नम्रतापूर्वक किया गया प्रत्येक कर्म सदैव असीम आनंदित करने वाला होता है,इसके परिणाम सदैव सकारात्मक और सुखद होते हैं.मानवीय गुणों में नम्रता का स्थान सर्वोपरि है.यह व्यक्तिगत रूप से विकसित होने का सर्वाधिक प्रकट और प्रभावी लक्षण है.नम्रता विरासत में भी मिलती है,लेकिन इसे अर्जित भी किया जा सकता है.