Back to feed

Soch

जिस तरह मशीन की चाल उसके पुर्ज़ों पर निर्भर करती है,

वैसे ही इंसान की ज़िंदगी उसके विचारों पर।

हमारा जीवन हमारे सोच का प्रतिबिंब है —

अब तय हमें करना है, घटिया सोच रखनी है या बेहतरीन।

Baatcheet