आशू तुम पर ये इल्ज़ाम रहेगा
मेरी प्रिय की आँखें नम करने का
हमने कितने जतन लगाए
प्रिय का चेहरा फूलों सा खिलते रहने का
मेरे पास ना होने पर कितना सताया तुमने
हंसते चेहरे को खूब रुलाया तुमने
जब हम रहते है पास प्रिय के
तब जाने कहा डूब के मर जाते हो
मेरी दूरी पर प्रिय के अन्दर
कैसी बेचैनी कैसा वीरानापन लाते हो
इतनी बारिश करते हो मेरी आंखों से बहने लगते हो।।