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भरोसा

कहने को तो बस एक शब्द है "भरोसा",

पर सांसों से गहरा, रिश्तों का है ये रौशन हिस्सा।

आँखों में तैरता मौन वादा है,

जो बिना कहे भी सब कुछ समझा दे, ऐसा इरादा है।

ये काँच नहीं जो छूने से टूटे,

ये धागा है जो उलझे तो मन को जोड़े।

एक बार बिखरे तो आवाज़ नहीं करता,

बस दिल के किसी कोने में चुपचाप दर्द भरता।

भरोसा माँ की लोरी में छुपा सुकून है,

पिता की हथेली का वो मज़बूत जुनून है।

दोस्त की हँसी में मिली वो जगह है,

जहाँ गिर कर भी उठने की वजह है।

इसे कमाने में उम्र लग जाती है,

गँवाने में बस एक पल की बात होती है।

तौलो तो फूल से हल्का लगे,

निभाओ तो पहाड़ों से भारी सज़ा लगे।

इसलिए जब कोई "भरोसा" करे तुम पर,

तो समझना उसने खुद को सौंप दिया है तुम पर।

शब्द छोटा है, पर अर्थ समंदर,

भरोसा — जीने का सबसे खूबसूरत मंतर।

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