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तेजस्विनी

वो वेदनाओं में तप रही तेजस्विनी है,

उसे उड़ान भरने दो।

वो संघर्षों से घिरी हुई तेजस्विनी है,

उसे नूतन जग रचने दो।

हे विद्रोही! हे दमनकारी!

न उसके साहस का तुम उपहास करो,

वो अग्नि है, उसे जलने दो

यूं न उसे बुझाने का तुम प्रयास करो।

वो बेड़ियों को तोड़ रही तेजस्विनी है,

उसे स्वयं लड़ने दो।

उसे अपने स्वावलंबी अधिकार के लिए

हर बाधा को लांघने दो।

हे विद्रोही! हे प्रतिगामी!

न उसे रोको, न उसे टोको ,

आज उसे उसका प्रमाण बनने दो।

वो वेदनाओं में तप रही तेजस्विनी है,

उसे उड़ान भरने दो।

दुर्गमा दिनेश्वर तिवारी...✍🏻

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