Soch
Deeksha gupta
जिस तरह मशीन की चाल उसके पुर्ज़ों पर निर्भर करती है,
वैसे ही इंसान की ज़िंदगी उसके विचारों पर।
हमारा जीवन हमारे सोच का प्रतिबिंब है —
अब तय हमें करना है, घटिया सोच रखनी है या बेहतरीन।