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मै 'Anvit" हूं

मैं '#अन्वित' हूँ…
मेरे अल्फ़ाज़ों में दर्द है, तो किसी को रुलाने के लिए नहीं, 
बल्कि इसलिए है की ये समझ सको — की टूट कर भी इंसान, अन्वित - ए - मोहब्बत रह सकता है।
“मैं लिखता नहीं हूं,बस दिल की गूंज सफ़्हों पे उतार देता हूँ।”
इसीलिए 'अन्वित' - ए - लफ़्ज़ तुम्हें अपने लगते है !
मेरी फ़ितरत में तकब्बुर नहीं, बस एक सुकून सा है… जो हर दिल की आरज़ू हैं!
क्योंकि ?
 क्योंकि मै औरों से अलग दिखने के लिए नहीं लिखता , मैं लिखता हूँ ताकि थोड़ा सा ख़ुद का , थोड़ा सा तुम्हारा, हाल
तुमसे पहले बयां कर दूं!
और शायद इसी वजह से हर किसी को अपना सा लगता हूँ।।
मैं 'अन्वित' हूँ

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