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लेकिन!

जहन से निकाल कर रख दिया ख़्याल उसका

दिल से फिर भी नहीं जा रहा कमाल उसका

वो दरवाजा बन गया था जहन का हमारे

सारी रौनके-खुशियां गुजरती थी उसी से

अब उसके बिना तो, जहन में कुछ नहीं जा रहा,

कोशिशे अज्ञात हो रही है, समझ में कुछ नहीं आ रहा,

ओस की तरह मस्तहाल है जिंदगी, और इसका बचकाना अहसास नहीं जा रहा....

Baatcheet