तुम्हारी बातें, तुम्हारी अटखेलियां, वो एहसास,
आज भी यादें बहुत जुड़ी हैं , याद है वो अमलतास,
वो बागों में घूमना, हाथों में हाथ,
तुम्हारा झुक कर मेरे माथे को चूमना,
और नाराज़गी दिखाते हुए मेरा इधर उधर घूमना।
और हाँ.... याद करो उस दिन जब किसी बात पर मै
उलझ गई थी ,
कितनी आसानी से तुमने सुलझा दिया था.
ना कोई गुस्सा, ना कोई शिकायत,
बस प्यार से हाथ थामा था.
मेरी उलझन को अपनी मुस्कान से,
एक पल में संवार दिया था।.
कभी - कभी लगता है रिश्ते भी फूल जैसे होते हैं,
सम्भालो तो खुशबू देते हैं।
इस रिश्ते को भी फूलों की तरह महकना है.....
इसलिए ये जो एहसास है, बहुत संभाल कर रखा है मैने।💛
और तुमने ........... ?