Sansar ka safar
Meer rajpurohit
संसार का सफर काफी सुहाना था
नदियों के संग समुद्र दीवाना था इन
लंबे लम्हों में आसमान का सहारा था
दर्द भरे इन पलो में मजबूत पहाड़ों का
साथ था बढ़ते इस सफर में जंगलों का
खौफ था बातो ही बातों में हवा का जोका
ऐसे आया जैसे मानो उसी का दौर था