते हुए फिर से शहर में घुमना फिरना शुरू कर दिया तो पुराने लड़को को हम छः लड़को पर बहुत गुस्सा आने लगा कि छात्रावास के सारे बच्चे उनकी बातें मानते हैं। लेकिन यह छः लड़के उनकी कोई भी बात नहीं सुनते हैं। तब पुराने लड़को ने छात्रावास के वार्डन से हमारी शिकायत कर दी कि यह छः लड़के छात्रावास में अपनी मनमानी करते हैं। और ना ही किसी कि कोई बात सुनते हैं। चाचा के लड़कों का प्लान था कि छात्रावास में अपनी मनमर्जी चलाएंगे किसी कि भी बात नहीं मानेंगे तों छात्रावास का वार्डन हम सबको छात्रावास से बाहर निकाल देगा। फिर हमको तो वैसे भी आगे कि पढ़ाई लिखाई करनी नहीं है। हमारे पीछे -पीछे दीपक के माता-पिता भी उससे पढ़ाई लिखाई छुड़वा देंगे। जब पुराने लड़को ने छात्रावास के वार्डन को हम छः लड़को कि शिकायत कि तो छात्रावास के वार्डन ने हम छः लड़को को अपने पास बुलाया और बाहर घूमने फिरने और पुराने लड़कों कि बात ना सुनने का कारण पुछा। तो मेरे एक चाचा का लड़का थोड़ा लड़कियों कि तरह था। मतलब उसकी बोल चाल लड़कियों कि तरह थीं। तों उसने वार्डन को बताया कि सर यह पुराने लड़के हमारी रेगिंग लें रहें थे। और हमें कहते हैं कि तुम पंखे को गाली दों। अब उसके ऐसा बोलने पर वार्डन ने पुराने लड़को को ही डांट फटकार लगा दीं। जिससे पुराने लड़को में हम छः लड़को के लिए नफ़रत भर गई कि अब इन छः लड़को को तों सबक सिखाना ही पड़ेगा। लेकिन पुराने लड़को मे दों लड़के हमारे गांव के दुसरे मोहल्ले के थे। और दोनों लड़को में से एक लड़का मेरी मोसी का लड़का था। मतलब उसकी मां और मेरी मां एक ही गांव कि थीं। इस हिसाब से वह मेरी मोसी का लड़का था। और हम छः लड़को में में सबसे सीधा-साधा भोला-भाला और मासुम दिखाई देता था। तो पुराने लड़कों को मेरी मोसी का लड़का बोल देता था। कि सबको नुकसान पहुंचाना लेकिन उसको कुछ मत बोलना वो इनके साथ रहना नहीं चाहता है लेकिन यह पांच लड़के उसको जबरदस्ती अपने साथ लेकर जाते हैं। ताकि वार्डन सर इनके साथ उसको भी छात्रावास से बाहर निकाल दें। लेकिन अब चाचा के लड़के तो मुझे भी अपने साथ में ही रखते थें। तो में चाचा के लड़कों से अपना पीछा छुड़ाव कैसे चाचा के लड़के मुझे अकेला रहने ही नहीं देते थे। जहां कहीं भी जाते थे। मुझे अपने साथ लेकर जाते थे। क्योंकि वै मुझे पढ़ाई लिखाई करने देना चाहते थे। फिर अब हास्टल के वार्डन ने हमें छात्रावास से बाहर घुमने फिरने से मना कर दिया तब तो हमें छात्रावास में ही रहना था। तो फिर चाचा के लड़कों ने छात्रावास से बाहर निकलने का तरीका ढूंढ निकाला मुझे बिमार बनाया कि तु बिमारी का नाटक कर और फिर हम तुझे अस्पताल लेकर जाएंगे। तुझे वार्डन का साला पुछेगा कि अस्पताल में इतने लोगों को क्युं लेकर जाओगे तो बता देना कि तुझे अस्पताल में डर लगता है। इसलिए तु इन लोगों को भी साथ लेकर जा रहा है। ऐसी बातें सीखाकर मुझे वार्डन के साले के पास भेजते थे। और अगर में जाने से या वैसा करने से मना करता था तों मेरे सामने बहाने बनाते थे कि मेरे पेट में ऐसा हो गया है। वैसा हों गया है। थोड़ा बाहर घूमकर आ जाएंगे तों पेट ठिक हों जाएगा। और में उनकी झुटी बातों पर यकीन कर लिया करता था। और वार्डन के साले के पास पहुंच जाता था।

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