
मैं हालात हूँ, सब कुछ सिखा देता हूँ।
जब मैं संवरता हूँ तो नसीब खुल जाते हैं,
जब मैं रूठ जाऊँ तो खुशियों के दरवाज़े बंद हो जाते हैं।
अरमान सजाते हैं लोग हर किस्म के,
गर मुझसे टकरा जाए तो मुकम्मल कर दूँ या वजूद ही मिटा दूँ।
मेरे कमज़ोर पड़ते ही लोग ज़िम्मेदारी उठा लेते हैं,
और मेरे ताकतवर बनते ही ज़िम्मेदारियाँ लाद देते हैं।
किस्मत और मेरा बहुत करीबी रिश्ता है,
मैं अच्छा तो किस्मत अच्छी, मैं बुरा तो किस्मत भी बुरी,
ये इल्ज़ाम कभी-कभी मैं भी झेल लेता हूँ।
मेरी ताकत को नज़रअंदाज़ मत कर ऐ नादान,
चाहूँ तो बादशाही छीन लूँ, चाहूँ तो हुकूमत कदमों में रख दूँ।
हाँ ,मैं हालात हूँ, सब कुछ सिखा देता हूँ।