जब भगवान ने देखा कि मेरी तीनों चाचियों ने अपने पतियों और सांस-ससुर कि नजरों में मेरी मां को तंत्र मंत्र टोने टोटके करने वाली सांस-ससुर और सभी देवर-देवरानियों को अपने वश में करने वाली साबित करने के लिए प्लान बना लिया है। और अब उस प्लान को अपने पतियों और सांस-ससुर को बताने वालीं है। तो भगवान ने कहा कि ठीक है प्लान भी बनाओं और उस प्लान के बारे में अपने पतियों और सांस-ससुर को भी बताओं। पर तुम्हारी बातों पर विश्वास कोई नहीं करेगा। क्योंकि दादा-दादी और चाचाओं कि ग़रीबी भुखमरी ही इतनी थी कि वै लोग अच्छा खाने पीने के लिए तरसते थे। कलपते थे। और मेरे नाना-नानी मामा-मामी सबकुछ अच्छा ही अच्छा खाने-पीने पहनने-ओढ़ने कि वस्तुएं भेजते रहते थे। लेकिन मेरी मां सभी खाने-पीने कि वस्तुओं को अपने सांस-ससुर और देवरों में बांट दिया करतीं थीं। यह सोचकर कि मेरे माता-पिता तो मुझे और दें देंगे। लेकिन आप लोगों को कोन देगा। इसलिए मेरे पीछे-पीछे आप भी खा-पीकर खुश रहो। मेरी मां कि इस तरह कि सोच को देखकर मेरे दादा-दादी और चाचा सभी तारीफ करते और सभी चाचा और दादा-दादी मेरी मां कि सलाह मशविरा लेते। लेकिन घर में मेरी मां कि इतनी इज्जत कदर मान सम्मान मेरी तीनों चाचियों को कांटे कि तरह चुभता था। क्योंकि दो चाचीयों के माता-पिता कि आर्थिक स्थिति बहुत खराब थीं तों वै दोनों चाचीयां अपने माता-पिता के घर से अपने पतियों और सांस-ससुर के लिए कुछ नहीं लाती थीं। तो मेरी दादी और उनके पति फिर उन्हें डांट-फटकार लगाते थे। और जो पांचवें नंबर कि चाची थी। उसके माता-पिता कि आर्थिक स्थिति थोड़ी अच्छी थी। लेकिन वह अपने घर से कुछ लातीं नहीं थीं। और अपने पति पर ही दबाव बनातीं थीं कि तुमने मुझसे शादी कि हे तो फिर मेरा पेट और सारे खर्च भी तुम ही उठाओ। और चाचा फिर दादा-दादी को बोलते थे गंदी-गंदी गालियां देते थे परेशान करते थे। और मेरे पिताजी और दुसरे चाचा-चाची दादा-दादी को परेशान होते देख नहीं पाते थे। तो फिर मेरे माता-पिता और दुसरे दो चाचा-चाची पांचवें नंबर वाले चाचा कि डिमांड को पुरा करते थे। नही तो मेरी चाची मेरे चाचा को छोड़ देने कि धमकियां देती थी। लेकिन अब मेरी पांचवें नंबर वाली चाची चाहतीं थीं कि घर में जो मान सम्मान इज्जत कदर बड़प्पन मेरी मां का हैं। वह मान-सम्मान इज्जत कदर बड़प्पन मेरी चाची को दे दिया जाय। लेकिन अगर चाची को घर में राजा कि तरह रहना है। तो चाची अकेली कुछ नहीं कर पाएंगी। और अगर वह अकेली मेरी मां को दादी और चाचाओं कि नजरों तंत्र मंत्र टोने टोटके करने वाली बोलेंगी तो दादी और सभी चाचा उसकी बातों पर विश्वास नहीं करेंगे। और उसे ही घर से बाहर निकाल देंगे। लेकिन अगर दोनों चाचीयों को भी इस प्लान में शामिल कर लिया जाएं तो तो मेरा प्लान सफल हो सकता है। तो चाची ने दोनों चाचीयों को मेरी मां के खिलाफ भड़काया कि हमारी सांस और तुम्हारे पतीयों को हमारी जेठानी ने तंत्र मंत्र टोने टोटके करवाकर अपने वश में कर लिया है। और हमारी जेठानी ही हमारी सांस और तुम्हारे पतियों को तुम्हारे खिलाफ भड़काती है। और तुम दोनों को और तुम्हारे माता-पिता को भला-बुरा और गालियां देने के लिए बोलतीं है। तो दोनों चाचीयों ने कहा कि नहीं ऐसा कुछ नहीं है। हमारी जेठानी ऐसा क्युं करेंगी। तो चाची ने कहा कि ऐसा ही है। हमारी जेठानी ने हमारे पतियों और सांस-ससुर को तंत्र मंत्र टोने टोटके करवाकर अपने वश में कर लिया है। और हमारे पतियों और सांस-ससुर को हमारे खिलाफ भड़काती रहतीं हैं। देखा नहीं तुम लोगों ने हमारे पति और सांस ससुर हमारी जेठानी कि ही बातें मानते हैं। चाची कि ऐसी बातें सुनकर दोनों चाचीयां पाचवें नंबर कि चाची के बिछाए गए जाल में फस गई। और पुछने लगीं कि फिर अब क्या करें। अगर हम हमारे पतियों को यह बात बोलेगें तो हमारे पति हमारी बातों पर विश्वास नहीं करेंगे। और हमारी सांस भी हमारी बातों पर विश्वास नहीं करेंगी। लेकिन फिर चाची ने कहा कि हां हमारे पति हमारी बातों पर विश्वास नहीं करेंगे। लेकिन अगर हम अपने पतियों को बार-बार एक ही बातें बोलते रहेंगे तो एक दिन हमारे पति हमारी बातों पर विश्वास करने लग जाएंगे। और फिर हमारी बातें मानने लग जाएंगे और अगर हमारी बातें नहीं मानेंगे तो हम ही हमारे पतियों पर तंत्र मंत्र टोने टोटके करवाकर अपने वश में कर लेंगे। और अब तीनों चाचीयों ने प्लान बनाकर अपने पतियों को मेरी मां के खिलाफ झुटी बातें बोलकर भड़काने लगीं। कि तुम्हारी भाभी तो अपने माता-पिता से जो खाने पीने कि वस्तुएं लातीं है। उन वस्तुओं में तंत्र मंत्र टोने टोटके करवाकर लातीं है। और तुम सबको खाने के लिए देती है। ताकि तुम सब खाकर उसके वश में आ जाओ और उसका ही कहना मानों। और वह तुम सब लोगों पर अपना हुकुम चला सकें। लेकिन दादा-दादी कि ग़रीबी भुखमरी चरम पर थीं। मेहनत मजदूरी से इतने लोगो का पेट बड़ी मुश्किल से भरता था। ऐसे में मेरे नाना-नानी मेरी मां को खाने-पीने कि वस्तुएं भेजकर दादा-दादी और चाचाओं को हफ्तेभर तक राहत दे दिया करतीं थीं। और अब अगर दादा-दादी और चाचा चाचीयों कि बातों पर विश्वास करके मां से लड़ाई-झगड़े करते हैं। और उनके घरवालों पर तंत्र मंत्र टोने टोटके करने के इल्जाम लगातें है तो फिर नाना-नानी मेरी मां और बाकि लोगों के लिए खाने-पीने कि वस्तुओं पर रोक लगा देंगे। और नाना-नानी मेरी मां को दुःख तकलीफ में भुखे मरते हुए आनाज कि चोरी करते हुए देख नहीं सकते थे। इसलिए नाना-नानी मेरी मां के लिए खाने-पीने पहनने-ओढ़ने के लिए इतना दें देते थे। कि दादा-दादी और चाचाओं कि भी व्यवस्था हो जाती थी। भुखमरी पुरी खतम नहीं हो जाती थी। लेकिन सुबह-सुबह खाना बनाने के लिए परेशान नहीं होना पड़ता था। और नाश्ता करके काम करने जाया जा सकता था। फिर महिलाएं आराम से सबके लिए खाना बनाकर ला सकतीं थीं। जब मेरी मां का विवाह नहीं हुआ था। तब दादी सुबह पांच बजे सोकर उठती फिर नदी अकेली दस लोगों का आनाज घट्टी में पिसती फिर दस लोगों के लिए खाना बनाती फिर खेतों में मजदूरी करने जाती। और मजदुरी के पैसे जितने मिलते थे। उन पैसों से सिर्फ एक समय का आनाज है मिलता था। और जितना आनाज मिल जाए उतने में ही अपनी भुख शांत कर लिजिए। और खाना भी आज के जमाने के खाने कि तरह नहीं था। आनाज को घट्टी में पिसकर दलिया अलग करके उसे बर्तन में डालकर पानी डाल दो और उबालकर काढ़े कि तरह पी लो या खा रों और दिनभर खेत में मजदुरी करों। और फिर शाम को वहीं प्रक्रिया दोहराओ और हर रोज ऐसा ही चलता रहा। लेकिन जब मेरी मां दादी के घर आई तो मेरी मां बहुत भाग्यशाली थीं। और मेरी मां के दादी के घर में आने से दिन बदलते चलें गए। पहले जितनी भुखमरी नहीं रहीं। पैसों कि बचत भी होती थी। हफ्ते में कभी कभार थोड़ा अच्छा खाने-पीने को भी मिलने लगा। और फिर पिताजी से छोटे भाई बहनों कि भी शादी हो गई। मेरे दादा दादी और चाचा और मोहल्ले कि महिलाएं भी मेरी मां कि तारीफ करने लगती थी। सबकी भलाई के बारे में सोचती थीं तो घर में दादा-दादी और चाचा सभी मां कि तारीफ करते थे और मां कि सलाह मशविरा के बिना दादा-दादी और चाचा कोई भी काम नहीं करते थे। लेकिन मेरी तीनों चाचीयां मेरी दादी और अपने पतियों कि नजरों से उतारना चाहती थी। और मां कि जगह पर वै तीनों बेठना चाहतीं थीं। घर में