
मेरी सबसे बड़ी गलती
मेरी सबसे बड़ी गलती,
किसी और से नहीं… स्वयं से थी,
जब मैंने अपनी ही आवाज़ को
दुनिया के शोर में दबा दिया था।
मैं चलता रहा उन राहों पर,
जो कभी मेरी थीं ही नहीं,
और जो मेरा अपना था,
उसे मैं पहचान ही न सका कहीं।
सबको खुश करने की चाह में,
मैं खुद से ही दूर हो गया,
आईने में जो चेहरा दिखता था,
वह भी मुझसे अनजान हो गया।
पर हर गलती एक सीख बनती है,
और हर दर्द एक संदेश देता है,
मैंने सीखा — स्वयं को खो देना ही
सबसे बड़ा नुकसान होता है।
अब मैं ठहरता हूँ, सोचता हूँ,
और अपनी आत्मा की आवाज़ सुनता हूँ,
क्योंकि सच्ची जीत वही है,
जब मनुष्य स्वयं को चुनता है।