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Mohabbat

महरूमे तमन्ना कोई हम सा नहीं होगा

होगा भी अगर कोई तो इतना नहीं होगा

तो कैसे समझ पाओगे ये इश्क़ है तुम को

जब दर्द का ही दिल में बसेरा नहीं होगा

कैसे तुझे अंदाज़ा हो अंदर की थकन का

तू हिज़्र के सहरा से ही गुजरा नहीं होगा

फिर भी मुझे उस से है मोहब्बत सी मोहब्बत

हालांकि पता है ये वह मेरा नहीं होगा

भरता हुआ लगता है ये भरता नहीं लेकिन

ये ज़ख्मे जिगर है कभी अच्छा नहीं होगा

उस वक्त नई फिर से मुझे चोट लगी है

जब मुझ को यकीं था कोई धोखा नहीं होगा

तन्हा यूं सफ़र करना मुझे ठीक लगा है

लोगों के बिछड़ जाने का खदशा नहीं होगा

उस खौफ से निकलेगा न वह तोड़ने वाला

वह आईना इक चोट से टूटा नहीं होगा

जब उस को भुलाने में मुझे उम्र लगी है

आसानी से वह भी मुझे भूला नहीं होगा

लोगों के रवैयों से वह वाक़िफ नहीं शायद

मुनसिफ ये समझता है तमाशा नहीं होगा

यह हम ने उदासी का जो पहना है लेबदाह

मलबूस यह ऐसा है जो मैला नहीं होगा

यह सोच के तो तंज़ील नहीं करता मोहब्बत

चाहा है जिसे वह मेरा होगा नहीं होगा

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