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चुना हुआ व्यक्ति एपि 9

फिर हमारी टीम के दोनों HOD ने कहा कि यह Kiss तरह का मेच है. ऐसे तो हम बराबर ही नहीं कर पायेंगे. तो दुसरी टीम वालों ने कहा कि अभी आप लोगों को कोनसा बच्चों को पढाने जाना है. अभी तो पुरे काॅलेज में गेदरिंग ही चल रही हैं ना सभी लोग फ्री है. तो बस अपने गोल बराबर करों आप दोनों HOD कि थोडी एक्सरसाइज भी हो जायेगी. हमारे दोनों HOD कि हेल्थ भी उनके नाम से मेच खाती थी. इलेक्ट्रिकल के HOD हेल्थ वाइज मोटे थे. तो उनका नाम m. stish मतलब मोटा शतीश और इलेक्ट्रॉनिक्स के HOD पतले थे. तो p. Satish मतलब पतले शतीश फिर दोनों HOD ने खेलना शुरू कर दिया. फिर एक दो गेम खेलने के बाद सब तक गये फिर थोडी देर आराम करने के बाद काॅलेज कि छुट्टी हो गई, तो मेरा दोस्त मेरे पास ही बेठा था. मुझसे कहता कि देख निकाल लाया ना तुझे जेल से मानता है ना भाई को मेने कहा कि हां ठीक है ले तो आया लेकिन सिर्फ आज के लिए. तो बोलता है कि सिर्फ आज के लिए नहीं जब तक काॅलेज में गेदरिंग चलेगी तब तक तु मेरे साथ ही रहेगा. में उसके आत्मविश्वास को देखता ही रहा. फिर अगले दिन काॅलेज में जाने के बाद सभी लोग बस से उतरकर काॅलेज के अंदर जा रहे थे. तो उसने एक sir को सीखा दिया कि sir अभी बस से उतरकर आप m. stish our p. satish sir को बोलना कि दोनों डिपार्टमेंट कि टीम अभी ग्यारह बजे मेदान में आ जाना. कल के गोल तुम लोगों पर उधार है. तो सभी लोग हंस पडे. फिर sir ने दोबारा से कहा कि हंसना नहीं है पहले हमारा रिण चुकाना होगा. तभी तुम सबको छोडेंगे. फिर sir को इशारे से बोलता है कि sir दीपक को इधर बुलाओ तो उस sir ने भी जोर कि आवाज लगाकर बुलाया दीपक sir आपको हमारे साथ चलना है. उधर इलेक्ट्रॉनिक डिपार्टमेंट में नहीं जाना है. अब उस समय सभी स्टाफ थे. तो मेरे HOD मुझे रोक भी नहीं पाएं और मुझे उन sir लोगों के साथ जाने दिया. फिर मेरा दोस्त मेरी तरफ देखकर अपने बालों में हाथ फेरते हुए कहता है अब तो मान गया ना मुझे. फिर मैंने भी उसे धन्यवाद कहा मेरी आजादी के लिए. फिर में दोबारा से अपनी लेब में बेठने लग गया. दिनभर लेब में बेठता और शाम चार बजे सबके साथ वाॅलिवाल खेलता. और फिर शाम को वापस कमरे पर आ जाता. काॅलेज में लगभग पुरे एक महीने गेदरिंग चलीं और मेने भी एक महीने तक दोस्त के साथ ही रहकर उस समय को इंजाॅय किया. फिर गेदरिंग समाप्त हो गई, उसके बाद फिर से क्लासेस शुरू हो गई, अब मैं फिर से लेब में ही बेठने लगा. मेरे फिर दोस्त की सगाई हुई. तो मैं सगाई में तो नहीं गया था. पर दो महीने बाद उसकी शादी थी. उसके लिए उसने मुझे पहले से ही बोल दिया था. कि तुझे मेरी शादी में आना है. फिर हम दोनों काॅलेज में ऐसे रहते थे. जैसे कि जय और वीरू और सभी स्टाफ्स ने हमारा नाम भी यही रख दिया था मेरा नाम जय और उसका विरु क्योंकि वह बहुत बक- बक करता रहता था. फिर कुछ दिन बाद उसने काॅलेज से रिजाइन कर दिया. और काॅलेज छोडकर चला गया. जब वह काॅलेज छोडकर चला गया तो मुझे फिर काॅलेज में बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था. में काॅलेज तो आता था पर जैसे काॅलेज में ना के बराबर ही रहता था. अब जब मेरा दोस्त काॅलेज से चला गया तो मेरे HOD ने फिर से मेरे ऊपर हमला साधा और मुझे डिपार्टमेंट में बेठने के लिए बोल दिया. तो इस बार मेने HOD कि बातों का विरोध नही किया और डिपार्टमेंट में चला गया. मन तो नहीं होता था डिपार्टमेंट में बेठने का लेकिन दुखी मन से बेठा रहता था. एक दिन बेठा तो HOD ने मुझसे पानी की बोतल भरकर टेबल पर रखने के लिए बोला तो मैंने बोतल भरकर टेबल पर रख दि फिर मैं वापस कुर्सी पर बैठ गया. फिर HOD sir ग्राउंड फ्लोर पर टिफिन रख आएं थे. तो मुझसे टिफिन लाने के लिए बोला. तो मैं टिफिन लेने निचे आकर ले गया. फिर शाम के समय नीचे असेम्बली हाल में राष्ट्रगान गाया जाने लगा था. तो HOD डिपार्टमेंट से नीचे खाली हाथ आ गए थे और मुझसे अपना बेग लाने के लिए बोल दिया गया था. पर मैं भुल गया और नीचे आ गया था. तो sir ने मुझे आंखें दिखाकर बेग लाने के लिए वापस ऊपर भेजा तो मुझे सिर हिलाते हुए काॅलेज के सभी स्टाफ ने देख लिया था. और जब मैं ऊपर से वापस बेग लेकर नीचे आया तब भी सारे स्टाफ्स ने मुझे बेग लाते हुए देख लिया था. फिर में बस में बैठ गया. और अपने स्टेशन पर उतर गया. और अपने कमरे पर चला गया. फिर अगले दिन जब मैं वापस काॅलेज गया तो उस दिन मुझे फिर से HOD ने पानी कि बोतल भरकर टेबल पर रखने के लिए बोला तो मैंने मना कर दिया कि sir में यह काम नहीं करुंगा. अगर आपको बोतल ही भरवाना है तो या तो आप खुद भरकर लाइए नहीं तो आप प्युन को बोलिए. लेकिन में बोतल भरकर नहीं लाऊंगा. तो sir ने मेरी तरफ देखकर कहा कि क्या हुआ अगर तुम भी लाकर रख दोगे तो. तो मेने कहा कि sir में काॅलेज का काम करने आया हूं में आपका पर्सनल असिस्टेंट नहीं हुं. और इतना कहकर अपनी कुर्सी पर बैठ गया. तो HOD sir ने अपनी बहन को मेकेनिकल डिपार्टमेंट में फोन करके अपनी भाषा में पुछा कि तुम्हारे डिपार्टमेंट का लेब असिस्टेंट वापस आ गया है. क्या तों sir कि बहन ने मना कर दिया कि नहीं उसने तो रिजाइन कर दिया है. और वह तो अब चला गया है. मेरे भीतर यह जोश मेरा दोस्त ही भर गया था. कि अगर तुम डर गये तो इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल दोनों के HOD तुम्हें हमेशा डराकर रखेंगे. इसलिए डरकर नोकरी नहीं करना है. तो मैंने फिर हिम्मत दिखाकर sir को मना कर दिया. फिर शाम को काॅलेज कि छुट्टी हुई तो मुझे बेग ले चलने के लिए बोला तो मैंने फिर से sir को मना कर दिया. तो sir मुझे इलेक्ट्रॉनिक डिपार्टमेंट के लेब असिस्टेंट का उदाहरण देने लगें. कि वह लडका तो p. Satish sir के सारे काम करता है. तो मैंने कहा कि वह करता होगा लेकिन मैं नहीं करुंगा. फिर उस दिन में ऊपर से खाली हाथ नीचे आया तो सबने मुझे अंगुठे से. कहा क्योंकि मुझे उस दिन असेम्बली में सभी स्टाफ्स ने बोला था कि तुम HOD sir का बेग लेकर क्युं आये तुम HOD sir के नोकर हो क्या. अब अगर वह तुमसे बेग लाने का बोले तो मना कर देना. सभी स्टाफ्स और दोस्त की हिम्मत से HOD sir को मना कर दिया. फिर में अपनी लेब में फिर से बेठने लगा फिर hod sir ने मुझे कभी नहीं कहा कि मैं डिपार्टमेंट में आकर उनके साथ बैठा करुं. फिर दोस्त के चलें जाने के बाद मुझे काॅलेज में बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था. और ऊपर से HOD से भी उलझ गया था. क्योंकि उन्होंने मुझसे कहा था कि तुम मुझसे उलझ कर ठीक नहीं कर रहे हो. तुम्हें मेरी ही जरुरत पडेगी. और हर काम में. और यह बात सच भी थीं कि मुझे उनकी ही जरुरत पडती. और जब मैं अपने कार्यों के लिए उनके पास जाता तो वै मुझे बहुत परेशान करते. इन सभी बातों को सोचकर मैंने काॅलेज में रिजाइन कर दिया. तो सभी स्टाफ्स शोक्ड रह गये. सबको भी यही लगा कि दीपक HOD के तानाशाह बिहेवियर कि वजह से दीपक काॅलेज से रिजाइन कर रहा है. तो सबने मुझे समझाया कि हम सब तुम्हारे HOD से बात करेंगे तो मेने सभी को दुसरा कारण बता दिया और रिजाइन देकर घर आ गया. फिर मैंने दोस्त को भी यह बात बता दी. उसने मुझसे कहा कि तुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था. रिजाइन दिया वह ठीक है लेकिन पहले दुसरी नोकरी ढुंढ लेता उसके बाद रिजाइन देता. तो मेने उसे कहा की मुझे वहां बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था. इसलिए मैंने रिजाइन कर दिया. चल अब तेरे पास मेरे लायक कोई नोकरी हे. तो दोस्त ने कहा कि मैं तुझे शाम तक बताता हूं. फिर दोस्त ने एक ठेकेदार से बात की वह आदमी छियासठ kilovolts कि सप्लाई लाइन का निर्माण कार्य करवा रहा था. और उस काम के निर्माण के लिए उसे कुछ लडकों की जरूरत थी. तो दोस्त ने उससे मेरे लिए बात की. तो उस आदमी ने दोस्त को हां बोल दिया और एक एड्रेस बताया कि तुम्हारे दोस्त को इस एड्रेस पर भेज देना. दोस्त ने कहा कि ठीक है. फिर दोस्त ने शाम को मुझे फोन करके बताया कि तुम्हारे लिए काम मिल गया है. और कल सुबह तुम्हें ठेकेदार ने काम पर बुलाया है. तुम इस एड्रेस पर चलें जाना. मेने दोस्त को थेंक्यु कहा. और फोन रख दिया. फिर अगली सुबह दोस्त के बताएं हुए एड्रेस पर पहुंच गया. और ठेकेदार को फोन कर दिया कि मैं आपकी बताई हुई जगह पर आ गया हुं. तो ठेकेदार ने कहा कि ठीक है तुम थोडी देर उस जगह पर ही बैठो मैं भी थोडी देर में वहां आता हूं. फिर हम साथ में साईट पर चलेंगे. फिर मैं थोडी देर तक बेठा रहा. फिर ठेकेदार मेरे पास आ गया और फिर हम दोनों साथ में साईट पर पहुंच गए. ठेकेदार ने मुझे एक प्लायर दें दिया और एक मोटी केबल पकडा दी और कहा कि इस प्लायर से इस केबल को चिरकर वायर निकाल निकाल कर अलग कर दो मेने अपनी अभी तक कि जिंदगी में कभी हाथ में प्लायर नहीं पकडा था. और ना ही कभी इतनी मोटी केबल को देखा था. और तो और उस केबल को मुझे चिरना भी था. लेकिन अब क्या कर सकते हैं. जीवन में ऐसे बहुत से काम है जिन्हें हम पहली बार ही देखते हैं और करते भी हैं. फिर धीरे- धीरे हमें आदत हो जाती है. मुश्किल शुरुआत में होती है. मेने कभी ऐसे काम किए तो थे नहीं पर पेट के लिए सब करना पडता है. तो मैंने भी किया. दिनभर करता रहा. हम दस लडके थे. और दसों को कुछ नहीं आता था. पर ठेकेदार बताता जाय तो हम करते चले गए. दिनभर केबलें छिलता रहा. कभी केबल चिरता कभी खंभे पर चढता तो कभी केबलें खिंचता. शाम को हथेली देखीं तो पुरी तरह से लाल सुर्ख हो गई थी. जब साईट से कमरे पर आया तो थकान के कारण बिस्तर पर लेट गया. थकान इतनी हों गई थी कि बीना खाना खाएं ही सो गया. थकान के कारण सुबह से नींद भी नहीं खुली तो ठेकेदार ने दोस्त को फोन लगाया कि तेरा दोस्त काम पर नहीं आया है. कहां है वह आयेगा भी नहीं. और नहीं आये तो मुझे बता देना मैं किसी और को लगा लुंगा. फिर दोस्त का फोन आया तो फोन कि घंटी से मेरी नींद खुली तो मैंने दोस्त को मना कर दिया कि मैं काम पर नहीं जाऊंगा. वह काम मुझसे नहीं होगा. वह काम बहुत हार्ड है. तो दोस्त ने कहा कि शुरुआत में कठीन लगेगा फिर बाद में आदत हो जायेगी. पर मेने उसे स्पष्ट मना ही कर दिया. फिर दोस्त ने कहा कि फिर अब तु ही अपनी पसंद की नोकरी देख लें. मेने उसे कहा की ठीक है मैं ही देखता हूं. फिर मैं घर से निकलकर कंसल्टेंसी वालों के पास गया और रजिस्ट्रेशन करवा लिया. तो उन्होंने कहा कि आप कल आ जाइए आपकी नोकरी लगवा देंगे. फिर में दुसरे दिन कंसल्टेंसी वालों के पास गया तो उन्होंने मुझे अपने office में बिठा दिया और फोन से झुट- मुट का यहां वहां फोन लगाने का नाटक करने लगें. मेरे सामने वै ऐसा दिखाएं कि फोन कि दुसरी तरफ नोकरी मांगने वाला लडका है. और यह लोग उसे कह रहे हैं कि हमने तुम्हारा फलानी कंपनी में करवा दिया है. अब दो दिन बाद तुम्हे हमारे पास आकर अपना जाॅइनिंग लेटर मिल जायेगा. और सेलरी तुम्हारी बीस हजार रुपये लगाई है. और पोस्ट पोस्ट तुम्हें इंजिनियर कि पोस्ट पर रखा है. वै लोग मेरे सामने फोन पर इस तरह से बातें करें तो मुझे अंदर से ऐसा लगे कि यह लोग मुझे भी अच्छी कंपनी में पच्चीस हजार नहीं तो कम से कम सत्रह अठारह हजार रुपए की नोकरी पर लगवा ही देंगे. में दो घंटे तक उनके कारनामे देखता रहा. फिर आखिर में उन्होंने कहा कि आपके लिए इंदौर में आठ हजार कि नोकरी है. करोगे तो मैंने कहा कि आठ हजार कि नोकरी तो मैं छोडकर आया हूं. और मैं आपके पास सिर्फ आठ हजार रूपए कि नोकरी के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया है. अभी तो आप लोग फोन पर लोगों को बीस- 25000 वाली नोकरी मां बता रहे थे. और मुझे आठ हजार वाली नोकरी बता रहे हो. तो कंसल्टेंसी वालों ने कहा कि फिर आप कल आ जाइए आपकी नोकरी कल पक्का लगवा देंगे. तो मैंने कहा कि कल पक्का लगा देंगे. तो उन्होंने कहा कि हां तुम कल सुबह से आ जाना. फिर मैं वापस कमरे पर आ गया. फिर अगले दिन सुबह से फिर कंसल्टेंट office में पहुंच गया. उन लोगों का फिर से नाटक चालू हो गया. मेरे सामने फोन कि घंटी बजती यह फोन उठाते और मेरे सामने नोकरी लगवाने की कहानी फिर से शुरू कर देते. कंसल्टेंसी वालों को आठ दिन पुरे हो गये मुझे बैवकुफ बनाते- बनाते मेरी सब्र का बांध टुट गया और मैंने जोर से चिल्लाकर कहा कि तुम मेरा लेटर बना रहे हो कि नहीं शायद कंसल्टेंसी वाले भी मेरे सब्र को देख रहे थे. कि यह कितना सब्र रख सकता है. मेरे सब्र को देख कर. जिस दिन मेंने रजिस्ट्रेशन करवाया था. उसके तीसरे दिन हीं कंसल्टेंसी वालों ने एक office का अपोंइन्मेंट लेटर तैयार कर दिया था. बस वै लोग मेरे सब्र को देखना चाहते थे. फिर जब मैंने चिल्लाकर बोला तो मुझे इंदौर में सर्विस सेंटर का अपोइंटमेंट लेटर मेरे सामने रख दिया. और मुझसे कहा कि जब तुम्हें तनख्वाह मिलेगी तो आधी तनख्वाह हम रखेंगे. में तो पहले ही गुस्सा था कंसल्टेंसी वालों पर पर उस समय मेंने उन्हें हां कह दिया और लेटर में लिखें एड्रेस पर पहुंच गया. एड्रेस पर पहुंचने के बाद मेने रिसेप्शन पर मेडम को लेटर दिया. मेडम ने लेटर देखकर मुझे बेठने के लिए बोल दिया कहा कि अभी sir आ रहें हैं. थोडी देर आप बैठ जाईए. फिर थोडी देर बेठने के बाद sir आएं, और फिर मेडम ने sir को बताया कि मैं इन्टरव्यु देने आया हूं. तो sir ने मुझे अपने सामने वालीं कुर्सी पर बेठाया और अपने बारे में पुछते रहे. जैसे कि तुम्हारे घर में कोन- कोन है. और कोन क्या- क्या करता है. और इससे पहले कहीं काम किया है या नहीं. तो मेने अपने बारे में सब बता दिया और अपने काम के बारे में भी बता दिया

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