
सुबह का समय था.
Collage का विशाल परिसर धीरे- धीरे छात्रों से भर रहा था. कहीं हँसी की आवाजें थीं, कहीं दोस्त आपस में बात कर रहे थे, तो कहीं कोई दौडकर क्लास की तरफ जा रहा था.
लेकिन Dhara का मन आज शांत नहीं था.
रात को हुए उस गेमिंग अनुभव के बाद से वह बार- बार उसी अजनबी खिलाडी के बारे में सोच रही थी.
DarkKnight.
उसका शांत अंदाज, उसका आत्मविश्वास और सबसे अजीब बात—उसका सिर्फ Dhara को चुनना.
सिर्फ तुम. यह शब्द उसके मन में गूंज रहा था.
Dhara ने हल्के से अपना सिर झटका.
ये सब सिर्फ एक गेम है. और कुछ नहीं, उसने खुद से कहा और Collage के गेट की ओर बढ गई.
Collage में पहला टकराव
जैसे ही Dhara Collage में दाखिल हुई, कुछ छात्राएँ उसकी ओर देखकर फुसफुसाने लगीं.
वही है. Dhara।
सुना है रात- रात भर गेम खेलती है.
Dhara ने बिना ध्यान दिए अपना बैग ठीक किया और आगे बढ गई.
वह अपनी दुनिया में जीने वाली लडकी थी.
लेकिन तभी उसके कदम अचानक रुक गए.
सामने से एक आवाज आई—
इतना घमंड अच्छा नहीं होता.
Dhara ने सिर उठाया.
सामने एक लडका खडा था—लंबा, आत्मविश्वास से भरा हुआ और चेहरे पर अजीब सी गंभीरता.
Raj
Collage का सबसे होशियार छात्र. हर चीज में नंबर वन. पढाई, स्पोर्ट्स और एटिट्यूड—सब कुछ परफेक्ट.
Dhara ने उसे देखकर शांत स्वर में कहा—
मैंने कुछ कहा भी नहीं.
Raj थोडा आगे आया.
लेकिन तुम्हारा चेहरा बहुत कुछ कह देता है.
Dhara की भौंहें चढ गईं.
और तुम्हारा घमंड भी साफ दिखता है.
आसपास खडे कुछ छात्र रुककर देखने लगे.
पहली बार दोनों आमने- सामने थे.
और हवा में तनाव साफ महसूस हो रहा था.
पहली बहस
Raj ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—
तुम जैसी लडकियाँ ज्यादा बोलती हैं.
Dhara ने तुरंत जवाब दिया—
और तुम जैसे लडके खुद को बहुत ज्यादा समझते हैं.
कुछ छात्र“ ओह्ह! की आवाज करने लगे.
Raj ने उसे ध्यान से देखा.
Collage में सिर्फ पढाई होती है, गेमिंग नहीं.
Dhara ने पलटकर कहा—
और दिमाग सिर्फ किताबों में नहीं चलता.
इस जवाब के बाद कुछ सेकंड के लिए दोनों चुप हो गए.
फिर Raj ने शांत लेकिन ठंडी आवाज में कहा—
देखते हैं, तुम कितनी दूर तक जाती हो.
और वह वहाँ से चला गया.
Dhara ने उसे जाते हुए देखा.
अजीब इंसान है, उसने धीरे से कहा.
लाइब्रेरी में नया मोड
कुछ घंटों बाद Dhara Collage की लाइब्रेरी में बैठी थी.
लैपटॉप खुला था.
वह अपने project के लिए काम कर रही थी.
अचानक स्क्रीन पर एक नोटिफिकेशन आया—
ग्रुप प्रोजेक्ट: Raj, Dhara और अन्य सदस्य
Dhara की आँखें चौडी हो गईं.
Raj के साथ? उसने बुदबुदाया.
उसे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि वही लडका उसका ग्रुप पार्टनर बनेगा.
गेमिंग दुनिया की झलक
शाम होते ही Dhara ने गेम लॉगिन किया.
स्क्रीन पर उसका नाम चमका—
MoonLight online
तुरंत एक संदेश आया—
DarkKnight: तुम आज देर से आई.
Dhara ने जवाब दिया—
Collage था.
कुछ सेकंड बाद reply आया—
DarkKnight: Collage कैसा होता है?
Dhara थोडी मुस्कुराई.
बोरिंग. लेकिन लोग interesting होते हैं.
DarkKnight ने पूछा—
कौन interesting?
Dhara ने थोडी देर सोचकर लिखा—
एक बहुत घमंडी लडका.
कुछ सेकंड silence.
फिर message आया—
DarkKnight: उससे दूर रहो.
Dhara ने स्क्रीन को देखा.
उसे नहीं पता क्यों, लेकिन उसकी बातें उसे अजीब सा सुकून दे रही थीं.
ग्रुप Meeting में दूसरा टकराव
शाम को ग्रुप Meeting थी.
Dhara कमरे में दाखिल हुई.
और सामने Raj पहले से बैठा था.
दोनों की नजरें टकराईं.
कुछ सेकंड तक सन्नाटा रहा.
Raj ने फाइल खोलते हुए कहा—
तुम देर से आई हो.
Dhara ने शांत स्वर में जवाब दिया—
और तुम पहले आकर बॉस बन गए?
कुछ छात्र हल्का सा हँस पडे.
Raj ने कहा—
काम जल्दी खत्म होना चाहिए.
Dhara ने लैपटॉप खोला—
तो शुरू करो.
बढता हुआ तनाव
काम शुरू हुआ, लेकिन हर विचार पर दोनों की राय अलग थी.
Raj: डिजाइन सरल होना चाहिए.
Dhara: नहीं, आकर्षक होना चाहिए.
Raj: व्यावहारिक सोचो.
Dhara: बोरिंग मत बनाओ.
बहस बढती गई.
एक छात्र ने धीरे से कहा—
ये तो झगडा जैसा लग रहा है.
Raj ने Dhara को देखा—
तुम हमेशा इतनी बहस करती हो?
Dhara ने तुरंत जवाब दिया—
और तुम हमेशा सब पर नियंत्रण करना चाहते हो?
कमरा फिर से शांत हो गया.
एक रहस्यमयी पल
Meeting के दौरान Raj की नजर Dhara के लैपटॉप पर गई.
स्क्रीन पर एक छोटा सा आइकन चमक रहा था—
MoonLight online
Raj की आँखें कुछ पल के लिए वहीं टिक गईं.
MoonLight. उसने धीरे से कहा.
Dhara ने तुरंत लैपटॉप बंद कर दिया.
तुम्हें इससे क्या मतलब?
Raj ने सामान्य स्वर में कहा—
कुछ नहीं.
लेकिन उसकी आँखों में कुछ अलग था.
जैसे उसने कुछ पहचानने की कोशिश की हो.
रात का रहस्य
रात को Dhara अपने कमरे में बैठी थी.
वह फिर से गेम में लॉगिन हुई.
DarkKnight online
तुरंत संदेश आया—
DarkKnight: आज वही लडका?
Dhara ने लिखा—
हाँ. बहुत परेशान करता है.
DarkKnight ने लिखा—
उससे दूर रहो.
Dhara ने पूछा—
तुम ऐसा क्यों कहते हो?
कुछ सेकंड silence रहा.
फिर संदेश आया—
DarkKnight: बस. अच्छा नहीं लगता.
Dhara ने स्क्रीन को देखा.
उसे समझ नहीं आ रहा था कि एक अनजान खिलाडी उसकी इतनी चिंता क्यों करता है.
दूसरी तरफ Raj अपनी बालकनी में खडा था.
हवा तेज चल रही थी.
वह धीरे से बोला—
MoonLight.
और Dhara अपने लैपटॉप को देख रही थी—
DarkKnight.
दोनों की दुनिया धीरे- धीरे जुड रही थी.
लेकिन सच अभी भी छुपा हुआ था.