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कहा जाता है। गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरा गुरु साक्षात परब्रह्म तस्मैं श्री गुरुवे नमः।

वास्तव मे गुरु के सान्निध्य बिना जीवन निर्थक है। बिना गुरु के जीवन एक खरपत वार पौध कि सिवा कुछ नही।

हमे धरती पर मानव का जन्म मिला है तो हमारी कीछ जवाबदारी भी है। अपने परिवार के प्रति, अपने समाज के प्रति, तथा अपने राष्ट्र के प्रति।

हमारा जीवन निरुद्देश्य नही है। और अपने उद्देश्य के पालन के लिये हमारा शिक्षित होना आवश्यक है। हमारे गुरु ही हमे शिक्षित करते है। हमारे जीवन को सही दिशा देते है। इसलिये सदैव गुरु का अनुशरण करना चाहिए।हमेशा अपने गुरु का सम्मान करना चाहिये।

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