Back to feed

आंसू

आशू तुम पर ये इल्ज़ाम रहेगा

मेरी प्रिय की आँखें नम करने का

हमने कितने जतन लगाए

प्रिय का चेहरा फूलों सा खिलते रहने का

मेरे पास ना होने पर कितना सताया तुमने

हंसते चेहरे को खूब रुलाया तुमने

जब हम रहते है पास प्रिय के

तब जाने कहा डूब के मर जाते हो

मेरी दूरी पर प्रिय के अन्दर

कैसी बेचैनी कैसा वीरानापन लाते हो

इतनी बारिश करते हो मेरी आंखों से बहने लगते हो।।

Baatcheet