
प्यार
किसी पंडित ने कहा हमारा साथ सही नहीं है
मैंने सीखा की वो लाख दूर रहने की कोशिश करे मुझे उसके पास ही रहना है
अगर वो भी तुम्हे प्यार करती है तो आपस में बात करो घर में बात करो लेकिन अलग बिल्कुल न होना, क्योंकि बिछड़ने का दर्द संभाले नहीं संभलता
मेरी एक पंक्ति है कि -
दिली चाहत अधूरा कर गई
दूसरी मोहब्बत पूरा कर गई
मगर —
पहली मोहब्बत, मोहब्बत रह गई