फिर जब मेरे रुम पार्टनर ने साफ इंकार कर दिया कि मैं दीपक कि कोई मदद नहीं कर सकता हूं. तो फिर गांव वालें लडके ने मुझसे बात कि मुझसे कहा कि जो पैसे तुने कबुल किए हैं. क्या उतने पैसे तेरे पास है. तो मेने मना कर दिया. फिर उसने अपने साथ पडने वाले लडकों से बात की कि मेरे गांव का हिस्सा लडका है. और उसके साथ ऐसा कुछ हो गया है. उसने चौरी नहीं कि हैं. लेकिन मार से बचने के लिए उसने चोरी कबुल कर ली है. और अब पार्टनर तो पैसे उसी से लेगा. तो अब हम सब मिलकर दीपक कि तरफ से पैसे देते हैं. में वादा करता हूं कि मैं दीपक से आप सभी लोगों के पैसे वापस करवाऊंगा. तो उसके साथ पडने वाले लडके मान गये. और फिर सभी लडकों ने पैसे इकट्ठे करके रुम पार्टनर को दिए और मुझे उन लोगों से छुडवाया. और फिर से अपने साथ ही रखा फिर मैं पालिटेक्निक के फिफ्थ सेमेस्टर में था. और गांव वाले लडके का डिप्लोमा कंम्पलिट हो गया था. और अब वह सरकारी नौकरी और बी. ई कि तैयारी कर रहा था. अब जब वह मुझे अपने साथ ले आया था तो उसके साथ के लडके अच्छे थे. समझदार और मददगार थे. इन्ही मददगार और समझदार लडकों में एक लडका था जो बहुत टेलेन्टेड था. उसे विषयों की अच्छी समझ थीं. तो उसने मुझे कहा कि तुम अपने साथ के लडकों से कहो कि मैं इलेक्ट्रिकल ब्रांच के विषयों कि कोचिंग पढाता हूं. तुम मुझे स्टुडेंट लाकर दो में तुम्हे फ्रि में पढाई करवा दुंगा. तो मेने वैसा ही किया. मेने अपने साथ पडने वाले लडकों/लडकियों को कहा तो वै लोग भी पडने के लिए आ गए. और मैं फ्रि में पढाई करता था. तो मैं पढाई पर अच्छे से फोकस करता था. तो ट्युशन पढाने वाले लडके ने अपने पुरे ग्रुप में ऐलान करके मुझे चेलेंज किया कि तुम एक विषय का नाम बताते हुए कहा कि दीपक तुम इस विषय में सांहठ नंबर ला ही नहीं सकतें हो. तो मेने भी ट्युशन पढाने वाले लडके का चेलेंज स्वीकार कर लिया और चेलेंज स्वीकार करते हुए कहा कि सांहठ नंबर बोलें हेना आप ने में आपको इसी विषय में सत्तर नंबर लाकर बताऊंगा. फिर फिर ट्युशन पढाने वाला लडका मुझे यह बात बोलकर अपने कमरे पर चला गया. फिर अब मैने भी पढाई करना शुरू कर दिया. ताकि उस लडके के चेलेंज को मात दे सकुं. फिर परीक्षा का समय आ गया. फिर मैं परीक्षा देने गया. और पेपर देकर रुम पर आया तो वह लडका फिर से मेरे रुम पर आ गया और मुझसे पुछने लगा कि पेपर केसे गया तो मैंने भी कह दिया कि पेपर बढिया गया. मेरी खुशी देखकर उस लडके को लगने लगा कि शायद दीपक मेरे दिए हुए चेलेंज को क्रेक कर देगा. फिर वह लडका थोडी देर हमारे कमरे पर बैठा और फिर अपने कमरे पर वापस चला गया. फिर मैंने दुसरे पेपर दिए. और फिर जब मेरे सारे पेपर खतम हो गये और फिर पंद्रह दिन के बाद परीणाम आ गया तो जब परिणाम में उस विषय के नंबरों को देखा तो सच में ही उस विषय में मेरे सत्तर नंबर ही आये थे. जब मैं अपनी परीक्षा का परिणाम देख रहा था. उसी समय वह लडका भी मेरी परीक्षा का परिणाम देख रहा था. तो उसने भी उस विषय के नंबरों को देखा तो उसने फटाफट परीणाम का प्रिंट निकाला और हमारे कमरे पर आ गया. और मेरी पीठ थपथपाते हुए कहा शाबाश बहुत खुब आज तो तेरे दिमाग के सामने में भी कायल हो गया हु. बोल शर्त जितने पर तुझे क्या चाहिए. तु जो मांगेगा वो चीज लाकर दुंगा. तो मैंने कहा कि नहीं sir मुझे कुछ नहीं चाहिए. मुझे तो बस आपका आशीर्वाद चाहिए. और आपका ज्ञान चाहिए. मेने उस लडके को ऐसा इसलिए कहा क्योंकि उसने मुझे पढाया था. इसलिए वह मेरे लिए आदरणीय थे पुजनिय थे. इसलिए मैंने उन्हें ऐसा कहा. फिर उन्होंने कहा कि दिल जीत लिया तुने आज फिर उन्होंने मुझे कुछ पैसे दिए और कुछ चाकलेट्स मगवाई फिर सबको चिकलेट्स खिलाकर वै वापस अपने कमरे पर चलें गए. फिर मेरा सिक्स्थ सेमेस्टर शुरू हो गया था. तो अब मैं अपने कमरे पर अकेला हो गया था. क्योंकि जब सबका डिप्लोमा कंप्लीट हो गया था तो. एक- एक करके इंदौर से सभी सीनियर लडके चले गए किसी का जाॅब में सिलेक्शन हो गया था. तो कोई सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे. तो कुछ लोग बी. ई कर रहे थे. किसी कि बिजली विभाग में सरकारी नौकरी लग गई थी. जिस लडके ने मुझे पढाया था. उसकी बिजली विभाग में जे. ई के पोस्ट पर सरकारी नौकरी लग गई थी. मेरे गांव वाला लडका उसी लडके के पास रहकर बी. ई कि तैयारी कर रहा था. और अब मैं कमरे पर अकेला रह गया था. मैं सिक्स्थ सेमेस्टर में था. फिर मुझे भी नोकरी कि Tension होने लगी कि अगर मेरा सिक्स्थ सेमेस्टर कंप्लीट हो जायेगा. तब मैं क्या करुंगा. अगर केम्पस से कोई ढंग की नोकरी नहीं मिली तब मैं क्या करुंगा. तो मैं सोचता रहता था. और फिर भगवान से भी प्राथना करता रहता था कि भगवान में अब क्या करुंगा. डिप्लोमा कंप्लीट होने के बाद आप मुझे इंदौर में ही नौकरी दिलवा देना. में फिर हर रोज भगवान से यही प्रार्थना करने लगा. फिर सिक्स्थ सेमेस्टर में एक कालेज का केम्पस आया. तो मैं उसमें बैठ गया. कालेज वालों ने जो भी प्रश्न पुछे मेने सारे सवालों के जवाब सही सही दिए. फिर इंटरव्यूअर ने मुझसे कहा कि आप थोडी देर बाहर इंतजार किजिए हम बताते हैं. फिर दो तीन लडकों- लडकियो के नाम लिए और फिर मेरा नाम भी लिया. फिर में अंदर गया. तो उन्होंने मुझे नोकरी कि तनख्वाह बताई और जाॅइनिंग कि तारीख पुछा तो मेने उन्हें तारीख बताई. तो इंटरव्यूअर ने तारीख कंसीडर कर ली. और एक एड्रेस लिख कर दिया. और कहा कि जब आप जाॅइन करने आये तो हमारी काॅलेज का हेड office आ जाइएगा आपका जाॅइनिंग लेटर तैयार कर देंगे. मेने कहा की ठीक है. अब मेरे पास जाॅब हाथ में थी. जाॅब मिलने की खुशी में भगवान को धन्यवाद किया. क्योंकि उन्होंने मेरी प्रार्थना सुन ली थी. फिर मैंने घर पर भी अपनी नौकरी के बारे में बता दिया तो घर वाले भी बहुत खुश हुए. फिर अब मैं खुशी खुशी सिक्स्थ सेमेस्टर की पढाई करने लगा. फिर कुछ दिनों के बाद परीक्षा का टाइम टेबल आ गया. फिर मैं परीक्षा कि तैयारी करने लगा फिर पहले पेपर को दिया. और फिर एक- एक करके सारे पेपर दे दिए. फिर सारे पेपर खतम होने के कुछ दिन बाद में काॅलेज वालों के बताएं हुए एड्रेस पर काॅलेज के head office में पहुंच गया. जहां से मुझे एक जाॅइनिंग लेटर और काॅलेज का एड्रेस दिया गया. जिस ट्युशन पढाया था. उसके साथ एक लडका रहता था. वह लडका भी उसी काॅलेज में पढाने जाता था. और जिस लडके ने मुझे पढाया था. उसकी नोकरी भी उसी काॅलेज के पास वाले गांव में लगी थी. अब जब मुझे head office से जाॅइनिंग लेटर देने के बाद कहा कि आप कल सुबह इस एड्रेस वाले काॅलेज में चले जाइयेगा. तो मैं लेटर लेकर वापस कमरे पर आ गया. और फिर कमरे पर आने के बाद कुछ लोगों से एड्रेस पता करने के लिए पुछा तो सबने बता दिया कि यह काॅलेज धार रोड पर स्थित है. फिर मैं लेटर लेकर उस लडके के पास गया जिसने मुझे पढाया था. क्योंकि मुझे उसकी नोकरी कि लोकेशन पता थी कि यह भी धार रोड पर नोकरी करने जाते हैं. तो मेने सोचा कि रोज धार रोड पर नोकरी करने जाते हैं तो इन्होंने उस काॅलेज को देखा होगा. यह सोचकर मैं उनके पास चला गया. जब उनको मेने अपना जाॅइनिंग लेटर लेकर काॅलेज के बारे में पुछा तो. उन्होंने कहा कि इस काॅलेज में तो मेरा रुम पार्टनर भी पढाने जाता है. तो मैंने कहा कि हां सच में. तो sir ने कहा कि हां वह इसी काॅलेज में ही तो जाता है. तो कल सुबह तुम उसी के साथ चलें जाना. तो फिर मैंने कहा कि चलो अब तो मुझे एक साथी भी मिल गया. फिर थोडी देर बाद वह रुम पार्टनर भी बाहर से घुम फिरकर रुम पर आ गया. फिर मेने उससे भी पुछा तो उसने भी मुझसे यही कहा कि हां वह इसी काॅलेज में पढाने जाता है. तो कल सुबह सात बजे तैयार हो जाना कालेज कि बस आती है. चलेंगे फिर सुबह से. ठीक है. मेने हां कहकर वापस अपने कमरे पर आ गया. फिर अगली सुबह में सुबह सात बजे नहा- धोकर सात बजे स्टेंड पर जाकर खडा हो गया और काॅलेज बस का इंतजार करने लगा. फिर थोडी देर बाद वह लडका भी आ गया. फिर मैंने उन्हें नमस्ते किया. फिर थोडी देर बाद काॅलेज कि बस आ गई, फिर हम सब कुछ बच्चे भी थे. उसमें बैठकर काॅलेज पहुंच गए. काॅलेज में जाने के बाद मेने रिशेप्शन पर अपना जाॅइनिंग लेटर दिया फिर मेडम ने मुझे प्रिंसिपल के पास भेजा फिर प्रिंसिपल sir ने एच. आर के कमरे में भेज दिया. और फिर एच. आर मेडम ने मुझे अपने एच. ओ. डी के पास भेज दिया. मेरा HOD कर्नाटका का रहने वाला था. तो उनकी भाषा में थोडी कन्नडी झलकती थी. तो कुछ शब्द समझ आतें थे. और कुछ sir के ऊपर से निकल जाते थे. मेरे HOD का एक दोस्त था वह भी उसी काॅलेज में इलेक्ट्रॉनिक डिपार्टमेंट का HOD थें. और उनकी पत्नी मेकेनिकल डिपार्टमेंट में प्रोफेसर थीं. मेरा HOD इलेक्ट्रॉनिक्स डिपार्टमेंट के HOD का साला था. और इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक डिपार्टमेंट एक ही office में जाॅइन्ट था. तो मुझे अपने डिपार्टमेंट में छोडने एक प्युन गया था. तो वह मुझे डिपार्टमेंट में ले जाकर अपने hod से मिलवा दिया. अब मुझे डिवाइन से एक शक्ती मिली हुई है. और वह शक्ती है. कि मैं सामने वाले व्यक्ति के भीतर कि ऊर्जा को पढ लेता हूं. या पहचान लेता हुं. कि इस व्यक्ति का व्यक्तित्व कैसा है. जब मैं अपने HOD से मिला तो मेने अपने HOD का व्यक्तित्व पढ लिया था. कि यह व्यक्ति अंदर से बहुत डरपोक व्यक्ति हैं. लेकिन बाहर से दिखावा ऐसा करता है कि मैं बहुत गुस्से वाला और खतरनाक व्यक्ती हुं. पर मैं फिर भी office में बैठा रहा. क्योंकि कालेज में मेरा पहला दिन था. पर इलेक्ट्रिकल कि लेब ग्राउंड फ्लोर पर थी. और office सेकंड फ्लोर पर था. और मुझे इलेक्ट्रॉनिक वालों के साथ बेठना अच्छा नहीं लग रहा था. तो मैं शुरुआत में तो इलेक्ट्रॉनिक डिपार्टमेंट में सबके साथ बेठता रहा. लेकिन फिर मुझे जैसे ही पता चला कि इलेक्ट्रिकल कि लेब ग्राउंड फ्लोर पर है. तो मैं फिर लेब में बेठने चला गया. तो वहां पर इलेक्ट्रिकल कि ही प्रोफेसर बैठी थी. मेने उन्हें नमस्ते किया और कक्ष में प्रवेश कि अनुमति मांगी. फिर उन्हें मेने अपना परिचय दिया. तो उन्होंने मुझे बेठने के लिए कुर्सी दी और कहा कि आप आये हो इलेक्ट्रिकल मशीन विषय पढाने के लिए. तो मेने कहा कि हां. फिर हम दोनों लोग बैठे रहें. यहां वहां की बातें करने के बाद मेने भी उनसे यही बात पुछी कि आप ऊपर डिपार्टमेंट में क्युं नहीं बैठते हैं. तो उन्होंने कहा कि मुझे एकांत पसंद है. शांति पसंद है. मेने मन में ही सोचा कि अब मैं बिल्कुल सही इंसान के पास आया हुं. फिर मैंने उनको बताया कि मैं भी आपके साथ बेठा करु तो उन्होंने हां कह दिया. क्योंकि ऊपर डिपार्टमेंट में मुझे भी अच्छा नहीं लगता था. ऊपर सभी लोग सिर्फ दिखावा ही करते थे. फिर में भी मेडम के साथ लेब में ही बेठने लगा. और अपनी क्लास लेने लगा. इलेक्ट्रिकल लेब के ही पास मेकेनिकल डिपार्टमेंट भी था. फिर थोडे दिन बाद मेकेनिकल डिपार्टमेंट में एक लडका आया जो मेरी ही हम उम्र का था. वह भी लेबोरेटरी में आया था. तो वह ऐसे ही घुमते फिरते हमारी लेब में आ गया. वह लडका बहुत फनी, आत्मविश्वासी और हंसमुख स्वभाव का था. तो उसने मुझसे बहुत जल्दी दोस्ती कर ली. वह काॅलेज में आया नहीं था उसे भगवान ने मेरी जिंदगी में भेजा था. ताकि मैं जब उसे इतने आत्मविश्वास से भरा हुआ देखूं तो मैं भी उसकी तरह बन जाऊं क्योंकि मेरे स्वभाव में सीधापन भोलापन मासूमियत, आत्मविश्वास में कमी और डर साफ छलकता था. जब भी वह फ्रि रहता था तो वह मेरे पास आ जाता था. और मुझे खुब हंसाता था. वह सबको ही खुब हंसाता था. सब जगह से घुम फिरकर फिर आखीर में मेरे पास आता था. और फिर बहुत देर तक बेठा रहता था. अब जैसे उसको भी मेरे बीना शांति मिलती नहीं थी. था तो वह बहुत फनी सबके साथ घुल- मिल जाता था. पर फिर भी सबसे मिलने के बाद अगर मुझसे ना मिले तो उसे भी अधुरा ही लगें. फिर उसने देखा कि में अकेला बेठकर खाना खाता हूं तो. उसने कहा कि कल से तुम मेकेनिकल डिपार्टमेंट में हमारे साथ बेठकर खाना खाया करों. और तुम सिर्फ रोटियां बनाकर लाया करों. में तुम्हारे लिए सब्जी घर से लाया करुंगा. तो अब से ऐसा ही होने लगा. में हर रोज सिर्फ रोटियां लें जाता था. और वह सब्जि ले आता था. और मुझे अपने डिपार्टमेंट वालों के साथ बिठाकर खाना खिलाता था. इलेक्ट्रॉनिक डिपार्टमेंट में दो लेब असिस्टेंट थे. सिविल में दो लेब असिस्टेंट थे. मेकेनिकल में दो असिस्टेंट थे. कम्प्युटर साइंस में तीन लेब असिस्टेंट थे. और सभी लेब टेक्नीशियन अपने- अपने HOD के साथ डिपार्टमेंट में ही बेठते थे. और अपने- अपने HOD कि बातें मानते थे. लेकिन इलेक्ट्रिकल कि प्रोफेसर मेडम और मैं हम दोनों हि डिपार्टमेंट में HOD के साथ नहीं बेठते थे. बातें तो मानते थे. लेकिन उनके साथ नहीं बेठते थे. और मैं रहता था. मेकेनिकल के उस लडके के साथ में. अब मेकेनिकल डिपार्टमेंट में मेरे HOD कि बहन प्रोफेसर थीं. तो उसको मेरा मेकेनिकल डिपार्टमेंट में आना जाना पसंद नहीं था. सिर्फ उसको अकेली को ही मुझसे परेशानी थी. बाकी डिपार्टमेंट में किसी को भी मेरा डिपार्टमेंट में आने- जाने से कोई परेशानी नहीं होती थी. ना तो प्रोफेसरों को और ना ही डिपार्टमेंट के HOD को सिर्फ उस मेडम को ही मुझसे जलन होती थी. तो उसने मेरे HOD को मेरे खिलाफ भडका दिया. कि सभी लेब असिस्टेंट अपने- अपने hod के साथ अपने डिपार्टमेंट में ही बेठते हैं. लेकिन तुम्हारा असिस्टेंट हमारे डिपार्टमेंट में क्युं बेठता है. इसे तुम अपने साथ बिठाव इसे अपने साथ बिठाकर रखो. जिस लडके के साथ मेरी दोस्ती थी. उसका नाम लेकर बोलती कि तुम्हारा यह असिस्टेंट उसके साथ दिनभर यहां वहां भटकता रहता है. ना बच्चों को सही से पढाता है. ना तो सही से उन्हें कुछ सीखा पाता है. सभी बच्चे भी शिकायत करते हैं. तुम्हारे असिस्टेंट कि तुम इसे अपने साथ डिपार्टमेंट में लेकर बेठो. अब यह सारी बातें सुनकर मेरा HOD तो सच में भडक गया. और उसने फिर HOD ने एक प्युन के हाथों संदेश भेजा कि दीपक को डिपार्टमेंट में आने के लिए बोल देना. फिर प्युन मेरे पास आया तो में बेठकर पढाई कर रहा था. और मेडम भी बेठे थे. फिर प्रमुख ने आकर मुझसे कहा कि आपको HOD sir ने बुलाया है. तो मैं चला गया जब HOD sir के पास गया तो sir ने कहा कि अब से तुम इसी डिपार्टमेंट में ही बैठोगे. और अब यही पर बेठो. और इस डिपार्टमेंट के लेब असिस्टेंट के साथ रहकर काम सीखों. तो मैंने sir के सामने हामी भर दी और डिपार्टमेंट में ही रहकर इलेक्ट्रॉनिक डिपार्टमेंट के लेब असिस्टेंट से काम सिखता रहा. अब इधर निचे मेरा दोस्त मुझसे मिलने के लिए लेब में आया तो मेडम अकेले बेठे थे. तो उसने मेडम से पुछा कि मेडम आज दीपक नहीं आया है. तो मेडम ने कहा कि आया है. लेकिन उसे HOD sir ने ऊपर बुलाया है. तो उसने पुछा क्युं तों मेडम ने कहा कि मुझे पता नहीं है. कुछ काम होगा HOD sir को दीपक से. तो उसने कहा कि अच्छा फिर मेडम से पुछा कि कब गया था ऊपर तो मेडम ने कहा कि बहुत टाइम हो गया है. उसको तो. फिर मेडम को ठीक बोलकर ऊपर इलेक्ट्रॉनिक डिपार्टमेंट में पहुंच गया. में बेठा था एक कोने में किताब लेकर जब वह डिपार्टमेंट में आया था. उस समय मेरा HOD कहीं बाहर गये हुए थे. तो दोस्त ने पुछा कि तुम यहां क्युं बेठे हों तो मेने उसे सबकुछ बता दिया. असल में में ईश्वर की चुनी हुई आत्मा हुं. और ईश्वर कि चुनी हुई आत्मा को कोई भी बांधकर नहीं रख सकता है. उसे बंधन पसंद नहीं होता है. भगवान उस आत्मा को स्वतंत्र रखता है. आजाद रखता है उस आत्मा को शांति भरे वातावरण में रखता है. क्योंकि उस चुनीं हुई आत्मा को धरती पर एक Mission को पूरा करने के लिए भेजा गया होता है. अब अगर उस आत्मा के Mission में कोई रुकावट आती है तो उस रुकावट को दुर करने के लिए ईश्वर किसी को भेजता है. ताकि वह आत्मा अपने Mission को पूरा कर सकें. और अगर कोई व्यक्ति उस आत्मा को बांधने कि कोशिश करता है. तो ईश्वर उस आत्मा की आजादी के लिए किसी दुसरी आत्मा को उसके जीवन में भेजता है. और मेरे जीवन में रुकावट डालने वाली वह मेडम थी. जिसने मेरे HOD के सामने मेरी झुठी बातें करके गलतफहमी उत्पन्न करके मेरे खिलाफ भडका दिया था. और HOD ने भी बीना सच बात जानें बगैर अपनी बहन की बातों पर विश्वास कर लिया और मुझे गलत मानकर मेरी खुशी शांति आजादी को बांध दिया. फिर जब मेरे दोस्त को पता चला कि मुझे मेरे HOD ने अब इलेक्ट्रॉनिक डिपार्टमेंट में ही बेठने के लिए बोल दिया है तो फिर उसने मुझे वहां से निकालने के लिए सभी डिपार्टमेंट के लोगों को मेरे HOD के व्यवहार के बारे में बता दिया. कि दीपक का HOD उसे अपने साथ बीठाकर रखने के लिए दीपक को डराता धमकाता है. और नोकरी के नाम से डराता है कि अगर तुम डिपार्टमेंट में मेरे साथ नहीं बेठोगे तो मैं तुम्हें प्रिंसिपल sir से कहकर नोकरी से निकलवा दुंगा. अब जब दोस्त ने सभी लोगों से यह बात बोलीं तो सभी डिपार्टमेंट के लोगों ने मेरे HOD से कहना शुरू कर दिया. अब जब सभी डिपार्टमेंट के लोग मेरे पक्ष में बोल रहे थे तो HOD sir को मेरे ऊपर शक हुआ. कि मेने ही सभी डिपार्टमेंट के लोगों को HOD हरकतों के बारे में बोला है. यही बातें सोचकर वै अब मेरे साथ और सख्ती से पेश आने लगें. और उन्होंने प्रिंसिपल sir से सर्कुलर जारी करवा लिया की अब से हर लेब असिस्टेंट अपने- अपने डिपार्टमेंट में ही बेठेगें. अब तो मैं फस गया और दोस्त भी फस गया. अब क्या किया जाए. फिर एक दो दिन बाद winter शुरू हो गये. और काॅलेज में एन्वल गेदरिग शुरू हो गई. बच्चों के खेल खेलने के लिए मेदानो कि साफ सफाई करवाना. नाटक थीम प्रतियोगिता प्रस्तुतियों डांस स्पीच सभी टीचर्स बच्चों को तेयारी करवाने जुट गए. तो मेरे दोस्त को मुझे डिपार्टमेंट से बाहर निकालने का एक बहाना मिल गया. उसने अपने HOD sir से और दुसरे डिपार्टमेंट के HOD से बातचीत की कि sir बच्चे तो दिनभर खेलते ही हैं. क्युं ना हम सब भी बच्चों के साथ खेलते हैं. बच्चों को भी सीखाना हो जायेगा. और हम सब भी बच्चों के साथ थोडा इंजाॅय कर लिया करेंगे. और इसी बहाने मेरा दोस्त भी नीचे आ सकता है. तो सबने कहा कि यार यह आइडिया हमारे दिमाग में क्यु नहीं आया. और इससे पहले कभी उस काॅलेज में ऐसी सोच बनीं ही नहीं थी कि बच्चों के साथ टीचर्स भी गेदरिंग में शामिल हुए. आज तक काॅलेज में सिर्फ बच्चे ही गेदरिंग करते थे. लेकिन इह बार मेरी वजह से और मुझे HOD के जेल से आजाद करने के लिए दोस्त के दिमाग में यह बात डलवाई गई, फिर शुरू दिन बच्चे. खेलते रहे. और एक तरफ खेल रहे थे. और एक दुसरी तरफ मजदूरों से मेदान साफ करवा लिया गया. जिसपर सभी टीचर्स वाॅलीवाल खेलने लगें. अब दोस्त को लगा कि जब सभी टीचर्स खेलेंगे तो दीपक भी नीचे आ जायेगा. लेकिन HOD ने मुझे नीचे नहीं आने दिया. फिर इसने अपना दिमाग दोडाया और अपने डिपार्टमेंट के और फिजिक्स मेथेमेटिक्स के sir को कहा कि आप इलेक्ट्रोनिक & इलेक्ट्रिकल के दोनों HOD को कहो कि हम मेच खेलते हैं. अगर दोनों डिपार्टमेंट के HOD मना कर दे तो उन्हें हम डरपोक कमजोर कहकर चिढांएगे. तो ऐसा ही हुआ मेकेनिकल के और फिजिक्स मेथेमेटिक्स के टीचर्स ने इलेक्ट्रिकल & इलेक्ट्रॉनिक के HOD के सामने मेच रखने की बात कि तो पहले मना कर दिया कि हमारे पास टाइम नहीं है. फिर इसने दो तीन मेडम से हंसने के लिए बोल दिया था कि जब दोनों HOD मना कर दे तो आप हंसने लगी जाना इससे दोनों HOD का ईगो हर्ट हो जायेगा और गुस्से में आकर डिपार्टमेंट के लोगों को मेदान में बुलायेंगे और ऐसा ही हुआ भी. फिर दोनों HOD ने अपने डिपार्टमेंट के सभी लोगों को नीचे बुलाया मुझे भी बुलाया. मेरे दोस्त की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. और जब मैं उसके पास गया तो मैंने उसे कहा कमीने तो वह जोर से हंस पडा. और अब मैं उसके सामने वाली टीम मैं था. मेच तो सिर्फ एक बहाना था. शर्त तो मुझे नीचे लेकर आना था. क्योंकि उसे भी मेरे बीना कुछ खास अच्छा लग नहीं रहा था. तो उसने मुझे निचे बुलाने के लिए फिर यह चाल चली. तो अब आमने- सामने दोनों टीमें खडी हो गई, फिर सीटी बजाईं. मेच तो कोई था नहीं जो प्लान बनाकर खेला जाय कि गोल करना है. उन्होंने तो खाली मनोरंजन करने के लिए यह खाली चाल चली थी. दोस्त की टीम मैं सभी वाॅलिवाल के खिलाडी ही थें. और हमारी टीम मैं केवल एक दो प्लेयर ही थें. तो एक दो प्लेयर से क्या होता है. दोस्त की टीम तो गोल पर गोल किए जा रहे थे. हमारी टीम पर दोस्त की टीम ने बहुत सारे गोल चढा दिए थे. फिर हमारी टीम के HOD ने कहा कि ठीक है हम हार गये अब हम क्या करें. तो दोस्त की टीम वालों ने कहा कि जीतने गोल हमने तुम्हारी टीम पर चढाएं है. उन्हें तुम बराबर करों.