में जिस भी जगह काम करने जाता था। वहां में कार्य इतनी ईमानदारी से करता था। कि उस जगह का मालिक मेरी ईमानदारी देखकर मेरी और आकर्षित हो जाता था। लेकिन उस जगह पर जो दुसरे कर्मचारी कार्य करते थें। उनकी मक्कारी बेईमानी और चालाकी मेरी ईमानदारी कि वजह से उजागर हो जातीं थीं। इसलिए फिर वै लोग मुझे मालिक कि नज़र में झुटा धोखेबाज और बेईमान साबित करने में लग जाते थें। जिसकी वजह से फिर मुझे बहुत मेहनत और संघर्ष करना पड़ता था। खैर अभी मेरी वजह से आफिस में वै दोनों लोग मेडम को नुक़सान पहुंचाने पर उतारू हो गए थे। इसलिए फिर मेने सोचा कि में नहीं चाहता कि मेरी वजह से मेडम को कोई तकलीफ़ हो। क्योंकि इन दोनों ने तो पुरी प्लानिंग बना लिया था कि ये मेडम ही दीपक को सपोर्ट करतीं हैं। और सर को भी हमारी चुगली करतीं हैं। इसलिए अब दीपक को छोड़ो और इस मेडम को ही आफिस से बाहर निकालो। लेकिन में इन दोनों कि नियत भांप गया था। इसलिए फिर मेने आफिस छोड़ने का फेसला कर लिया और आफिस छोड़कर अपने दीदी और जीजाजी के पास सुरत (गुजरात) चला गया। जब दीदी-जीजा के पास गया तो फिर अब वहां मुझे नई नोकरी ढुंढना था। तो एक दो कंपनियों में नोकरी ढुंढने के लिए गया लेकिन मुझे कोई नोकरी नहीं मिलीं तब मेने जीजाजी को कहा कि वह मुझे उनकी ही कंपनी में किसी काम में लगवा दें। जब तक मुझे अपने फिल्ड से रिलेटेड नोकरी नहीं मिलती तब तक वै मुझे अपनी कंपनी में ही लगवा दें। तब जीजाजी ने अपने सुपरवाइजर से मेरी बात कि तों सुपरवाइजर ने मेंटेनेंस डिपार्टमेंट में एक इंजिनियर से बातचीत कि और मुझे कंपनी में वायरमैन कि नोकरी पर रख लिया। लेकिन मुझे तनख्वाह नहीं बताई मुझे कह दिया कि अभी काम करों में तुम्हारा काम देखकर तुम्हारी तनख्वाह बता दुंगा। मेरे पास कोई काम तो था नहीं इसलिए फिर मेने जीजाजी कि ही कंपनी में वायरमैन कि नोकरी कर लीं। उस इंजिनियर के पास एक और लड़का काम करता था। जो कि बहुत होशियार और चंट चालाक लड़का था। इंजिनियर ने मुझे उस लड़के के साथ रहने के लिए बोला कि इस लड़के के साथ रहो और काम सीखों तों मेने इंजिनियर को हां कहकर उस लड़के के साथ रहने लगा। तों उस लड़के ने मुझे इलेक्ट्रीकल वायरमैन का काम सीखाने लगा। जहां भी कनेक्शन करना होता वह मुझे बताता कि यहां कनेक्शन कर दों। काम उसको भी नहीं आता था। क्योंकि वह दुसरा काम करता था। कंपनी में एक डिपार्टमेंट था जिसमें इमरोडरी मशीन इंस्टॉल थीं। वह लड़का इमरोडरी मशीन का मेंटेनेंस देखता था। और उस डिपार्टमेंट में वह लड़का मुझे जाने नहीं देता था। क्योंकि उस लड़के कि सोच थीं कि अगर में इमरोडरी मशीन का मेंटेनेंस सीख गया तो फिर कंपनी में उसकी कोई वेल्यू नहीं रह जायेंगी। इसलिए वह लड़का मुझे इमरोडरी डिपार्टमेंट में घुसने भी नहीं देता था। लेकिन अगर बाहर कोई फाल्ट आता था। तो इंजिनियर उसे मेरी मदद करने के लिए जरुर भेजते थे। एक बार कंपनी मालिक ने जुकी मशीन का नया डिपार्टमेंट तैयार करवाया जिसमें 60-70 मशींने लगवाई। और उन सभी मशीनों कि वायरिंग करने के लिए मुझे बोला था। सुबह तक वह डिपार्टमेंट रेडी करके देना था। तो मेने और इंजिनियर ने मिलकर उस डिपार्टमेंट कि पुरी वायरिंग कर दिया। फिर सुबह में अपने दीदी के घर वापस लौट आया। फिर एक दो दिन बाद महिना खतम हो गया था। तो मुझे मेरे महिने कि कमाई मिलने वाली थी। और जैसे ही मुझे मेरी तनख्वाह मिली तो मुझे तनख्वाह देखकर बहुत गुस्सा आया। और खुद को ही कोसने लगा। कि मैं इंदौर छोड़कर सुरत क्युं चला आया। लेकिन अब क्या किया जाए। में आ तो गया था। तों में फिर जैसे -तैसे वहां काम करता रहा। में इमरोडरी डिपार्टमेंट को छोड़कर पुरी कंपनी का मेंटेनेंस देखता था। और वह लड़का सिर्फ इमरोडरी डिपार्टमेंट में ही रहता था। एक बार इमरोडरी डिपार्टमेंट में दों तीन मशीनों में काम ज्यादा आ गया था। तो इंजिनियर ने मुझे भी इमरोडरी डिपार्टमेंट में बुला लिया जब में अंदर गया तो में पहली बार उस डिपार्टमेंट में गया था काम करने के लिए। ऐसे तो में जाता था। लेकिन वह लड़का मुझे ज्यादा देर तक वहां रुकने नहीं देता था। और बाहर भगा दिया करता था। इसलिए फिर में उस डिपार्टमेंट में जाता ही नही था। लेकिन आज इंजिनियर ने मुझे बुला लिया था। और इंजिनियर मुझे समझा रहा था। तों उस लड़के ने देख लिया कि इंजिनियर मुझे इमरोडरी मशीन के बारे में काम सीखा रहा है। तों वह लड़का हम दोनों के पास आ गया और इंजिनियर को बोलता है कि सर आप कल के आएं हुए लड़के को काम सीखा रहें हों और मुझे नहीं सीखा रहें हों। तुम मेरे साथ भेदभाव कर रहें हों। तो इंजिनियर ने कहा कि अरे नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है। तु तों मेरे बेटे जैसा है। में तुझमें भेदभाव क्युं करुंगा। चल इधर आ में तुझे समझाता हूं। तो इंजिनियर ने मुझे समझाना छोड़कर फिर उसे समझाने लगे। और लड़के ने मुझे झुट बोल दिया कि बाहर तुझे बुला रहे हैं। कोई लाइन बंद हो गई है। उसे देखने के लिए चला जा। तब में उसकी बात सुनकर बाहर निकल गया। और अपने डिपार्टमेंट में वापस जाकर पुरानी मशीन ट्युबलाइट फेन मोटर रिपेयर करता रहता। कंपनी मालिक ने एक और डिपार्टमेंट तैयार करने के लिए इंजिनियर को बोला कि ऊपर के फ्लोर पर एक डिपार्टमेंट तैयार करवा दिजिए जहां हम हेंडप्रिंट का काम करवाएंगे। तों इंजिनियर ने मुझे कहा कि दीपक तुम ऊपर चलें जाओ और उपर जितनी भी लाइट चालू हो। उन्हें अलग कर लेना और जो खराब हो उनकी गिनती कर लेना और मुझे बता देना। तों में ऊपर के फ्लोर पर गया तो वह फ्लोर बहुत दिनो से बंद था। जिसमे जातें ही मुझे डर लगने लगा। लेकिन इंजिनियर ने बोला था तो मुझे उसे देखना तो पड़ेगा ही सहीं। तों मेने डरते डरते उस कमरे का मेन स्विच ऑन किया तो कुछ लाइटें जल रही थी। और कुछ लाइटें आन आफ हों रहीं थीं। और कुछ तों बंद थीं। तों मेने मन में सोचा कि भगवान में इस पुरे डिपार्टमेंट कि वायरिंग अकेले कैसे करुंगा। तब थोड़ी देर बाद इस कंपनी कि एक दुसरी ब्रांच भी थीं। वहां पर भी एक वायरमेन था। तों वह वायरमैन किसी काम से हमारी कंपनी में आया। और जो चीज उसे चाहिए थीं। उस चीज के बारे में और उसने इंजिनियर से पुछा तों इंजिनियर ने उसे मुझसे मिलने के लिए बोल दिया कि वायरमैन से मिल लेना। फिर जब वह वायरमैन मेरे पास आ रहा था तब मेनेजर ने उसे कहा कि अपने को ऊपर एक डिपार्टमेंट तैयार करना है। तो आप ऊपर जाकर देख लो कि वहां किस चीज कि जरुरत पड़ेगी और किसकी नहीं। यहां के एक शायर में को भी अपने साथ रख लेना। तब वह वायरमैन ऊपर के फ्लोर पर आया तो में पहले से ही फ्लोर पर था। तों उस वायरमैन ने मुझसे पूछा कि तुम यहां क्या कर रहे हो। तों मेने उसे कहा कि मुझे इस डिपार्टमेंट कि लाईटें देखने के लिए बोला था। तों उसने मुझे कहां कि अच्छा तुम वायरमैन हों। तो मेने हां कह दिया। तब उसने मुझे कहा कि ठिक है। तुम सारी लाइटें देख लो और जो लाइटें बंद हो उन्हें निकालकर निचे लें जाना। तो मेने कहा कि ठिक है। फिर वह वापस निचे चलें गये। फिर में खराब लाइटें निकालकर निचे लें आया। फिर शाम को मेरी छुट्टी हो गई तो मे वापस अपने घर लोट आया। लेकिन मेरे घर आने के बाद वायरमैन वापस उस डिपार्टमेंट में चैक करने के लिए आया था। में तो नहीं मिला लेकिन जहां जहां लाइटें नहीं थीं। उतनी लाइटें उसने एच आर डिपार्टमेंट से बोलकर मंगवा लिया था। फिर अगले दिन में वापस ड्यूटी गया तब वह वायरमैन भी कंपनी आ चुका था। तब उसने मुझसे कहा कि चलों हम दोनों मिलकर वायरिंग कर देते हैं। लाइटें लगा देते हैं। और मुझे लाईटें देकर हम दोनों ऊपर वाले डिपार्टमेंट में पहुंच गए और जहां लाइटें मिसिंग थीं वहां लाइटें लगा दीं। और ऊपर के एक जनरेटर से अटेच कर दिया। तों वह डिपार्टमेंट रेडी हो गया था। फिर उस डिपार्टमेंट में काम शुरू कर दिया गया था। उस डिपार्टमेंट में सफेद कपड़े पर रंगाई होती थीं। कलर पेंट करतें थे। तों अब मेरे लिए एक और डिपार्टमेंट तैयार हो गया था। मतलब मेंटेनेंस का एरिया बड़ रहा था। और मेरा काम भी बड़ रहा था। वह लड़का मुझे इमरोडरी डिपार्टमेंट में जानें नहीं देता था। तों भगवान ने मेरे लिए दायरा बढ़ा कर दिया। अब इमरोडरी डिपार्टमेंट को छोड़कर में हर डिपार्टमेंट में दिखाई देता था। साथ ही मेरा काम भी दिखाई देता था। लेकिन अभी कुछ दिन पहले जिस डिपार्टमेंट को तैयार किया गया था। उस डिपार्टमेंट में रखें जनरेटर में कुछ रिसने लगा। जिसके लिए वहां काम करने वालों ने मुझे फोन करके बुला लिया और मुझे बता दिया था। सर जनरेटर में से ग्रिस जैसा कुछ निकल रहा है। तो वह समस्या मेरे कंट्रोल से बाहर थीं इसलिए मेंने फिर निचे आकर इंजिनियर को समस्या के बारे में बता दिया। तों इंजिनियर ने मेरी बात को अनसुना करके अपने काम में लग गया। लेकिन फिर मेने दोबारा से उसे बोला कि ऊपर के जनरेटर से कुछ रिस रहा है। उसे आप देख लिजिए। लेकिन उसने कहा कि में आकर देख लुंगा। तों मेने कहा कि फिर अभी काम चलने दु कि बंद करवा दु। तो इंजिनियर ने कहा कि काम चलने दो मे थोड़ी देर में ऊपर आता हुं। लेकिन इंजिनियर ऊपर नहीं आया और जनरेटर फिर बंद हो गया। फिर ऊपर काम कर रहे वर्करों ने फिर से निचे फोन लगाया। तब इंजिनियर ने ऊपर जाकर देखा तो जनरेटर से बहुत सारा ग्रिस बाहर निकल कर इकट्ठा हो गया था। हालांकि जनरेटर के भीतर ग्रिस नहीं होता है। पर उसमें से कुछ ग्रिस जैसा ही गाड़ा और चिपचिपा पदार्थ था। फिर इंजिनियर मुझपर चिल्लाने लगा कि इतना सबकुछ हो गया और तुने मुझे बताया क्युं नहीं। जबकि मेने इंजिनियर को बताया था लेकिन वह मुझे झुटा और गेर जिम्मेदार बताकर डांट फटकार लगाने लगा। साथ ही वह लड़का भी मुझे भला बुरा और गालियां भी देने लगा। तों मुझे दोनों कि बातों पर गुस्सा आ गया लेकिन में कुछ बोला नहीं और चुपचाप सबकुछ सुनता रहा और उनके साथ काम करता रहा। फिर वह वायरमैन भी आ गया। और मेरी तरफ से बोलकर दोनों के मुंह बंद कर दिए कि उसे मत चिल्लाओ मेने ही उसे जनरेटर चलाने के लिए बोला था। और अब में आ गया हुं तों में देखता हूं। खैर फिर जनरेटर के ठिक होने के बाद फिर हम चारों निचे आ गये। फिर ये तीनों अपने अपने काम से दुसरी जगह चलें गये। और में फिर से मेंटेनेंस डिपार्टमेंट में चला गया। फिर दो चार दिन बाद कंपनी में एक और डिपार्टमेंट को तैयार करने के लिए बोला गया। जहां कि लाईटें और पंखे मुझे रिपेयर करने थें। तों में चला गया और सारा काम खतम करके में आखिरी का एक पंखा रिपेयर कर रहा था कि पावर चला गया। तों मेने सोचा कि पावर अभी आ ही थोड़ी जायेगा। पावर बंद है तब तक में पंखा रिपेयर कर देता हूं। कनेक्शन करके में निचे उतरने वाला ही था कि अचानक पावर आ गया और पंखा घुमने लगा। तो वह पंखा मेरे सर में लग गया। जिससे मेरे माथे से खुन कि पिचकारी निकल पड़ी। फिर डिपार्टमेंट वाले आदमी ने मेरे सिर पर रुमाल बांधा और मुझे निचे लेकर आया। और फिर मुझे अस्पताल लेकर गए मुझे सिर में चार टांके आएं। फिर मुझे पट्टी करवाकर वापस कंपनी में लाएं और कंपनी से वापस घर भेज दिया कि तुम घर पर आराम करों। चोट तो लगीं हुई थी। तो दर्द के कारण मुझे निंद आ गयी और फिर में सो गया। फिर दुसरे दिन भी में घर पर ही रेस्ट कर रहा था। लेकिन तीसरे दिन फिर में कंपनी गया तो मेरे साथ वाला लड़का मुझे ड्रेसिंग करवाने के लिए अस्पताल लेकर गया। और ड्रेसिंग करवाकर वापस कंपनी में लेकर आया। फिर इंजिनियर ने कहा कि तु वापस घर चला जा कल से ड्यूटी पर आना तों में वापस से घर लोट गया। इधर मेरा भाई एक टावर कंपनी के टावर पय गार्ड कि नोकरी करता था। लेकिन टावर कंपनी ने फिर सभी टावरों पर आटोमेटिक पावर बेंक लगवा दिए थें। जिससे मेरे भाई कि नोकरी छुट गई थी। तो वह एक कंपनी में छः हजार कि नोकरी कर रहा था। साथ ही उसका परिवार भी था। और इधर मेरी कंपनी में जो डिपार्टमेंट मुझसे तैयार करवाया गया था। उस डिपार्टमेंट के सुपरवाइजर ने मुझे कहा था कि तेरे उधर टेलर हो तो लेकर आना अगर कंपनी तरफ से करेंगे तो ग्यारह हजार रुपए महिना मिलेगा। और अगर पिस रेट से करना हो तो फिर पर पिस के पचास रुपए मिलेंगे। तो मेने उस सुपरवाइजर को हां कहकर अपने भाई को फोन करके बताया तो मेरा भाई तो वैसे भी अच्छी नोकरी कि तलाश में ही बेठा था। तो उसने कहा कि ठिक है मैं सुरत आ जाऊंगा। फिर अगले दिन मेरा भाई कंपनी में आया तो मेने अपने भाई को सुपरवाइजर से मिलवाया तो सुपरवाइजर ने मेरे भाई को मशीन पर बिठाया और ट्रायल लिया जिसमें मेरा भाई पास हो गया। फिर उसके बाद सुपरवाइजर ने पुछा कि कंपनी तरफ से काम करोगे तो ग्यारह हजार रुपए तनख्वाह मिलेगी। और अगर पिस रेट से करोगे तो एक पिस का पचास रुपए मिलेंगे। तो अब तुम मुझे बता दो कि तुम कैसे काम करोगे तो मेरे भाई ने कहा कि वह पिस रेट से करेगा। तो सुपरवाइजर ने मेरे भाई को काम दें दिया। तो मेरे भाई ने एक दिन में ही एक हजार रुपए का काम कर दिया। जिससे भाई को भी बहुत खुशी हुई कि वह कहा छः हजार कि नोकरी कर रहा था। और कहा ये एक दिन में ही एक हजार रुपए का काम हुआं है। अगर दीपक यहां नहीं आता तो मुझे एक हजार रुपए रोज कमाने का मौका भी नहीं मिलता। अच्छा हुआ कि दीपक यहां काम करने के लिए आ गया। और मुझे भी बुला लिया। लेकिन फिर मेरे भाई ने मुझसे मेरी तनख्वाह पुछी तो मेने उसे अपनी तनख्वाह बताई तो उसने कहा कि तु यह काम छोड़कर मेरे साथ ही काम कर। लेकिन कंपनी में यह नियम नहीं था। कि तुम्हारा काम छोड़कर कंपनी में ही दुसरे काम को करने लग जाओ। लेकिन मेरे भाई ने मेरा काम देखा तो उसने फिर भी मुझे वायरमैन कि नोकरी छोड़ने के लिए बोल दिया कि इस काम को छोड़ दें। और कोई दुसरा काम देख लें। तो मेने भी अपने भाई कि बातें सुनकर काम छोड़ दिया लेकिन कंपनी ने मुझे वापस हेल्पर में रख लिया। लेकिन फिर धीरे-धीरे में अपने भाई के पास ही बेठने लगा। कंपनी में किसी को भी नहीं पता था कि हम दोनों भाई है। सुपरवाइजर को मेने अपने गांव वाला बताया था। लेकिन फिर में धीरे-धीरे अपने भाई के पास रहकर काम सीखने लगा। तब कंपनी ने एक और डिपार्टमेंट तैयार करने के लिए कहा जिसमें साड़ी पर लेस लगाने का काम करवाना था। इस कंपनी में जब से में आया था तब से कंपनी मालिक कि ग्रोथ पर ग्रोथ होती जा रही थी। क्योंकि मैं बहुत भाग्यशाली था।