अल्हड़पन
Jyoti mandloi
एक अल्हड़ सी मुस्कान मेरी
वो संजीदा किरदार कोई
मैं लहराता पानी नदियां का
वो ठहरी हुई चट्टान कोई
मेरी बातों में ना तर्क कोई
उसकी बातों का हर शब्द सही
मैं दिखने में हु ठीक ठाक
वो खूबसूरती का प्रमाण कोई
मैं मानू चंचल मोहन को
वो महाकाल का भक्त कोई!