जहन से निकाल कर रख दिया ख़्याल उसका
दिल से फिर भी नहीं जा रहा कमाल उसका
वो दरवाजा बन गया था जहन का हमारे
सारी रौनके-खुशियां गुजरती थी उसी से
अब उसके बिना तो, जहन में कुछ नहीं जा रहा,
कोशिशे अज्ञात हो रही है, समझ में कुछ नहीं आ रहा,
ओस की तरह मस्तहाल है जिंदगी, और इसका बचकाना अहसास नहीं जा रहा....