
माँ की उँगलियाँ
रात के लगभग 11 बजे थे।
पूरा घर सो चुका था…
लेकिन रसोई की हल्की सी जलती लाइट बता रही थी कि कोई अभी भी जाग रहा है।
राहुल पानी पीने उठा तो उसने देखा —
उसकी माँ चुपचाप बैठी थी… हाथों में सुई-धागा लिए उसकी पुरानी शर्ट का बटन टाँक रही थी।
राहुल थोड़ा झुंझलाकर बोला,
“माँ, ये सब सुबह भी हो सकता था ना… अब सो जाओ।”
माँ मुस्कुराई,
“सुबह तुम्हें ऑफिस जल्दी जाना होता है बेटा… सोचा अभी कर दूँ।”
राहुल बिना कुछ बोले वापस कमरे में चला गया।
अगली सुबह ऑफिस जाते वक्त उसने वही शर्ट पहनी।
जेब में हाथ डाला तो अंदर एक छोटा सा कागज़ मिला।
उस पर माँ की टेढ़ी-मेढ़ी लिखावट में लिखा था —
“बेटा, कल तुम बहुत थके हुए लगे थे…
इसलिए तुम्हारी पसंद के आलू के पराठे रख दिए हैं।
और हाँ… बाहर की चाय कम पिया करो, पेट खराब हो जाता है।”
नीचे एक छोटा सा स्माइली बना था। 🙂
राहुल कुछ सेकंड तक बस उस कागज़ को देखता रहा…
उसे अचानक याद आया —
जब वो छोटा था,
तो हर रात बिना थके माँ उसका स्कूल बैग लगाती थी…
जूते साफ करती थी…
और सुबह खुद भूखी रहकर उसे टिफिन देती थी।
उसने कभी गौर ही नहीं किया कि
जिस औरत के हाथों की उँगलियाँ हमेशा चलती रहती थीं…
वो उँगलियाँ धीरे-धीरे बूढ़ी हो रही थीं।
उस दिन पहली बार राहुल ऑफिस नहीं गया।
वो वापस घर लौटा…
रसोई में गया…
और पीछे से माँ को गले लगाकर बस इतना बोला —
“माँ…
आप थकती नहीं हो क्या?”
माँ हल्का सा हँसी…
और वही जवाब दिया जो शायद हर माँ देती है —
“बच्चों के लिए माँ कभी नहीं थकती बेटा…”
राहुल की आँखें भर आईं।
क्योंकि उस दिन उसे समझ आया…
दुनिया में बिना स्वार्थ के अगर कोई प्यार करता है,
तो वो सिर्फ “माँ” होती है। ❤️
Happy Mother’s Day 🌸
✍️ Ek Khamosh Aurat ✍️