
Mere Humsafar —
यह सिर्फ़ किताब नहीं, मेरी आवाज़ है।"
“कभी छोड़ दिया, कभी टूट गया —
पर फिर भी मैंने सीखा खुद को सशक्त बनाने का रास्ता। "
🌹 कवयित्री के बारे में
डॉ. सुरक सेल्वी चिन्नप्पन
समाज के बीच रहकर भी मैंने हमेशा महसूस किया है —
हर किसी को हमसफ़र तो मिल जाता है,
पर क्या वह सच में समझने वाला, संभालने वाला और साथ निभाने वाला होता है?
कई रिश्ते शब्दों में बनते हैं, एहसासों में नहीं।
और उसी खामोशी में कई स्त्रियाँ अपनी इज़्ज़त, मान और मर्यादा बचाए
एक ज़िंदा लाश की तरह जीती हैं।
मेरा लेखन उन सभी आवाज़ों का प्रतिबिंब है
जो चुप रहकर भी बहुत कुछ कहती हैं।
मेरी कविताएँ सवाल करती हैं, संवेदना जगाती हैं
और हर उस आत्मा को छूती हैं जो सच्चे हमसफ़र की तलाश में है।
“मेरा हमसफ़र” मेरे दिल की पुकार है —
उन सपनों, पीड़ाओं और उम्मीदों की,
जो हर स्त्री अपने भीतर लिए फिरती है।
यह संग्रह सिर्फ कविताओं का नहीं,
बल्कि एक यात्रा है —
खुद को पहचानने और फिर से जी उठने की।
हर पन्ना एक एहसास है, हर कविता एक अनुभव।
मैंने टूटकर सीखा, खुद को समेटा,
और अपने शब्दों को हथियार बनाया।
यह किताब उन सभी के लिए है
जो प्यार करने की हिम्मत रखते हैं
और दर्द को शक्ति में बदलना जानते हैं।
पढ़िए, महसूस कीजिए, और अपने दिल को नए सवेरे की ओर खोलिए।
लेखक की कलम से —
इन कविताओं में वो एहसास हैं
जो शब्दों से नहीं, दिल से निकले हैं।
“मेरा हमसफ़र” उन लम्हों की याद है,
जो बिछड़ कर भी साथ चलते हैं… 🌹
🌹 समर्पण❤️
यह काव्य-संग्रह “मेरा हमसफ़र” समर्पित है —
ईश्वर को,
जिसने मुझे शब्दों के रूप में नया जीवन दिया,
हर आँसू को अर्थ और हर मौन को आवाज़ दी।
अपने परिवार और उन सभी मित्रों को,
जिन्होंने मेरे सफ़र पर भरोसा किया,
हर मोड़ पर साहस और स्नेह का सहारा दिया।
उन सभी स्त्रियों को,
जिन्होंने अपने दर्द को चुपचाप सहा
पर कभी हार नहीं मानी —
जो आज भी जीवन की आँच में मुस्कुराना जानती हैं।
और
उस अदृश्य शक्ति को,
जिसने हर टूटन में भी मुझे लिखने की हिम्मत दी,
मेरी रूह को शब्दों का आकार दिया,
और मेरी कलम को एक पहचान।
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भूमिका —🌹 “मेरा हमसफ़र”🌹
आजकल लोग बड़े आसानी से फ़रार हो जाते हैं —
विवाह के काग़ज़ कुछ पलों में बदल देते हैं,
और दिलों से बनी दुनिया चुपचाप बिखर जाती है।
वो वक़्त कहाँ गया जब रिश्ते को समझने की कोशिश होती थी?
अब वकील भी इंसान ही हैं,
पर उनके दस्तावेज़ों के बीच
एक दिल की भावनाएँ कहाँ खो जाती हैं,
किसने सोचा?
किसी ने दिल से जोड़ा,
एक मामूली काग़ज़ ने उसे खत्म कर दिया।
और हम सब सीखने लगे —
दर्द छुपाना, तन्हाई में रोना,
और भूलने का नाटक करना।
पर भूलना आसान नहीं होता।
किसी का एहसास मार देना,
किसी की मौजूदगी मिटा देना —
कितना कठिन और निर्दयी काम है।
इसी दर्द, इन्हीं सवालों और उसी उम्मीद के बीच
मेरी कविताएँ जन्मी हैं।
यह संग्रह उन आवाज़ों के लिए है —
जो टूटकर भी बोलना नहीं भूलतीं,
जो चुपचाप सहकर भी
फिर से मुस्कुराने की ताक़त जुटाती हैं।
यह सिर्फ मेरी कहानी नहीं,
हर उस दिल की दास्तान है
जिसने प्यार किया, खोया,
और फिर शब्दों के सहारे
जीना सीखा।