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My devil king husbend

देवनाथ एक छोटा सा गांव था, जहां आज उस गांव की कुलदेवी की महापूजा थी. जिसमें पूरा गांव शामिल था और ये एक पूजा नहीं थी इस गांव में इसे एक बडा सा त्यौहार मानते थे.

और इसकी एक और वजह थी. गांव में हर एक साल एक लडकी की शादी तय कर दी जाती थी. और फिर गांव वाले उस शादी के काम में लग जाते थे.

इस साल भी कुछ ऐसा ही होने वाला था. एक बडे से घर में एक लडकी सुबह की किरण को देख रही थी. ओ इस तरह जागी हुई थी जैसे मानो रात भर उसकी आंख ना लगी हो.

तभी ओ लडकी उठ कर बैठ गई और उसने देखा कि उसके पास दो और लडकियां सो रही थी. ये उसकी बडी बहन थी, गीता थी और उसके बगल में सबसे छोटी नीति सो रही थी.

उन्हें देख कर ये लडकी उठ कर बैठ जाती हैं इसका नाम सिया, बहुत सुंदर थी, बडी ग्रे Color की आंखे और छोटी सी नाक छोटे पतले होठ और लंबे घने बाल, सिंपल कपडों में थी, लेकिन उसकी नाजुक सी पर्सनेलिटी किसी महल की राजकुमारी की तरह थी. उसके चेहरे पर एक अलग ही तेज था. एक अलग ही कशिश थी. जो भी उसे देखे बस देखता रह जाता, लेकिन उसका खुद का बाप ही अपनी बेटी यो का दुश्मन बना था.

क्योंकि उसे लडका चाहिए था, और हो गई तीन लडकियां.

सिया उठ कर किचन की तरफ चली गई. जो छोटा सा था, और सुबह की साफ सफाई करने लगी.

जब तक सब उठ जाते तब तक सिया सारा काम कर खत्म कर देती. उसकी मां उठ कर बस बैठती थी. कोई भी काम नहीं करती, सब उठने के बाद सिया सबके लिए चाय और नाश्ता बनाती और पहले घर में उसके पिता को देती और फिर उसकी बुआ और मां को देती फिर तीनों बहने भी नाश्ता करती.

आज की शुरुआत त्यौहार के साथ होने की वजह सिया ने जल्दी से सारे काम पूरे कर दिए और नहा कर तैयार हो गई क्योंकि सबको महा पूजा में भी जाना था.

सिया ने सिंपल ग्रीन Color का ड्रेस पहना था वही उसकी बडी बहन भी रेड Color का ड्रेस पहनती है और छोटी एक सिंपल Color का व्हाइट और गोल्डन Color का ड्रेस पहनती हैं तीनों ही तैयार होकर आरती की थाल निकालती हैं और मंदिर की तरफ जाती हैं.

सब लोग वही मौजूद थे, इस गांव के ठाकुर प्रताप सिंह ठाकुर आज उस महापूजा के अतिथि थे वही उनका पूरा परिवार भी था.

तीनों ही वहां जाकर खडी हो जाती हैं तभी एक लडकी जो सिया से बहुत जलती थी ओ तीनों ही बहनों के पास आकर बढा चढा कर खुद की कपडों की तारीफ करने लगती हैं.

" ये क्या तुम तीनों ने एसे कपडे पहने है, कितने पुराने लग रहे है, तुम लोगों को नहीं लगता तुम लोग हमेशा ही कम दाम वाले कपडे ही पहनते हो, मुझे देखो मैंने तो आज सबसे सुन्दर और महंगे कपडे पहने है, ताकि ठाकुर साहब मुझे चुने और मै ही शादी के लिए चुनी जाऊं, तुम तीनों का कुछ नहीं हो सकता,

उसकी बात सुनकर सिया सामने आकर बोली,

कपडे तो वाकई में अच्छे हैं लेकिन शायद तुम्हारी जुबान भी अच्छी होती, जब देखो तब बस दूसरों की मजाक उडाती रहती हो, कभी येक दिन एसा ना हो जाए कि तुम खुद मजाक बनकर रह जाओ, एसा होते हुए देखा है मैंने"

सिया की बात सुन कर ओ लडकी जिसका नाम गुंजन था ओ बोली,

तुम क्या भूल गई हो, शहर से यहां क्या आई हो, लगता है यहां के तोर तरीके तक भूल गई हो, देखो, ज्यादा अपना भेजा चलाने की जरूरत नहीं है, वैसे भी तुम लोगो का बाप तुम लोगो को बोझ समझता है, बडी आई मुझे तेवर दिखाने"

इतना बोल कर गुंजन वहा से टेढा मुंह करते हुए चली गई.

तभी गीता ने कहा,

ये लडकी हमेशा हमारे पीछे क्यों पडी रहती हैं? हमे सुनाने के बाद ही उसे खाना हजम होता होगा"

गीता बात सुन कर सिया बोली,

दीदी, छोडिए ना, एसी लडकियों के मुंह नहीं लगना चाहिए, शहर में तो इससे भी बहुत बुरी लडकियां होती हैं लेकिन मैं उनसे दूर ही रहती हूं"

तभी नीति खुश होते हुए बोली,

दीदी, हमे भी शहर आना है, वैसे भी बाबा की रोज की चिकचिक सुन कर भेजा गरम हो जाता हैं"

तभी सिया बोली,

बाबा की बातो को बुरा मत मान, अब उनका कुछ नहीं हो सकता है"

तीनों ही मंदिर की तरफ जाने लगी.

मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया था. सारे लोग वहीं मौजूद थे, सब लोग पूजा में शामिल हुए थे.

तभी अचानक से सिया की टक्कर किसी से लग जाती है और ओ गिरने को हुई तो कोई उसका हाथ पकडता है. इस वक्त सिया की आंखे बंद थी.

लेकिन ओ आदमी सिया की तरफ बडी शिद्दत से देखने लगता हैं. सिया की खूबसूरती उसके अंदर एसे समाई जैसे कोई शराब,

ओ बस उसे देखते हुए देखता रह गया.

लेकिन फिर सिया को एहसास हुआ कि किसी ने उसका हाथ पकडा है तो ओ आंखे खोल कर देखती है और सामने शख्स को देख कर सिया जल्दी से उससे अपना हाथ छुडाती है, तब तक उसकी दो बहन भी उसके पास आकर खडी हो जाती हैं.

सामने खडा शख्स कोई और नहीं था, प्रताप ठाकुर का एकलौता भांजा आदर्श चौधरी था. जो इस साल इस पूजा में शामिल होने आया था.

आदर्श ने सिया की तरफ देख कर कहा,

इस कोयले की गांव में हीरा कहा से आ गया? तुम्हारा नाम? तुम नई हो यहां?

तभी गीता सामने आकर बोली,

ये मेरी छोटी बहन है, जो कुछ सालों से शहर में पढाई करती हैं, बस यह छुट्टियों के दिन में आती हैं"

गीता की बात पूरी नहीं हुईं और नीति बोली,

वैसे हमारे हीरे के नाम सिया है, सुंदर है ना"

तभी आदर्श सिया को देखते हुए बोला,

बेहद सुंदर, लाजवाब"

फिर सिया उनका हाथ पकड कर वहां से चली जाती हैं लेकिन आदर्श उसे ही देख रहा था. उसने अपने बालों से हाथ फेरते हुए कहा,

मामू से बात करनी होगी"

इतना बोल कर ओ वहां से चला गया.

इधर सब लोग पूजा के बाद आरती के लिए खडे हो गए.

लेकिन आदर्श की नजर दूर से ही पर सिया पर ही थी.

सिया भी उसे देख रही थी. लेकिन फिर आरती की तरफ ध्यान देने लगी.

फिर सब लोग एक एक करते हुए महादेवी का आशीर्वाद लेने लगे. सारे गांव को प्रसाद दिया गया और आज रात सारे गांव के लिए ठाकुर परिवार से भंडारा भी दिया जाएगा.

सब लोग वही खडे रहकर अपने गांव के ठाकुर को देख रहे थे. तभी गांव का ठाकुर अपनि खुर्ची पर आकर बैठ गया, सब लोग उसके सामने सिर झुकाए खडे थे. तभी गांव के ठाकुर सारे गांव के लोगों की जमीन की जानकारी दी और उन पर कितना कर्ज है ओ बताया, जिसे सुन कर गांव वाले बस ठाकुर की बात सुन रहे थे.

सब लोगों को पता था कि ठाकुर गलत बोली लगा रहा था लेकिन किसी की हिम्मत उसके आगे जानी की नहीं थी.

सबके हिसाब के बाद अब बारी थी, ठाकुर के ऐलान की थी. तो ठाकुर बोला,

सब लोग अच्छे से जानते थे कि हर साल हमारे गांव की एक लडकी शादी कर दी जाती है, वैसे तो शादी की बोहोत लंबी कागज हमारे पास आई है, और सबको देखने के बाद मैंने तय किया है कि इस साल,

सब लोग लोग बोहोत ध्यान लगाकर सुन रहे थे. क्योंकि इसमें सबकी बेटी यो के नाम थे. सब लोग अपने मन ही मन में महादेवी को प्राथना कर रहे थे कि मेरी बेटी के नाम को लिया जाए.

तभी गुंजन तीनों के पास आकर बोली,

देखना मेरा नाम लिया जाएगा, मेरे बापू ने खुद ठाकुर साहब से बात करी मेरी बिहाह की, देखना अभी मेरा नाम आएगा, और इस साल इस गांव से मेरी डोली उठेंगी"

गुंजन की बात सुनकर नीति बोली,

डोली उठेंगी या अर्थी ये पता चलेगा ही"

उसकी बात सुनकर सिया ने कहा,

एसे नहीं बोलते किसी के बारे में, जरूरी नहीं है कि सामने वाला गलत बोल रहा है तो हमें भी उसके जैसा बनना है,

तभी नीति बोली,

Sorry दीदी, आइंदा याद रखूंगी"

तभी गीता उनके तरफ देखते हुए बोली,

तुम लोग किसकी बातों में आ गई हो, सामने देखो, कोई जरूरत नहीं है किसी की बात को सुनने की,

गीता की बात सुन कर गुंजन तेवर दिखाते हुए वहां से चली गई.

तभी तीनों ठाकुर की बात को सुन रहे थे.

तभी ठाकुर आगे कहा,

इस साल मेरे भतीजे की शादी इस गांव की लडकी से करवाई जाएंगी, मेरे भतीजे के लिए मैने इस गांव की लडकी को चुना है, सब लोग अच्छे से जानते हो कि मेरा एक ही भतीजा है और मुझे जान से ज्यादा प्यारा है, तो मेरे भतीजे से जिस लडकी की शादी होगी ओ लडकी है.

सब लोग ठाकुर की बात को सुन रहे थे सब लोग बस कान में तेल लगाकर सुनने की कोशिश कर रहे थे. तभी ठाकुर ने रुकते हुए अपने भतीजे को अपनी तरफ आने का इशारा किया उसका भतीजा आदर्श उसके पास आकर खडा हुआ, आदर्श अच्छा लडका था, गांव की हर एक लडकी उसकी सपने देखा करती थी. सबकी दिलो का राजकुमार था आदर्श,

तभी अपने भतीजे के कांधे पर हाथ रखते हुए ठाकुर ने सामने गांव वाले की तरफ देख कर कहा,

मेरे भतीजे आदर्श की जिस लडकी की शादी होने जा रही है, ओ है सिया रामसेन, रामसेन की बेटी, उससे मेरे आदर्श से करवाएं जाएंगी.

इतना बोल कर ढोल बजने लगा और कुछ गांव के लोग खुश हो गए, कुछ उदास हो गए और कुछ लोग गुस्सा हो गए.

वही इधर सिया के पिता के तो खुशियों का ठिकाना नहीं रहा, ठाकुर के घराने के साथ उसका रिश्ता जुडने जा रहा था, ये बात उसके लिए किसी कल्परुक्ष की मिलने की भाती थी. उसकी चेहरे की चमक बता रही थी कि ओ कितना खुश था वही उसकी पत्नी और बहन ओ भी बहुत खुश थी.

इधर गीता और नीति दोनों उदास हो गई वहीं ये बात सुन कर तो सिया को एक शौक ही लगा ओ अंदर ही अन्दर खबराने लगी. इस वक्त क्या करे उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था.

सबकी नजरे बस सिया पर थी, लेकिन सिया को जैसे इसका होश नहीं था.

ओ वहां से भागते हुए चली गई. और उसके भागते हुए देख कर उसकी दोनो बहने भी उसके पीछे चली गई.

वही उसका पिता उसे एसे करते हुए देख रहा था तभी ओ आगे आकर झुक कर बोला,

माफी चाहता हूं मालिक, लेकिन शादी की बात सुन कर मेरी बेटी शर्मा गई है आप फिक्र मत करिए, हमे ये रिश्ता मंजूर है.

ठाकुर उसकी बात को सुन कर फिर बोला,

ठीक है रामसेन अपने बेटी को तैयार रखना, हमारे घर की शान है अब ओ, मेरे एकलौते भतीजे का दिल जीत लिया उसने, याद रहे, कोई गलती नहीं होनी चाहिए वरना,

ठाकुर बात को सुन कर रामसेन उसके सामने हाथ जोड कर बोला,

मालिक ये तो हमारे लिए किसी सोने के खजाने के जैसा है हम कोई गलती नहीं करेंगे,

फिर इतना बोल कर ठाकुर आगे बोलता है,

शादी की तैयारी की जाए,

इतना बोल कर ठाकुर अपने लंबे कदम लेकर वहां से चला गया और उसके पीछे उसका परिवार और उसके लोग भी चले गए.

वही इधर सिया बहुत दूर तक भाग कर आई थी क्योंकि उसे समझ ही नहीं आया कि ओ Kiss और भाग रही थी.

तभी अचानक सामने आकर ओ बैठ गई और जोर जोर से रोने लगी. उसके दिल में बोहोत तेज दर्द था, जो आज आंसू बन कर बहने लगा था.

थोडी देर एसे रोने के बाद उसने खुद से ही कहा,

मै शादी कैसे कर सकती हूं, मै यहां इस लिए नहीं आई थी, मै तो यहां अपने पिता की जरूरत को पूरा करने आई थी, मै ये नहीं कर सकती, किसी और से शादी नहीं, ये खयाल भी मै अपने जहन में नहीं ला सकती, भगवान क्या कर रहे हो आप मेरे साथ, आपको तो सब पता है फिर एसे कैसे होने दिया आपने? मेरी आराधना में कोई कमी रह गई थी क्या? मैंने तो हमेशा ही हर एक नीति का पालन किया है फिर मेरे साथ एसा क्यों? आप तो सब जानते है कि मै यहां सिर्फ अपनी बहनों की सलामती के लिए आई थी, सिर्फ उनके लिए, और इसके लिए मैंने क्या दांव पर लगाया है, ये भी आपको अच्छी तरह से पता है.

फिर क्यों? सिया ये बोलते हुए रोए जा रही थी.

तभी उसकी दोनों बहने उसके पास आकर बोली,

शहर जाकर तूने किसी मैराथन में भाग लिया था क्या जो इतनी दूर तक भाग कर आ गई पता है इतनी दूर भागते हुए आकर तो हमारी सांस अटक गई.

गीता ने हफ्तों हुए सिया को देखकर कहां तभी नीति भी अपने कमर पर हाथ रखते हुए सांस लेने की कोशिश करने लगी और फिर बोली दीदी बहुत मेहनत करवाई आपने.

तभी दोनों ने देखा कि सिया ने रो कर अपना बुरा हाल कर दिया था उसे ऐसे देखते हुए गीता को बिल्कुल अच्छा नहीं लगा उसने कहा,

सिया क्या हुआ है तुम्हें तो खुश होना चाहिए ना आदर्श जैसा लडका किस्मत वालों को मिलता है.

तभी सिया गीता की बात को सुनकर उसका हाथ पकड कर उसकी तरफ देख कर रोते हुए बोली,

दी हमें शादी नहीं कर सकते कुछ करिए दीदी हमें शादी नहीं कर सकते हमें नहीं करनी है शादी हम या शादी करने नहीं आए थे हम तो यहां आप दोनों के लिए आए थे और बाबा पर जो कर्जा था इस चुकाने आए थे दीदी प्लीज आप बाबा से बोलिए ना कि मुझे शादी नहीं करनी है.

दोनों को समझ नहीं आ रहा था कि सिया ऐसा क्यों बोल रही थी क्योंकि आदर्श को मना करने की कोई वजह नहीं थी वह एक अच्छे खानदान का और बडे परिवार का बेटा था और उसमें उसका मामा इस गांव का ठाकुर था तो यह बात किसी भी लडकी के लिए खुशी की हो सकती थी लेकिन सिया को रोते हुए देख कर दोनों को बहुत अजीब लगा.

तभी गीता और नीति एक दूसरे को देख रही थी और आखिरकार गीता ने सवाल किया.

शादी तो कभी ना कभी करनी ही पडेगी ना तेरी नहीं हुई तो मुझे करनी पडेगी लेकिन कभी ना कभी तो करनी पडेगी देखो सिया बहुत अच्छा लडका है ऐसा खानदान तुम्हें फिर से नहीं मिलेगा मेरी बहन तुम वहां बहुत खुश रहोगी वैसे भी बाबा के रोज के तानों से भी छुटकारा मिल जाएगा

गीता ने नाराज होते हुए यह बात बोली लेकिन सिया दोनों की तरफ देख रही थी उसे समझ नहीं आ रहा था कि सच दोनों को कैसे बताएं?

सिया का सच क्या था जानिए नेक्स्ट चैप्टर में. आखिर सिया का क्या सच था?

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