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Twinflam and soulmates ep 9

भगवान ने मुझे बहुत से हुनर देकर धरती पर भेजा था। और यह सारे हुनर शक्तियां मेरे पुर्व जन्म में भक्ति मार्ग पर चलकर मेने प्राप्त कि थीं। शरीर नया था परन्तु मेरी रुह आत्मा तो पुरानी थीं। और दुसरा मुझे जिस परिवार में भगवान ने भेजा था। वह परिवार था ईमानदार और सच्चाई के रास्ते पर चलने वाला धर्म का पालन करने वाला पर इस परिवार के पुर्वजों पर एक श्राप लगा हुआ था। किसी ने इस परिवार के पुर्वजों को श्राप दिया था कि तुम और तुम्हारी सात पीढ़ी गरीबी और गुलामी को भुगतोगे। और में इस परिवार कि सातवीं पीढ़ी का आखिरी वारीस था। मुझे इस परिवार के पुर्वजों को इस श्राप से मुक्त करवाना था। इसलिए भगवान ने मुझे इस परिवार मे इतने हुनर देकर भेजा था। ताकि अगर कोई मुझे एक मार्ग पर आगे बढ़ने से रोके तो में दुसरे हुनर कि मदद से आगे बढ़ जाऊ या अगर कोई मेरा एक दरवाजा बंद करें तो भगवान मेरे लिए दुसरा दरवाजा खोल दें। अभी मेरी आवाज़ बहुत अच्छी थीं। गांव मोहल्ले वालों स्कूल वालों को मेरी आवाज़ पसंद आती थी। तो स्कूल वाले मुझे बड़े शहर में बड़े स्टेज पर परफॉर्म करवाना चाहते थे। मेरी चाचीयों को जैसे ही पता चला कि दीपक कि आवाज अच्छी है। और स्कूल के मास्टर दीपक को दुसरे शहर ले जाकर गाने गवाएंगे। या दुसरे शहर ले जा सकते हैं। तो मेरी चाचीयों ने अपने बच्चों को मेरे सामने तम्बाकू खाने के लिए बोला कि तुम दीपक के सामने तम्बाकू खाया करो। जब वह तुम लोगों को तम्बाकू खाते देखेगा। तो वह भी तम्बाकू खाने लग जायेगा। और अगर नहीं खायेगा तो तुम उसे तम्बाकू खाना सिखाना ताकि तम्बाकू खाते खाते उसकी सुंदर आवाज बेसुरी निकलें। जब उसे तम्बाकू खाने कि लत लग जाएंगी तब तुम लोग तम्बाकू खाना छोड़ देना। और अब चाचा के लड़कों ने वैसा ही किया और मेरे सामने तम्बाकू खाना शुरू कर दिया। और मुझे भी खाने के लिए बोला कि तु भी तम्बाकू खाया कर लेकिन मेने खाने से मना कर दिया तो चाचा के लड़कों ने मुझसे कहा कि खाकर तो देख बहुत मज़ा आता है। तो मैंने कहा कि नहीं मुझे उल्टी हो जायेगी। तो चाचा के लड़के बोलते हैं कि अरे कुछ नहीं होता है। अरे हम भी तो खाते हैं। हमें तो उल्टी नहीं होती है। एक काम करो तम्बाकू मे थोड़ी सी शक्कर मिलाकर खाओ फिर उल्टी नहीं होगी। तो मुझे तम्बाकू मे शक्कर मिलाकर तम्बाकू खाने को दि गई। तो मुझे फिर उल्टी नहीं हुई। फिर चाचा के लड़के मुझे हर रोज ऐसे ही तम्बाकू खिलाते थे। और में धीरे-धीरे तम्बाकू खाना सीख गया। लेकिन सिखने के बाद मेरे पास तम्बाकू खरीदने के पैसे नहीं थे। क्योंकि अभी तक चाचा के लड़कों को मुझे तम्बाकू खाना सिखाना था। तो वै मुझे अपने पैसों से खरीद कर खिला दिया करते थे। लेकिन अब मुझे तम्बाकू खाने कि लत लग गई थी। तो अब चाचा के लड़कों ने मुझे तम्बाकू खिलाना बंद कर दिया। लेकिन मुझे तो तम्बाकू कि तलप लगें। तो में चाचा के लड़कों के पास जाऊं चाचा के लड़कों ने देखा कि मुझे तम्बाकू कि तलप लगी है। तो उन्होंने तम्बाकू खिलाने के बदले अपना एक काम करने के लिए मुझे बोला तो मैंने उनका वह काम कर दिया फिर उन्होंने मुझे तम्बाकू खिला दीं। अब चाचा के लड़कों ने देखा कि में तम्बाकू खाने के बदलें उनका कोई भी काम करने के लिए तैयार हु तो उन्होंने मुझे अपना गुलाम बना लिया। हालांकि खाना तो उनको भी नही था। वह तो सिर्फ मुझे सिखाने के लिए खां रहें थे। लेकिन अब में तो सिख गया था। तो रोज रोज वै भी तम्बाकू लाना नहीं चाहते थे। क्योंकि वै खाते नहीं थें। पर अगर रोज रोज दुकान से तम्बाकू लेकर आयेंगे तो मोहल्ले वाले उनको भी बदनाम करेंगे कि चाचा के लड़के भी तम्बाकू खाते हैं। तो फिर मेरी चाचीयों ने देखा कि में पढ़ाई लिखाई करने में भी अच्छा हुं। और गांव मोहल्ले में में मेरे साथ वाले लड़कों से ज्यादा अच्छी पढ़ाई करता हूं। तो मोहल्ले में मेरी तारीफ होने लगी। तों मेरी चाचीयों ने अपने लड़कों से कहा कि दीपक को तम्बाकू खिलाना बंद कर दो और जब वो तुमसे तम्बाकू खाने कि जिद करने लगें तो उसे कहना कि अब तुम अपने पैसों से खरीद कर खाओ पर उसके पास तो पैसे होंगे नहीं तो दीपक को अपने ही घर से पैसे चुराने के लिए बोलना कि अपने घर से पैसे चुरा लिया करों तो चाचा के लड़कों ने अच्छा कह दिया फिर जब मैं अपने चाचा के लड़कों के पास आया तों जैसे चाचीयों ने अपने बच्चों को सिखाया था। वैसा ही चाचा के लड़कों ने मुझे भी बोल दिया कि अपने घर से पैसे निकाल लिया कर तो मेने मना किया तो चाचा के लड़कों ने कहा कि हम भी तो अपने घर से चुरा लिया करते हैं। तो मैंने कहा कि फिर माता-पिता को पता चलेगा तो मुझे बहुत मार पड़ेगी।तो चाचा के लड़कों ने कहा कि हम भी तो अपने घर से पैसे चुरा लेते हैं। पर हमारे माता-पिता तो हमें कुछ भी नहीं कहते हैं। और ना ही हमें मारते हैं। मुझे मेरे माता-पिता के खिलाफ भड़का रहें थे। खैर अब मेरे पास तो पैसे रहते नहीं थे तो मेने घर से पैसे चुराने शुरू कर दिए। दो चार दिन तक मेरी गाड़ी अच्छी चल रही थी। लेकिन फिर घर में मां को पैसे कि कमी नजर आने लगी। तो मां मेरी बहन और भाई पर इल्ज़ाम लगाने लगी तो दीदी और भईया ने कहा कि हम दोनों तो घर पर रहते नहीं है। हम तो तुम्हारे साथ ही काम करने जातें हैं। हमने पैसे नहीं लिए फिर मेरी चाचा चाची ने ही मेरे माता-पिता को बता दिया कि तुम्हारा दीपक पैसे निकाल निकाल कर ले जाता है। तो अब में चाचा-चाची के सामने झुट भी नहीं बोल सकता था। क्योंकि चाचा चाची और उनके बच्चों ने ही मुझे घर से पैसे निकालने कि कला सिखाई थीं। तो मेरी आंखें और सर निचे झुक गये। मेने अपना जुर्म कबूल कर लिया। तो मोहल्ले वालों के सामने मेरी और मेरे माता-पिता कि बहुत बेइज्जती हुई। साथ ही मोहल्ले वालों के सामने माता-पिता से बहुत मार भी पड़ी। इतनी मार खाने के बाद मुझे मोहल्ले में लोगों के सामने अपनी बेइज्जती महसूस होने लगती थीं। इस वजह से फिर मेंने अपने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया। स्कूल से घर आने के बाद अपने घर के अंदर ही कैद रहता था। और अपनी पढ़ाई लिखाई करता रहता था। लेकिन अब चुकी घर में ही रहता था। तो फिर से मेरे नाम से मोहल्ले में मेरी तारीफ होने लगी। वह ऐसे कि में घर पर रहता था तो में खाना बनाने लग गया था। मतलब घर के सारे काम करने मे माहिर हो गया था। तो में किचन का काम कर लेता था तो माता-पिता जल्दी काम पर चले जाते थे। जिससे मोहल्ले कि महिलाएं मेरे माता-पिता से पुछते कि तुम लोग काम पर इतनी जल्दी कैसे आ जातें हों इतनी जल्दी खाना कोन बना लेता है। तो मेरी मां ने मेरे बारे में बता दिया। कि हमारा दीपक हैं ना वह सबकुछ बना लेता है। वह खाना बना लेता है तो हम सब बेफिकर रहते हैं। और टीफिन भरकर ले आतें हैं। तों मोहल्ले कि महिलाओं ने कहा कि तुम्हारा दीपक तो बहुत बढ़िया काम कर लेता है। हमारे बच्चे तो हम काम पर आते हैं तब तक तो सोये ही रहते हैं। और वै हमारे लिए खाना बनाएंगे। तुम्हारा दीपक अच्छा है। जो तुम्हें सहयोग और सहारा दें देता है। हमारे बच्चे तो हमारी छाती पर मुंग दलते हैं। और जब मेरी तारीफ मेरी चाचीयों के कानों तक पहुंची तो मेरी चाचीयों ने सोचा कि यह फिर से तैयार हो गया है। फिर मेरी चाचीयों ने अपने बच्चों को अपने साथ काम पर ले जाने लगीं और अपनी चमची मोहल्ले के द्वारा अपने बच्चों कि तारीफें फेलाने के लिए बोल दिया और अब मेरे चाचाओं के बच्चों के काम करने कि तारीफे मेरी मां के पास आई तो मेरी मां ने मुझे भी अपने साथ काम पर ले जाने कि बात कही कि चाचा चाची के बच्चे भी छुट्टी के दिन अपने माता-पिता के साथ काम पर जाते हैं। तो तु भी हमारे साथ काम करने चला कर में घर पर रहकर माता-पिता के कामों में हाथ बटा दिया करता था। तो माता-पिता को घर के कामों से थोड़ी राहत थीं। इससे मेरी भी तारीफ हो रही थी। साथ ही माता-पिता को भी घर के कामों से शुकुन मिल रहा था। लेकिन मां मुझे अपने साथ काम पर ले जाने लगीं तो फिर काम पर से घर लोटने के बाद थकान कि वजह से में भी घर के काम नहीं कर पाता था। जिससे फिर मेरे माता-पिता को ही घर के काम करने पड़ते थे। एक तरह से मां कि ही तकलीफ बढ़ गई। और यहीं तो मेरी चाचीयां चाहतीं थीं। कि मेरी मां को खेत का काम भी करना पढ़े और घर का काम भी करना पड़े। पर भगवान भी ऐसा होते देख रहे थे। फिर एक दिन मेरी मां ने मुझे और दीदी को अलग काम पर भेजा वहां मेरे चाचा के लड़के भी काम करने गये थें। जिस खेत में हम काम करने गये थें वह खेत नदी के उस पार था। जब खेत में जा रहे थे। तब खेत वाले ने सभी मजदूरों को नाव से उस पार उतारा लेकिन खेत में काम खतम करने के बाद हम लड़के लड़के आपस में मज़ाक़ मस्ती करते हुए सब मजदुरों को पीछे छोड़ते हुए आगे निकल कर नदी पर आ गए। मेरे चाचा के लड़कों को मेरे ऊपर बहुत गुस्सा आता था। क्योंकि मेरी वजह से मेरे चाचा-चाची उनको भी परेशान करते थे। कि अगर दीपक ऐसा काम कर रहा है तो तुम भी करों और चाचा चाची के बच्चे बस अपनी जिंदगी जीना चाहते थे। लेकिन मेरी वजह से उन्हें वै काम भी करने पड़ते थे। जो उन्हें आते नहीं थें। लेकिन चाचा चाची के दबाव के कारण उन्हें भी वह सारे काम करने पड़ते थे। तो आज चाचा के लड़कों ने प्लान बनाया था कि दीपक को भड़काकर उकसाकर नदी में छलांग लगवा देंगे। जिससे दीपक नदी में डुबकर मर जायेगा। और फिर दीपक से हमेशा हमेशा के लिए पीछा छुट जायेगा। लेकिन में रोज तो नहीं पर कभी-कभी भगवान का नाम लिया करता था। या जब मुझे डर लगता या कोई तकलीफ़ होती तो मैं हनुमान जी का नाम लिया करता था। खैर अभी हम सब लड़के नदी पर खड़े थे। फिर चाचा के लड़कों ने कहा कि अरे नांव कब आयेगी चलों हम तेरकर नदी पार करते हैं। फिर मोहल्ले एक दुसरे लड़के ने चाचा के लड़के से कहा कि तेरे बाप मे इतना दम नहीं है जो तु नदी को पार कर लें। तो चाचा के लड़के ने उस लड़के से कहा कि तु नदी पार कर लेगा जो हमें दम दिखा रहा है। तो उस लड़के ने कहा कि नहीं मेरे मे तो दम नहीं है। पर तुम्हारे बाप दादाओं में भी दम नहीं है जो नदी को तेरकर पार कर लें। उस लड़के ने मेरे दादाजी के नाम से चुनोती दें दी तो मुझे गुस्सा आ गया और मेने बहती नदी में छलांग लगा दी। तेरना तो आता था मुझे। लेकिन नदी में बहाव बहुत तेज था। और कपड़े भी पहने हुए था साथ ही काम करके भी आया था। तो बहुत जल्दी थक गया। नदी मे छलांग लगाते हुए मुझे मेरी दीदी और सभी मजदूरों ने देख लिया था। तो मेरी दीदी तो मुझे पानी में देखकर बेहोश ही हो गई। कि अगर इसे कुछ हो गया तो माता-पिता दीदी को भी डांट फटकार लगाएंगे। कि तु कहा थीं। और दीपक को तुने रोका क्युं नहीं। लेकिन अब क्या था मैं नदी के बीच में जाकर थक गया। मेरे हाथ पैर काम ही नहीं करें। तो मुझे पानी के अंदर अंदर भी तैरना आता था। तो थोड़ी दूर तक में पानी के अंदर अंदर तैरने लगा। लेकिन पानी के अंदर भी थक गया क्योंकि पानी के अंदर नदी का बहाव ज्यादा था। जब में पुरी तरह से थक गया था तों मेने फिर पीछे मुड़कर देखा तो सभी मजदूरों ने मुझे आगे तैरने के लिए कहा कि इधर मत आओ ऊधर आगे जाओ। और चाचा के लड़के तो मिन्नतें कर रहे थे कि दीपक नदी में डुबकर मर जायेगा। और मेरी स्थिति भी ऐसी ही बन चुकी थी कि अब में नहीं तैर पाऊंगा। और भगवान भोलेनाथ का नाम लेकर कि भोले बाबा बचा लो और पानी में निचे जानें लगा। मैं पानी कि शतह से एक फुट नीचे गया। लेकिन मेरे पैर जमीन पर टिक गये। तो मेरी जान में जान आ गई। साथ ही भगवान को भी धन्यवाद दिया कि बच गया। लेकिन जब मे पानी कि शतह से निचे गया था। तब चाचा के लड़कों ने और मजदुरों ने सोचा कि में अब नदी में डुब गया। इधर चाचा के लड़के खुश हो रहें थे। दीपक अब गया। लेकिन में थोड़ी देर तक पानी के अंदर अंदर चलते हुए बाहर आ रहा था तो में थोड़ी देर तक किसी को भी दिखाई नहीं दिया। तो सभी लोगों ने सोचा कि में नदी में डुब गया। लेकिन फिर में पानी के अंदर अंदर चलते हुए पानी कि शतह पर मेरा सिर दिखाई देने लगा तो सभी मजदूरों ने कहा कि दीपक का सिर दिखाई दे रहा है। फिर सभी लोग मेरी तरफ देखने लगे। फिर मेरा पुरा सिर दिखाई देने लगा और थोड़ी देर बाद में पुरा दिखाई देने लगा। और किनारे पर जाकर लेट गया। साथ ही भोलेनाथ को धन्यवाद दिया। फिर उठकर घर रवाना हो गया। इधर मेरी दीदी को भी मजदुरों ने जगाया और कहा कि दीपक को कुछ नहीं हुआ है। देख तेरा भाई ठीक है। और वह घर कि तरफ जा रहा है। तो मेरी दीदी भी खुश हो गई। और फिर थोड़ी देर बाद नांव वाला नांव लेकर किनारे पर खड़े मजदूरों को नाव में बिठाकर इस पार लें आया। और में सबसे पहले घर पहुंच गया। तों मुझे भीगा हुआ मां ने देखकर पुछा कि तु आ गया और तेरी दीदी कहां है। और तु भीग कर क्युं आया है। तों मेने कह दिया कि दीदी नहाकर आयेगी। तो मां ने फिर मुझे कुछ नहीं कहा और मेने अपने कपड़े बदल लिए और ऊपर घर पर चढ़ गया। यह सोचकर कि जब दीदी घर आयेगी तो दीदी सारी बातें मां को बता देगी कि नदी पर क्या हुआ था। फिर मां मुझे मारेगी। इसलिए में पहले ही घर पर चढ़ गया। ताकि मुझे कोई मारे नहीं फिर जब दीदी घर आयी तो दीदी घर आकर रोने लगी तो मां ने पुछा कि क्या हुआं तुम रों क्युं रहीं हो फिर साथ वाले मजदूरों ने मां को पुरी बात बताई कि आज तो तुम्हारा दीपक गया ही था। तो मां ने चौक कर पुछा कि क्युं ऐसा क्या हुआ जो दीपक गया ही था। तो मजदुरों ने बताया कि तुम्हारा दीपक ने उफनती नदी में छलांग लगा दी। और इतनी बड़ी नदी में तेरकर आया है। तो मेरी मां ने मजदूरों से कहा कि आप लोगों ने उसे रोका क्युं नहीं। तो मजदुरों ने कहा कि हम तो नदी पर थें ही नहीं अगर हम नदी पर होते तो उसे नदी में छलांग लगाने ही नहीं देते हम सब तो पीछे थें। पर यह लड़के लड़के नदी पर आ गए और फिर इन सब मे क्या बातचीत हुई और दीपक ने नदी में छलांग लगा दी। तुम्हारे लड़के कि किस्मत अच्छी थी कि यह वहां से बचकर बाहर निकल आया। वरना वहां पानी कितना गहरा है। उस जगह से आज तक कोई भी नहीं बच पाया है। तुम तो भगवान का शुक्रिया अदा करों कि दीपक सही सलामत बच गया। वरना मोहल्ले में आज तो सब रो रहे होते। फिर मां को मेरे ऊपर बहुत गुस्सा और गुस्से में आकर मां मुझे गालियां देने लगी और रोने भी लगीं। और मुझे बोली कि इसलिए तु घर पर चढ़ गया है। तु निचे आ फिर तुझे बताती हुं। फिर भीड़ में से किसी ने मेरी तारीफ करते हुए कहा कि चलों दीपक ने छलांग तों लगाई ही लगाई पर अब उसके नाम पर एक रिकार्ड बन जायेगा। कि वह अकेला उस जगह को पार करके बाहर निकला है। जो आज तक उस जगह को कोई भी पार नहीं कर पाया था। तो उस हिसाब से तों दीपक बहुत बड़ा तैराक भी बन सकता है।

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