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Bhatake

मुंबई आने के बाद हम एक रिसॉर्ट में दाखील हुये. यहा सेक्युरिटी गार्ड का काम था. हम इस तरहा से ड्युटी कर रहे थे मानो बॉर्डर पे तैनात हो. किसी की मजल थी हमारे सामने कोई चिकू को छू सके... वह चिकू की बाग थी. वहा ढेर सारे चिकू थे. सुंदर सा वातावरण था. मानो एक स्वर्ग हो. आम, नारियल, चिकू, पेरू और ढेर सारे फलो के पेड थे. लोग वहा घुमने और आनंद उठाने आया करते थे. हमारा काम था.. किसी को फल, फुल नही तोडने देना और न किसी को गलत काम करने देना.

हम अपनी ड्युटी अच्छी तरह निभा रहे थे.

तभी रिसॉर्ट बंद हो गया.

फिर वहा कोई काम नही था.

कुछ ही दिनो में खयाल आया एह मैं क्या कर रहा हूं, मुझे कुछ और करना चाहिये... सायद पढाई.

और सोचा अबकी पगार लुंगा और गाव जाकर पढाई कर लुंगा...

तभी..

Baatcheet