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"तुम"

मैंनें इस कविता से तारीफ करना और जीना सीखा और रोना भी !

खूबसूरती की व्याख्या को देती आकार हो तुम

हमारी मुलाकातों से मिलकर बना गुलशन का हार हो तुम

और क्या खास तुमको अर्पण करे

तुमसे ही चल रही है हमारी दुनिया हमारी, हमारे जीवन का सरोकार हो तुम !

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