मेरे नानाजी के स्वर्ग वास होने के बाद मेरी नानी भी बिमार रहने लगीं थीं। फिर मेरे बड़े मामा मामी ने मिलकर मेरे छोटे मामा कि शादी भी कर दी। अब नाना-नानी के घर में तीनों मामाओं का विवाह हो चुका था। मेरे दो मामा कपड़े सिलाई का काम करते थे। और एक मामा बकरीयों को सम्भालने का काम किया करते थे। और मामीयां खेतों में काम करने जाया करती थी। तीनों भाई और मामीयों कि मेहनत मजदूरी से घर में आमदनी अच्छी हो जाया करती थी। साथ ही आमदनी से मेरे माता-पिता और गांव मोहल्ले में ग़रीब कमजोर लोगों कि मदद भी कर दिया करते थे। जिससे ईश्वर कि कृपा मामा मामी पर भी बनीं रहतीं थीं। ईधर मेरे चाचा जिनकी सरकारी नौकरी लग गई थी। तो वै अपनी तनख्वाह के पैसे दादी को ना देकर दादी को ही अपने साथ लेकर चले गए। और साथ ही सबसे छोटे चाचा को भी अपने साथ लेकर चले गए। ताकि तीनों चाचीयां अपने पतियों को नोकरी वाले चाचा के खिलाफ भड़काएं कि तुम्हारा भाई नोकरी से लगा है तो तुम सभी भाईयों को तो कुछ भी नहीं देता है। तो मेरे चाचा समझ जाएं और चाचीयों को बोल सकें कि हमारे भाई के पास हमारी मां और छोटे वाला भाई भी रहता है। मां और भाई का खर्च उठाने में सारी तनख्वाह खतम हो जाती होगी। तो फिर उसके पास क्या बचता होगा। लेकिन फिर भी चाचा छोटे चाचा कि पढ़ाई लिखाई करवाने के बावजूद कुछ पैसों कि बचत कर लिया करते थे। और मेरी मां के पास रख दिया करते थे। चाचा को मेरे माता पिता कि ईमानदारी पर भरोसा था। लेकिन दुसरी तीनों चाचीयों कि ईमानदारी पर भरोसा नहीं था। इसलिए चाचा अपनी तनख्वाह के पैसों में से कुछ पैसे बचाकर मेरे माता-पिता के पास रख दिया करते थे। लेकिन मेरी पांचवें नंबर कि चाची और दुसरी दो चाचीयां बहुत चंट चालाक थी। बहुत होशियार थीं। वै तीनों अंदाजा लगा लिया करतीं थीं। कि नोकरी वाले चाचा नोकरी पर से घर आते थे तो सीधे पहले मेरे माता-पिता के पास ही आते थे। उसके बाद दुसरे भाईयों के घर जाते थे। इससे तीनों चाचीयां समझ जाया करती थी। कि मेरे नोकरी वाले चाचा अपनी तनख्वाह मेरे माता-पिता को ही देते हैं। तो मेरी चाची को बहुत गुस्सा आता था। कि जो वह चाहती हैं। वह सबकुछ हो क्युं नहीं रहा है। और उसके सबकुछ उलट क्युं होते जा रहा है। हम हमारी जेठानी को हमारी सांस और जेठ के नजरों में जितना गिराने कि कोशिश करतीं हैं। पर जेठानी तो जेठों कि नजरों में और भी ज्यादा जगह बना लेती है। अब हम ऐसा क्या करें कि हमारी जेठानी को दुसरे भाईयों कि नजरों में लालची लुटेरी शाबित कर पाएं। तीनों चाचीयां लगातार अपने पतियों और सांस को मेरी मां कि झुटी बातें बोलकर भड़काती रहतीं थीं। कि तुम्हारी भाभी तो पैसे कमाने वालों पर तंत्र मंत्र टोने टोटके करती है। उन्हें अपने वश में करती है। और उनके पैसों को लुटती है। जब मेरे चाचा चाचीयों कि बातों को अनसुना करते तो चाचीयां चाचाओं पर इल्ज़ाम लगाती थी। कि तुम्हारी भाभी ने तुम्हारे ऊपर भी तंत्र मंत्र टोने टोटके करके तुम्हे भी अपने वश में कर लिया है। तभी तो तुम हमारी बातें मान नहीं रहे हो। और अपनी भाभी कि ही बढ़ाई कर रहे हो। अब पत्नियों के बार-बार ऐसा बोलने पर फिर चाचाओं ने भी चाचीयों कि बातों पर भरोसा करना शुरू कर दिया। कि मेरी मां ने सभी चाचाओं पर तंत्र मंत्र टोने टोटके करके हमें अपने वश में कर लिया है। लेकिन नोकरी करने वाले चाचा अभी भी तीनों चाचीयों कि बातों को अनसुना करके अपनी तनख्वाह मेरी मां के हाथ में ही दिया करते थे। और नोकरी वाले चाचा जब अपनी तनख्वाह मेरी मां के हाथों में देते थे। तो मेरी पांचवें नंबर वाली चाची को बड़ी जलन होने लगती थी। कि वै जो चाहतीं हैं। वह क्युं नहीं हो रहा है। लेकिन अब कुछ समय बितने लगा। और अब नोकरी वाले चाचा कि शादी करने कि उम्र होने लगी। तब चाचा के रिश्ते आने लगे जैसे ही लोगों को पता चलता कि मेरे चाचा सरकारी नौकरी में हैं। तो लोग चाचा के साथ अपनी बेटी का विवाह करने के लिए दादी के घर आने लगें। जो भी व्यक्ति दादी के पास अपनी बेटी के विवाह कि बात लेकर आते। उन्हें तीनों चाचीयां दादी से बोलकर मना कर दिया करवा दिया करतीं थीं। कि चाचा कि शादी इस घर में मत करो। लेकिन मेरे चाचा सिर्फ मेरी मां के फेसले का इंतजार करते थे कि मेरी मां क्या कहती है। लेकिन मेरी मां को भी एक दो रिश्ते पसंद नहीं आएं थे। तो मां ने भी दादी को मना कर दिया था। लेकिन फिर चाचा के पास एक और आदमी अपनी लड़की कि बात लेकर गया। और साथ में लड़की कि एक फोटो भी दें दी। ताकि चाचा मेरी दादी और मेरे माता-पिता को फोटो दिखा सकें। फिर चाचा ने जो फोटो दादी के पास भेजी थी। वह फ़ोटो दादी और सभी चाचा-चाचीयों ने देखी। और कहा कि हमें तो लड़की बिल्कुल भी समझ नहीं आ रही है। फिर दादी और नोकरी वाले चाचा ने फोटो मेरी मां को दिखाई तो मां ने लड़की कि फोटो देखकर कहा कि ठीक है लड़की तो। देखने के लिए जा सकते हैं। और फिर चाचा दादी और मेरे माता-पिता चाचा के साथ लड़की को देखने के लिए लड़की के घर गये। और अब इस वाकया से मेरी पांचवें नंबर वाली चाची फिर भड़क गई। और तीनों चाचीयां आपस में मिलकर मेरी मां कि ऐक दूसरे से बुराईयां करने लगीं। लेकिन तीनों चाचीयों कि बातें कोई भी नहीं सुनता था। लेकिन अब जब चाचा दादी और मेरे माता-पिता लड़की देखकर वापस घर आएं। तो बाकि चाचाओं ने भी पुछ-परख कि की लड़की कैसी है और परिवार कैसा है। सारी बातें फिर मेरी मां ने दुसरे चाचाओं को बताई तो दुसरे चाचा भी खुश हो गए। कि चलों हमारे भाई को अच्छा ससुराल मिला है। पत्नी अच्छी मिली है। पढ़ी लिखी लड़की मिली है। फिर चाचा अगर मेरी मां कि तारीफ कर देते तो मेरी चाचीयों को और भी ज्यादा जलन होने लगती थी। कि हर जगह हमारी जेठानी कि ही तारीफ होती है। फिर जब सभी लोगों ने लड़की को पसंद कर लिया तब शादी के और बारात ले जाने के दिन बनाने के लिए मेरे पिता को लड़की के घर भेजा गया। और फिर जब दिन बना लिए तब माता-पिता चाचा कि बारात लेकर लड़की के घर पहुंचे। और चाचा कि शादी करके घर वापस लौट आए। और फिर कुछ दिनों तक नई चाची को दादी के साथ गांव में रखा। तों मेरी पांचवें नंबर वाली चाची ने नई चाची को भी मेरी मां के खिलाफ भड़का दिया कि तुम अपने पति पर तंत्र मंत्र टोने टोटके करके अपने वश में कर लो नहीं तो हमारी जेठानी तुम्हारे पति से तनख्वाह के सारे पैसे हड़प कर जाएगी और तुम ऐसे ही मुंह ताकती रह जाओगी। क्योंकि हमारी जेठानी ने सभी भाईयों के ऊपर तंत्र मंत्र टोने टोटके करके रखें हुए हैं। सभी भाई हमारी जेठानी कि ही बातें मानते हैं। और तभी कोई काम करते हैं। तो तुम अब से होशियार रहना और चाचा से तनख्वाह अपने पास रखने के लिए बोलना। फिर कुछ दिनों बाद नोकरी वाले चाचा चाची को अपने साथ लेकर चलें गए। लेकिन नई चाची ने इस बात का ध्यान रखा कि अपने पति से तनख्वाह लेनी है। और अपने पति को अपने वश में करना है। ताकि नोकरी कि तनख्वाह चाचा सिर्फ चाची के हाथ में दें। लेकिन मेरे चाचा बहुत होशियार थें। और चाची कि हर हरकत पर नजर रखते थे। कि चाची चाचा को अपने वश में करने के लिए क्या-क्या चालाकियां करतीं हैं। नई वालीं चाची मेरे चाचा को वश में करने के लिए एक महिला से मिली और उससे अपने पति यानि कि मेरे चाचा को अपने वश में करवाने के लिए टोटके करवाने के लिए बोलतीं थी। लेकिन उस महिला कि एक बेटी भी थीं जो मेरे चाचा को शादी से पहले पसंद करतीं थीं। लेकिन वह लड़की दुसरे समाज कि थी। इसलिए चाचा ने दादी और मेरी मां को उस लड़की के बारे में कोई भी बातें नहीं बताई क्योंकि दादी और मां इंकार कर देते इसलिए चाचा ने इस बात को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। लेकिन उस महिला कि लड़की ने मेरी चाची के प्लान को सुन लिया था कि मेरी चाची उसकी मां से मेरे चाचा को चाची के कंट्रोल में करने के टोटके लेने आती है। तो उस लड़की ने मेरी चाची और अपनी मां कि सारी बातें मेरे चाचा को बता दि। जिससे मेरे चाचा सतर्क हो गए। और चाची कि हर हरकतों पर नजर रखने लगे। जब चाची ने देखा कि उनके द्वारा चाचा पर किए गए सभी टोटके विफल हो गए हैं। तो फिर चाची ने चाचा को कंट्रोल करने और अपने वश में करने का प्लान कैंसिल कर दिया। क्योंकि मेरे चाचा ने चाची को रंगे हाथों पकड़ लिया था। इसलिए अब चाची ने मेरे चाचा को कंट्रोल करने का प्लान कैंसिल कर दिया और मेरे छोटे चाचा जो कि बड़े चाचा के साथ रहकर पढ़ाई लिखाई कर रहे थे। उनके पीछे पड़ गई। कि चाचा और दादी और वह मिलकर छोटे चाचा कि शादी उनकी तलाक शुदा बहन से कर देते हैं। और इस बात के लिए चाचा और दादी दोनों मान गए।कि हां शादी कर देते हैं। लेकिन फिर बड़े चाचा ने मेरी मां से इस बात का जिक्र किया कि भाभी मां और मेने यह फैसला लिया है कि छोटे भाई कि शादी मेरी तलाक शुदा साली से कर देते हैं। तो मेरी मां ने मना कर दिया। कि नहीं ऐसा क्युं कर रहे हो। तुम अगर यह शादी करवा देते हो तो एक दिन लोग तुमसे सवाल करेंगे कि तुम लोगों ने कुंवारे लड़के कि शादी तलाक शुदा लड़की से क्युं कि हे। क्या तुम्हारे लड़के में कोई कमी है जो तुमने उसकी शादी तलाक शुदा लड़की से करवा दी है। फिर क्या जवाब दोगे तुम लोगों को और छोटे चाचा कभी अपने यार दोस्तों में कहीं जायेंगे और कभी उनके दोस्तों ने उनसे उनकी पत्नी के बारे में पुछ लिया तब चाचा क्या जवाब देंगे। अगर दोस्तों कि बातों में आकर रिश्ते से नाखुश होकर उस लड़की को दुःख तकलीफ देने लगें तो। फिर वह लड़की क्या करेंगी। और तुम लोग क्या करोगे। तो दादी और चाचा ने कहा कि यह बातें तो हमने सोची ही नहीं तो मां ने कहा कि कोई भी रिश्ता करने से पहले उस रिश्ते के फायदे और नुक्सान के बारे में पहले सोचना चाहिए ना। तो फिर दादी और नोकरी करने वाले चाचा ने कहा कि फिर अब क्या करें। तब मां ने कहा कि छोटे चाचा कुंवारे हैं तो उनके लिए लड़की भी कुंवारी ही ढुंढो। तो अब मेरी मां के इस फैसले से मेरी चाची मेरी मां पर नाराज़ होने लगी कि मेरी मां ने दादी और चाचा के बीच में आकर उसकी बहन का रिश्ता तुड़वा दिया। फिर पांचवें नंबर वाली चाची ने नोकरी वाले चाचा कि पत्नी को मेरी मां के खिलाफ फिर से भड़काया कि देख लिया अपनी जेठानी को दादी और तुम्हारा पति किसकी सुनते हैं। जेठानी के कहने पर तुम्हारे पति और सांस ने तुम्हारी बहन के साथ शादी करने से मना कर दिया। हमारी जेठानी ने हमारी सांस और तुम्हारे पति को अपने वश में किया हुआ है। तभी तो हमारी जेठानी के कहने पर यह रिश्ता कैंसिल कर दिया। तो चाची ने इस बात को अपने दिमाग में स्टोर करके रख लिया। लेकिन फिर कुछ समय बाद तक छोटे चाचा पढ़ाई लिखाई करते रहे। और इधर गांव में जो चार भाई रहते थे। उन सभी के बच्चे भी बड़े-बड़े हो गये थे। लेकिन तीनों चाचीयां अभी भी मेरी मां से जलन कि भावना रखतीं थी। मेरी मां सीधी-सादी भोली-भाली ईमानदार और मेहनती थी। तो गांव के किसान भी अधिकतर माता-पिता को ही अपने खेतों में काम करवाने के लिए ले जाया करते थे। और फसल काटने के बाद जो कुछ आखिर में बचता वह माता-पिता को किसान मुफ्त में घर ले जाने के लिए बोल दिया करते थे। जिससे माता-पिता कि बचत और भी अच्छे से हो जाया करती थी। जिससे माता-पिता कि आर्थिक स्थिति मोहल्ले वालों से थोड़ी ज्यादा अच्छी हो गई थी। मेरे घर में शुरुआत में मेरी माता-पिता के घर लड़कियां ही हुई लेकिन दो बहनें ज्यादा दिन तक जीवित ना रह सकीं फिर दो बड़ी बहनें और एक बड़ा भाई थे। लेकिन दादी और पिता चाहते थे कि एक और भाई हो जाएं तो आपरेशन करवा लेंगे। लेकिन फिर से एक और लड़की का जन्म हुआ। तो दादी और पिता नाराज हो गए। लेकिन अब सभी गांव वाले भाईयों के बच्चों को पढ़ाई लिखाई करने स्कुल में भेजना शुरू कर दिया। लेकिन मेरी मां कि चाहत थी कि एक लड़का और हो जाएं तब आपरेशन करवा लेंगे। लेकिन फिर दादी और पापा ने मना कर दिया और आपरेटर करवाने के लिए अस्पताल में गये लेकिन अस्पताल में डाक्टरों ने बताया कि आपके पेट में बच्चा है। और वह में था। क्योंकि मेरी गांव वालीं तीनों चाचीयां मेरे माता-पिता और भाई-बहनों के साथ छल कपट और चालाकियां करके उन्हें लोगों में बदनाम कर रही थी। माता-पिता और भाई-बहनों को दुःख तकलीफें दिलवा रही थी। क्योंकि मेरे माता-पिता और भाई-बहन सीधे साधे भोले भाले डरपोक थे। और मेरी मां तीनों देवरानियों को अपनी बहन कि तरह ही समझती थी। लेकिन मेरी तीनों चाचीयों के मन में सदैव मेरे माता-पिता और भाई-बहनों के लिए मन में जहर ही भरा रहता था। अगर मेरे भाई बहन माता-पिता को काम बंटाने में मदद करते तो मेरी तीनों चाचीयां मेरे भाई बहनों को मेरे माता-पिता को मदद करने से रोकने के लिए मेरे भाई बहनों को खाने-पीने कि वस्तुओं में टोटके करके खिला दिया करतीं थीं। जिससे मेरे भाई-बहन अधिकतर बिमारी से जुझते रहते थे। चाचीयों कि चाल थी कि जब बच्चे बिमार रहेंगे तो फिर मेरे भाई बहन माता-पिता कि मदद कर नहीं पाएंगे। और अगर बच्चों कि मदद नहीं मिलेगी तो मेरे माता-पिता फिर आगे नहीं बढ़ पाएंगे। और अगर बिमार रहेंगे तो फिर मेरे माता-पिता कि सारी कमाई बिमार बच्चों को ठिक कराने में ही खर्च हो जाएगी। लेकिन अफ़सोस चाचीयों का प्लान फेल हो जाता था। लेकिन फिर भी मेरी तीनों चाचीयां हार मानने का नाम नहीं लेती थी। और कोई ना कोई बहाने ढुंढती रहतीं थीं। कि कैसे भी करके मेरे भाई बहनों को बिमार करों। फिर मेरी बहनों कि ऊमर भी विवाह लायक हो गई थी। लेकिन जिस जगह मेरे माता-पिता ने जमीन खरीदी थी। उस जमीन के आसपास के लोग मेरे माता-पिता से लड़ाई-झगड़े करते रहते थे। और दुसरी तरफ मेरी तीनों चाचीयां भी मेरी दादी को और चाचाओं को मेरी मां कि झुटी बातें बोलकर भड़काया करतीं थीं। लेकिन अब इस घर में मेरा जन्म होना बाकी था। फिर जब माता-पिता अस्पताल आपरेशन करवाने के लिए गए तो डाक्टरों ने माता-पिता को कहा कि पेट में बच्चा है। तो दादी ने कहा कि यह भी लड़की ही होगी। इसलिए इसको गिरा दें। लेकिन मां ने एक पल को सोचा कि कभी लड़का हुआं तों। इसलिए मां मन बनाकर विश्वास के साथ अस्पताल से घर लोट आई। लेकिन घर आने के बाद तीनों चाचीयों ने मेरी दादी को इतना भड़का दिया कि दादी मेरी मां को एक ही बात बार-बार बोले कि यह भी लड़की ही होगी तो तुम इसे गिरा दो तेरे घर में पहले से ही तीन लड़कियां हैं। दहेज दे देकर थक जाएंगी। और हम सब भी थक जाएंगे। पहले ही मेरे पिता से छोटे भाई के घर चार लड़कियां थी। और तीसरे नंबर के चाचा के घर एक लड़की और दो लड़के थे। और चोथे नंबर के चाचा के घर दो लड़के और पांचवें नंबर के चाचा के घर एक लड़का और एक बुआ के घर भी चार लड़कियां थी और दुसरी बुआ के घर दो लड़कियां थी। तो तीनों चाचीयां मेरी दादी को मुझे मारने के लिए मेरी मां को तरकिबे सीखाया करतीं थीं। मतलब प्लान तीनों चाचीयां बनातीं थीं। लेकिन उस प्लान को अप्लाई मेरी दादी से करवाती थी। और दादी तीनों चाचीयों कि बातों पर भरोसा करके मेरी मां को बच्चा गिराने कि तरकिबे बताया करतीं थीं। तीनों चाचीयों ने मेरी दादी को इसलिए चुना क्योंकि मेरी दादी तीनों चाचीयों कि बातों पर भरोसा कर लिया करतीं थीं। तो तीनों चाचीयां मेरी दादी को भेवकुफ बनाकर पाप करवातीं थी। ताकि अगर कल को पाप करने कि सजा मिले तो दादी को मिले चाचीयों को नहीं मिले। और दुसरा कारण यह था कि मेरी मां अपनी सांस कि बात टाल नहीं सकतीं हैं। सांस कि बातें तो माननी ही पड़ेगी। इसलिए फिर मेरी मां मुझे मारने के लिए कभी मिट्टी खाती तो कभी कोयला खाती तो कभी कुछ तो कभी कुछ खाती रहती थी। लेकिन मुझे तो इस दुनिया में आना ही था। क्योंकि मेरी वजह से ही मेरे पुर्वजों कि अमीर बनने कि अंतिम इच्छा पूरी होना था। क्योंकि मेरे नाना नानी मेरे दादा दादी सत्कर्म करते थे। लेकिन गुलामी और अशिक्षा के कारण कभी अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला नहीं पाएं और कभी अमीर बन नहीं पाएं। फिर मेरे माता-पिता भी सच्चाई के रास्ते पर चलकर धर्म का पालन करते थे। लेकिन मेरी तीनों चाचीयां मेरे माता-पिता को मोहल्ले में और घर परिवार में माता-पिता कि झुटी बातें बोलकर बदनाम करते और फिर लोग मेरे माता-पिता को शक भरी नजरों से देखते। जो लोग तीनों चाचीयों कि बातों पर भरोसा कर लेते वै लोग मेरे माता-पिता को शक भरी नजरों से देखते थे। लेकिन जो लोग मेरी तीनों चाचियों कि बातों पर भरोसा नहीं करते थे वै लोग मेरे माता-पिता को ही अपने खेतों में मजदूरी करवाने ले जाते थे। इधर मेरे माता-पिता को मेरे घर के आस-पास के लोग भी लड़ाई झगड़े करके परेशान करते थे। और उधर मेरी बहनों कि शादी कि उम्र भी बढ़ती जा रही थी। तो मोहल्ले वाले बातें बनाने लगे कि लड़कियों को कब तक बिठाकर रखोगे जल्दी विवाह क्युं नहीं कर देते हो फिर माता-पिता ने बहनों के लिए रिश्ते ढुंढे। तो बड़ी बहन को भी अच्छा परिवार मिला था और छोटी बहन को भी अच्छा परिवार मिला था। लेकिन मेरी दोनों बहनें थी सीधी-सादी भोली-भाली और चाचीयां थी बहुत होशियार और चंट चालाक जैसे ही तीनों चाचीयों को पता चला कि मेरी बहनों को अच्छे ससुराल वाले मिलें हैं। तो मेरी तीनों चाचियों ने मेरे घर के आस-पास के रहने वालों को लड़ाई-झगड़े के लिए भड़का दिया कि जब मेरी दोनों बहनों कि बारात आए तब तुम सब लोग मिलकर हमारे जेठ जेठानी से लड़ाई-झगड़े करना। और अब जब आस-पास के रहने वालों ने मेरी बहनों कि बारात के दिन लड़ाई झगड़े करने का प्लान बना रहे थे तब मेरे पिता के दोस्तों ने लड़ाई झगड़े करने वालों कि बातें सुन ली। और जिस दिन मेरी बहनों कि बारात आई उस दिन मेरे पिताजी के दोस्तों ने लड़ाई झगड़े करने वालों को बारातियों में घुसने ही नहीं दिया और मेरे घर से दुर ही रहने दिया। जब मेरी बहनों कि विदाई हो गई तब मेरे पिताजी के दोस्तों ने मेरे माता-पिता को बताया कि तुम्हारे दुश्मन तुम्हारी बेटीयों कि बारात के दिन लड़ाई झगड़े करने का प्लान बना रहे थे। लेकिन हमने तुम्हारे घर उन लोगों को आने ही नहीं दिया। लेकिन इस हार से मेरी चाचीयों कि संतुष्टि नहीं हुई। वै तीनों चाहतीं थीं कि लड़ाई झगड़े मेरी बहनों कि शादी में हो जिससे मेरी बहनों के अच्छे परिवार में हुएं रिश्ते टुट जाएं। लेकिन भगवान पर्दे के पीछे से सबकुछ सम्माल रहें थे।