"तुम"
Vivek Rahul
खूबसूरती की व्याख्या को देती आकार हो तुम
हमारी मुलाकातों से मिलकर बना गुलशन का हार हो तुम
और क्या खास तुमको अर्पण करे
तुमसे ही चल रही है हमारी दुनिया हमारी, हमारे जीवन का सरोकार हो तुम !