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समय

समय की कीमत

लेखक – मुकेश कुमार शर्मा

प्रस्तावना

समय दुनिया की सबसे अनमोल चीज है। पैसा खो जाए तो वापस कमाया जा सकता है, लेकिन जो समय चला गया वह कभी वापस नहीं आता। कई लोग समय की कीमत तब समझते हैं जब बहुत देर हो जाती है।

यह कहानी एक ऐसे युवक की है जिसने समय की कीमत को देर से समझा, लेकिन जब समझा तो उसने अपनी जिंदगी बदल दी।

अध्याय 1 – लापरवाह युवक

बिहार के एक छोटे से गाँव में रवि नाम का एक युवक रहता था। उसका परिवार साधारण था। उसके पिता किसान थे और माँ घर का काम करती थीं।

रवि पढ़ाई में अच्छा था, लेकिन उसकी सबसे बड़ी समस्या थी कि वह समय की कद्र नहीं करता था। वह सुबह देर से उठता, दोस्तों के साथ घंटों घूमता और मोबाइल पर समय बर्बाद करता रहता।

उसके पिता अक्सर उसे समझाते थे।

“बेटा, समय बहुत कीमती होता है। इसे बर्बाद मत करो।”

लेकिन रवि हँसकर बात टाल देता था।

अध्याय 2 – पिता की सीख

एक दिन रवि के पिता उसे खेत पर ले गए। उन्होंने कहा,

“अगर किसान सही समय पर बीज नहीं बोता, तो फसल नहीं होती। अगर सही समय पर पानी नहीं देता, तो पौधा सूख जाता है। यही नियम जीवन में भी लागू होता है।”

रवि ने पिता की बात सुनी, लेकिन उसने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

अध्याय 3 – असफलता का झटका

कुछ समय बाद रवि की परीक्षा हुई। उसने पढ़ाई ठीक से नहीं की थी क्योंकि वह समय बर्बाद करता रहा था।

जब परिणाम आया तो रवि परीक्षा में फेल हो गया।

यह उसके जीवन का पहला बड़ा झटका था।

उसके दोस्तों ने कॉलेज में प्रवेश ले लिया, लेकिन रवि पीछे रह गया।

उस दिन उसे पहली बार लगा कि उसने अपना समय बर्बाद करके बहुत बड़ी गलती कर दी।

अध्याय 4 – गुरु से मुलाकात

एक दिन रवि गाँव के पास एक पुस्तकालय में गया। वहाँ उसकी मुलाकात एक बुजुर्ग शिक्षक से हुई।

शिक्षक ने पूछा,

“बेटा, तुम इतने उदास क्यों हो?”

रवि ने अपनी असफलता की पूरी कहानी बता दी।

शिक्षक मुस्कुराए और बोले,

“असफलता कोई समस्या नहीं है। असली समस्या यह है कि लोग उससे सीख नहीं लेते।”

अध्याय 5 – समय का रहस्य

शिक्षक ने रवि से कहा,

“दुनिया में हर इंसान को 24 घंटे ही मिलते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि कोई उनका सही उपयोग करता है और कोई उन्हें बर्बाद कर देता है।”

उन्होंने रवि को एक डायरी दी और कहा,

“आज से हर दिन का हिसाब लिखना शुरू करो।”

रवि ने पहली बार महसूस किया कि उसका कितना समय बेकार चला जाता था।

अध्याय 6 – नई शुरुआत

अगले दिन से रवि ने अपनी जिंदगी बदलने का फैसला किया।

वह सुबह जल्दी उठने लगा।

हर दिन पढ़ाई के लिए समय तय करने लगा।

मोबाइल और बेकार घूमने में समय बर्बाद करना बंद कर दिया।

धीरे-धीरे उसकी आदतें बदलने लगीं।

अध्याय 7 – मेहनत का परिणाम

कुछ महीनों बाद फिर से परीक्षा हुई।

इस बार रवि ने पूरे मन से मेहनत की थी।

जब परिणाम आया, तो रवि अच्छे अंकों से पास हो गया।

उसके पिता की आँखों में खुशी के आँसू थे।

अध्याय 8 – सफलता की राह

समय के साथ रवि ने अपनी पढ़ाई पूरी की और समाज के लिए काम करना शुरू किया।

अब वह अक्सर युवाओं को समझाता था कि समय की कीमत क्या होती है।

वह कहता था,

“मैंने समय को बर्बाद करके बहुत कुछ खोया है। इसलिए मैं चाहता हूँ कि कोई और मेरी तरह गलती न करे।”

अध्याय 9 – समय का संदेश

रवि की कहानी गाँव में प्रेरणा बन गई।

लोग अपने बच्चों को उसकी मिसाल देते थे।

रवि हमेशा कहता था –

“समय को पहचानो।

समय को सम्मान दो।

समय का सही उपयोग करो।”

निष्कर्ष

समय किसी के लिए रुकता नहीं है।

जो व्यक्ति समय की कद्र करता है, समय भी उसे सफलता देता है।

लेकिन जो व्यक्ति समय को बर्बाद करता है, वह जीवन में पछताता है।

इसलिए हमें हमेशा याद रखना चाहिए –

“समय सबसे बड़ा धन है।”

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