Back to feed

Twinflam and soulmate's

हैलो दोस्तो मेरा नाम दीपक गंगारेकर है। में, मध्य प्रदेश के खरगोन जिले कि कसरावद तहसील के ग्राम पंचायत का रहने वाला हूं। मेरे पिता का नाम श्री गजानंद गंगारेकर और माता का नाम चुनी बाई गंगारेकर है। में अपनी कहानी ट्वीनफ्लेम और सोलमेट्स के माध्यम से अपने जीवन के उन हिस्सों के बारे में बताने जा रहा हूं। जहां एक समय पर मैं सीधा-साधा भोला भाला मासुम डरपोक कमजोर था। वहीं दूसरी ओर मेरा ट्वीन भी मेरी ही तरह सीधी-सादी भोली-भाली मासुम कमजोर डरपोक थीं। मतलब हम एक दिल और दो जान थे। मतलब आत्मा का आधा हिस्सा मेरी ट्वीन के पास था। और आधा हिस्सा मेरे पास था। लेकिन हम दोनों को भगवान ने धरती पर अलग-अलग घर में भेज दिया। और फिर एक-दुसरे को तलाशने के लिए बोल दिया गया। मतलब हम दोनों शिवशक्ति यात्रा में थे। भगवान ने मुझे ऐसे परिवार में भेजा जहां गरीबी कमजोरी लाचारी सीधे-सादे भोले-भाले सत्य के मार्ग पर चलकर धर्म का पालन करने वाले लोगों के बीच में भेजा गया। वहीं दूसरी ओर मेरी ट्वीन को झुटे लालची लुटेरे मतलबी चालाक और अंहकारी लोगों के बीच में भेजा। जिनके सीने में दिल तो था लेकिन वह दिल पुरी तरह से भावनात्मक रहित था। जिनको ना तो किसी का दुःख समझ आता था। ना तकलिफ समझ आती थी। दुसरो को दुःख तकलीफ को देखकर उन्हें दया नहीं आती थी। बल्की उसी दुखी व्यक्ति के दुःख दर्द को दिखावा समझते थे। साथ ही सीधे-सादे भोले-भाले लोगों को बेवकुफ बनाकर उनका फायदा उठाया जाता था। उनको अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते थे। और सीधे साधे भोले भाले लोगों का फायदा उठाने और उनका इस्तेमाल करने में निपुण हो गये थे। दुसरी बात महिला होने का फायदा उठाते थे। इस तरह से सीधे साधे भोले भाले लोगों के साथ लुटपाट करके। बहुत रुपया पैसा इकट्ठा कर लिया था। क्योंकि झुट बोलने में लोगों को बेवकुफ बनाने में माहिर थे। इसलिए सीधे साधे भोले भाले लोग उनकी चालाकियों में आसानी से फस जाया करते थे। और अपने पैसों का नुक़सान कर बेठते थें। अब चुकी महिलाओं के जाल में फंसकर अपने रुपमा पैसे गंवाए थें तो किसी को बोल भी नहीं सकते हैं। कि हमें महिलाओं ने लुट लिया है। अगर बोलते भी है तो लोग उनपर ही लाखों सवालों कि बोछार कर देते कि आप उनके घर गए क्युं थे। साथ ही उनकी भी बदनामी होती इसलिए जिसके साथ ठगी होती वै लोग ठगाने के बाद अपना मुंह बंद करके घर में बैठे रहते और भगवान से न्याय कि प्रार्थना करते कि हमारे साथ ग़लत हुआं धोखा हुआ अन्याय हुआ। आप हमारे साथ न्याय किजिए। और उन लोगों को उनके कर्मों कि सज़ा दिजिए। भगवान न्याय तो करते हैं। लेकिन भगवान के न्याय को समय लगता है। और कोई भी व्यक्ति आपके साथ ग़लत इसलिए कर रहा होता है। क्योंकि उस व्यक्ति के खाते में अच्छे कर्म अभी बाकी है। इसलिए वह जीत रहा होता है। और अब ऐसे ही परिवार में मेरी ट्वीन्स आत्मा को भेजा गया था। जिस परिवार के सभी लोग चौर डाकु थें। जिनका मकसद था सिर्फ लुटपाट करना लोगों के साथ लुटपाट करने के लिए चाहें जो भी चालाकियां करनी पड़े। वह करों और लोगों को लुटकर घर लाखों अब अगर आप ऐसी संगति वाले लोगों के बीच रहोगे तो फिर जाहिर सी बात है कि फिर आपकी सोच भी धीरे-धीरे वैसी ही बनती चली जाएगी। और जहां आपके पास रुपया पैसा धन दौलत शोहरत होगी तो फिर आपको खुद पर अंहकार भी होगा कि आपके पास बहुत पैसा है। बहुत पावर है। सुंदरता है। आप किसी को भी अपनी सुन्दरता से अपना दिवाना बना सकते हैं। अपनी उंगलियों पर नचा सकतें हैं। पैसों के दम पर किसी को भी परेशान करवा सकते हैं। दुःख तकलीफ़ दिलवा सकते हैं। इस परिवार में कुछ महिलाएं थीं। जिनको अपनी चालाकियों का अपनी कला का अपनी सुन्दरता का अपने पैसों का बहुत अंहकार था। उन्हें अंहकार था कि हम अपनी सुन्दरता से किसी को भी अपना दिवाना बना सकते हैं। अपनी बुद्धि और चालाकियों से किसी को भी बेवकुफ बना सकते हैं। साथ ही पैसे का भी अंहकार था। लेकिन मेरी ट्वीन्स आत्मा ऐसी नहीं थी। वह बिल्कुल मेरी तरह ही थीं। सीधी-सादी भोली-भाली मासुम डरपोक कमजोर। और इधर मेरा जिस परिवार में जन्म हुआ वै लोग सत्य के मार्ग पर चलकर धर्म का पालन करने वाले ईश्वर की भक्ति करने वाले लोग थे। तो मेरी संगति साधु संतों के जैसे विचारों से हुई है। और में जैसे लोगों कि संगति में रहा हुं। वैसे ही मेरी सोच और विचार बन गए। खुद से पहले दुसरे के दुःख दर्द को दूर करना। लोगों के दुःख में दुखी होना दुसरो को दुःख तकलीफ में सहयोग करना। और भगवान का नाम लेना। अब हमारे इस व्यवहार को जब मेरे कुटुंब वालों ने देखा।तो उन लोगों ने हमारे इस व्यवहार का फायदा उठाना शुरू कर दिया। तो चलिए फिर जानते हैं मेरी इस ट्वीनफ्लेम और सोलमेट्स कहानी के माध्यम से कि कैसे भगवान ने हम दोनों ट्वीन्स आत्माओं को एक-दुसरे को अलग-अलग परिवारों में भेजा और हम दोनों को धरती पर भेजने का क्या कारण था। और अब हम दोनों एक-दूसरे से कैसे मिलेंगे। और मिलने में हम दोनों को कितनी अड़चनों का सामना करना पड़ेगा। और मिलन के बाद बाद कि परिस्थितियां क्या होगी। और परमात्मा का हमें धरती पर भेजने का क्या परपज था। और परमात्मा हम दोनों के माध्यम से संसार को क्या संदेश देना चाहते हैं। तो फिर शुरुआत करते हैं। मेरी कहानी ट्वीनफ्लेम और सोलमेट्स को कहानी कि शुरुआत होती है। मेरे नाना-नानी से जो सत्य के मार्ग पर चलकर धर्म का पालन करते हुए अपने जीवन को व्यतित कर रहे थे। फिर कुछ समय बाद मेरे नाना-नानी के घर में मेरी मां मोसी और तीन मामाओं का जन्म हुआ। मेरे नाना-नानी सत्य के मार्ग पर चलकर धर्म का पालन करते थे। ईश्वर कि भक्ति करते थे। तों ईश्वर कि कृपा मेरे नाना-नानी के ऊपर हमेशा बनी रहती थी। जिस वजह से नाना-नानी कि आर्थिक स्थिति दुसरे लोगो के मुकाबले थोड़ी अच्छी थी। इसलिए घर में और बच्चों को खाने-पीने पहनने ओढ़ने कि कोई तकलीफ़ परेशानी नहीं होती थी। और नाना-नानी के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि थीं।

Baatcheet