
आँखों में देश सेवा का एक ख्वाब सजाया है,
मैंने खुद को अनुशासन के सांचे में ढाला है।
जब पहनती हूँ NCC और स्काउट की वो वर्दी,
तो लगता है ज़िम्मेदारी ने मुझे हर पल संभाला है।
मैदान की तपती धूप हो या रास्तों की मुश्किलें,
मेरे कदम अब रुकने का नाम नहीं लेते,
अपनी तकदीर खुद अपने हाथों से लिखने निकली हूँ,
मेरे हौसले हारना या पीछे हटना नहीं सीखते।
इस मजबूत इरादे के साथ, एक दिल भी धड़कता है,
जो चुपके से 'अमर उजाला' के पन्नों पर सजता है।
जब भी उठाती हूँ कलम, तो जज्बात बोल उठते हैं,
मेरी डायरी का हर एक कोना मेरी सोच से महकता है।
एक तरफ देश के लिए कुछ कर गुजरने की ये जिद है,
तो दूसरी तरफ शब्दों के खूबसूरत धागे बुनती हूँ,
दुनिया चाहे जो कहे, मैं अपनी मंजिलों को पाकर रहूँगी,
मैं खुद अपने ही हाथों से अपनी नई 'प्रतिज्ञा' लिखती हूँ!