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मुलाकात

इस आस में हु बैठी की हो मुलाकात एक दिन।

उस दिन के इंतजार में हु बैठी में।

उस दिन बाते होगी हजारों,

बस इस में हु बैठी।

की फिर मिलो तुम उस दिन की तरह

जब मिले थे हम पहली दफा,

करू मै तुम्हारा इंतजार फिर एक बार

इस आस में बैठी हु।

Baatcheet(1)