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अल्हड़पन

एक अल्हड़ सी मुस्कान मेरी

वो संजीदा किरदार कोई

मैं लहराता पानी नदियां का

वो ठहरी हुई चट्टान कोई

मेरी बातों में ना तर्क कोई

उसकी बातों का हर शब्द सही

मैं दिखने में हु ठीक ठाक

वो खूबसूरती का प्रमाण कोई

मैं मानू चंचल मोहन को

वो महाकाल का भक्त कोई!

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