Back to feed

लालबत्ती

एक ओर जहां लाल बत्ती क्षेत्र को जिस्म के कारोबार का प्रतिबंधित क्षेत्र कहा जाता है वही लाल बत्ती को राजनेताओं की ताकत कही जाती है । लाल बत्ती लगी गाड़ियां जब लाल बत्ती क्षेत्र रेड लाइट एरिया में जाती है तो उन पर कोई अपराधिक धारा लागू नहीं होती । संविधान बनाने वालों ने क्या खूब कानून बनाया है एक लाल बत्ती पॉलीटिकल पावर है तो दूसरी लाल बत्ती इनके संरक्षण में चलने वाले प्रतिबंधित कारोबार । रेड लाइट एरिया में रेड लाइट वालों को सलाम किया जाता है इनके लिए मध्य रात्रि तक इस बाजार में मुजरे किए जाते हैं और फिर मदहोश होकर अपनी हवस मिटा कर रेड लाइट जलाते हुए ये गुजर जाते हैं। आज की राजनीति पतन की ओर उन्मुख हो चुकी है कहते हैं हुस्न और इश्क की दुनिया में थप्पड़(ला......त) खाने के बाद ही राजनीति में नेताओं को बुलंदियां हासिल होती है। 

तो चलिए अब हम इस रेड लाइट पर लिखी गई  एक फिल्म की कथानक से आपको रूबरू कराते हैं, तो सबसे पहले हम चलते हैं भारत का एक छोटा सा जिला धर्मपुर ..........* रेड लाइट एरिया गंगाबाई का कोठा पूरी तरह से वीरान था तभी क्षेत्र के विधायक मंत्री लाल बिहारी पांडे की लाल बत्ती लगी गाड़ी कोठी के पास आकर रूकती है , लाल पांडे सीढ़ी से होते हुए गंगा बाई के पास खड़े होते हैं । गंगा मरणासन्न अवस्था में है वह एक बच्ची उन्हें सुपुर्द करती है और टूटे हुए स्वर में सिर्फ इतना ही कह पाती है .. ... लाल बाबू यह बच्ची आपकी और मेरी प्यार की निशानी है और फिर वह दम तोड़ देती है । गोद में बच्ची को लिए पांडे जी नीचे उतरकर लाल बत्ती गाड़ी पर बैठकर चले जाते हैं ।

15 साल बाद 

मंत्री की बेटी नीलिमा काफी बड़ी हो चुकी है उसकी सुंदरता कॉलेज के सहपाठियों के लिए बेचैनी पैदा कर रही थी

आदित्य एक साधारण परिवार का लड़का था पर मेधावी था , नीलिमा मन ही मन उससे प्यार करने लगी थी।  एक दिन मंत्री जी ने बेटी से आदित्य को घर बुलाया आदित्य का परिचय जानकर मंत्री अवाक रह जाता है , नेताजी अपनी पत्नी को सारी बात बता कर उसे कॉलेज जाने पर प्रतिबंध लगा देते हैं।  बेचारी नीलू पर पहाड़ टूट पड़ता है,  आदित्य और कोई नहीं धर्मपुर रेड लाइट एरिया में जन्मे कावेरी बाई का बेटा था जो काफी आकर्षक था। कावेरी के पांव एक दुर्घटना में कट चुके थे आदित्य ही उसका एकमात्र सहारा था । कहते हैं रेड लाइट एरिया में पैदा होने वाले बच्चों का कोई बाप नहीं होता उसकी कोई जन्म कुंडली नहीं होती वहां के बच्चे मातृशक्ति से संरक्षित होकर सुपर पावर बन जाते हैं काफी समझाने के बाद नीलू को यशोदा अपने पति से उसे कॉलेज भेजने को राजी कर लेती है। कॉलेज में नीलू को पता चलता है कि आदित्य कुछ दिनों से पढ़ने नहीं आ रहा है वह अपने ड्राइवर को आदित्य के पते पर चलने को कहती है । एक बार फिर लाल बत्ती गाड़ी धर्मपुर रेड लाइट एरिया कावेरी बाई के कोठे के पास आकर रूकती है। चारों ओर भीड़ इकट्ठी हो जाती है नीलू गाड़ी से उतरकर अंदर आती है और आदित्य से मिलती है आदित्य उसका परिचय माँ से करवाता है तभी माँ एकाएक अपनी आंचल से अपने बेटे को ढँक लेती है और नीलू को जल्दी यहां से लौट जाने को कहती है , दो प्यार करने वाले इस बात को समझ नहीं पाते , नीलू की लाल बत्ती गाड़ी घर लौट आई है। इसकी भनक मंत्री जी को चल जाती है कि यह दोनों अभी एक दूसरे से मिलते हैं दूसरे दिन फिर लाल बत्ती लगी गाड़ी पर मंत्री जी लाल बत्ती क्षेत्र कावेरी बाई के कोठे पर पहुंचते हैं मंत्री कावेरी को धमकी देते हुए कहता है कि वह अपने बेटे को लेकर इस शहर से कहीं दूर चली जाए वरना  .........वरना क्या  !! बिफर उठी कावेरी , होश में आइये पांडे जी ,अभी मेरा मुंह मत खुलवाइए, आपकी बेटी की सच्चाई अगर दुनिया जान जाएगी तो आपकी लाल बत्ती की चमक काली पड़ जाएगी हम भी लाल बत्ती वाले हैं आपसे कम नहीं ,अरे हम लोगों की वजह से तो आपकी सल्तनतें चलती हैं ,  हमारे एक इशारे पर दुनिया पानी पानी हो जाती है  । कहते हैं .... कोठे पर नाचने वाली तवायफ के पांव की एक घुंघरू अगर टूट कर कोठी की जमीन से सड़क पर आ जाए तो वह बवंडर मचा सकती है , और अगर यही घुंघरू कोई चुम ले तो उसकी जिंदगी सँवार देते हैं । मंत्री की लाल बत्ती की चमक धूमिल पड़ चुकी थी  ,कावेरी भी सचमुच में बेटे को लेकर कहीं दूर चली जाती है।

 5 साल बाद

 लाल बत्ती गाड़ी धर्मपुर रेड लाइट एरिया में रूकती है और कावेरी अपने बेटे आदित्य का हाथ थामे गाड़ी से उतरती है साथ में सरकारी बॉडीगार्ड और सफेद वर्दी में ड्राइवर समान उतार कर घर की ओर बढ़ते हैं ।आदित्य धर्मपुर का डीएम बना कर आया था। पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल था दूसरे दिन आदित्य इस सरकारी लाल बत्ती गाड़ी पर बॉडीगार्ड के साथ मंत्री जी की हवेली पर नीलू से मिलने आते हैं मंत्री जी आदित्य को डीएम के रूप में देखकर मूर्छित होने लगते हैं । नीलिमा दौड़ कर आती है और आदित्य से लिपट जाती है । अब दोनों बालिग थे दोनों कोर्ट मैरिज कर लेते हैं और दोनों लाल बत्ती गाड़ी पर बैठकर घर आते हैं । दोनों मां कावेरी का पाँव छूती है तभी मंत्री अपने करिंदों के साथ आकर नीलू को जबरदस्ती ले जाने लगता है , यह देखकर मोहल्ले के सारे लोग आकर कारिंदों की जमकर धुनाई करते हैं। आदित्य के आदेश पर पुलिस आती है और सभी को गिरफ्तार कर लेती है।

 नीलू को उसके अतीत की जानकारी मिलती है कि वह इसी रेड लाइट एरिया के कोठे पर पैदा हुई थी और गंगाबाई उसे उसके बाप को सुपूर्द  कर दुनियाँ से चल बसी थी। अब उसका दूल्हा भी इसी रेड लाइट एरिया का मिला था पर सबके नसीब अलग-अलग थे लेकिन सबका सपना एक ही था  - लाल बत्ती ...लालबत्ती । नीलू जेल जाकर  बाप से मिलकर सारे रिश्ते तोड़ लेती है और ससुराल  चली आती है ,  और फिर डी एम  पति के सहयोग से एक कल्याणकारी संस्था बनाती है जिसका नाम वह रखती है ..... लाल बत्ती  ....

सभी बच्चों को पूर्ण शिक्षा व सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उसे समाज में समान हक दिलाने का कार्य करती है।वह लाल बत्ती में पैदा हुई, लाल बत्ती के सुख में पली- बढ़ी और लाल बत्ती की रोशनी से दुनियाँ को उजाला करने वाली नीलिमा  ..आपकी हमारी बहन बेटी ही तो है !!

Baatcheet