#वार-बुधवार
#दिनांक-01/04

/2026
#विषय-हमदर्द
जिदंगी के पडा़व मे कभी सुकून नही मिलते,
लोगो की भीड़ मे अब ठहाके नही मिलते!
हर कोई चल रहा है एक दर्द लेकर,
यहां कोई अब हमदर्द नही मिलते!
किसे सुनाएं हमारे गमो के हिस्से,
यहां कोई सुनने वाले नही मिलते!
हर आदमी के अपने गम है,
हर कोई शख्स झुठी मुस्कान लिये फिरते!
सुख मे काम आने वाले बहुत इंसान है,
दुख मे काम आने वाले अब इंसान नही मिलते!
रिश्ते निभाने के लिए पहले कुछ भी कर जाते थे लोग
अब ऐसे रिश्तेदार नही मिलते!
दुनिया की भीड़ मे कोई हमदर्द नही मिलते,
दर्द सुनने के लिए मनमीत नहीं मिलते!
प्यार शब्द ही गायब हे अब दुनिया से,
प्यार करने के लिए पहले वाले
हमदर्द नही मिलते!!
विपिन उपाध्याय
भवानीमंडी
राजस्थान