गांव के लडके की बात सुनकर भईया और मेने कम्प्युटर पर कालेज सिलेक्ट कर दिए. और वापस घर आ गए. फिर भईया ने लडके से फोन करके पूछा कि अप्लाय कर दिया है. अब क्या करें. तो लडके ने कहा कि अब आप थोडे दिन तक इंतजार किजिए जब काॅलेज में काउंसलिंग होगी तो काॅलेज में लिस्ट लगेगी तो मैं लिस्ट देखकर आपको फोन लगा दुंगा तो आप सारे डाक्युमेंट लेकर आ जाना. तो हमने कहा कि ठीक है. फिर हम इंतजार करने लगे. फिर ग्यारहवी का परीणाम आ गया था मैं पास हो गया था. फिर पंद्रह दिन बाद इंदौर काॅलेज लिस्ट में मेरा नाम आ गया था. तो लडके ने भईया को फोन करके काउंसलिंग की तारीख बता दीं की इस दिन आपकों सारे डाॅक्युमेंट लेकर इंदौर आना है. फिर थोडे दिन बाद लडके ने जो तारिख बताई थी. उस तारिख के दिन भईया और मैं सारे डाक्युमेंट लेकर इंदौर काॅलेज में चले गए फिर काउंसलिंग में बैठे फिर मेरा नंबर आया और मेरा Admission कर लिया. फिर भईया और मैं वापस घर आ गए. फिर आठ- दस दिन बाद घर से मुझे कुछ सामान देकर जैसे कि आनाज, बिस्तर मेरे कपडे आदि लेकर में लडके के बताई हुई जगह पर पहुंच गया. फिर लडका मुझे लेने आ गया. फिर हम दोनों उसके कमरे पर पहुंच गए. उसके साथ एक और लडका भी रह रहा था. कालेज में मुझे लडकें ने वही ब्रांच में Admission दिलवा दिया था. जो उस लडके की थी. और उसके साथ जो लडका रह रहा था. उसकी ब्रांच दुसरी थी. तो अब मैं मेरे गांव का लडका और दुसरा लडका हम तीनों साथ रहने लगें. सीनियर लडके रेगिंग लेते थे. पर में अपने गांव के लडके के साथ रहता था तो. उसने मेरी रेगिंग नहीं होने दी. मेरे गांव वाला लडका और दुसरा लडका दोनों द्वितिय वर्ष में थे. तो काॅलेज के प्रथम वर्ष में दोनों को काॅलेज से जो स्टेश्नरी मिली थी. वह दोनों ने मुझे दें दी. क्योंकि काॅलेज में sc/st के बच्चों को ब्रांच वाइज स्टेशनरी फ्री मिलती थी. तो जब तक मुझे नहीं मिली तब तक उन्होंने मुझे दे दिया. कहा कि जब तुझे मिल जाय तो हमें वापस कर देना. मेने कहा कि ठीक है. गांव में में, गांव वालों जैसा रहता था. और इंदौर जाने के बाद भी में गांव वालों जैसा ही रहने लगा. तो मेरे गांव वाले लडके ने मेरे बिहेवियर को देखा तो उसने फिर मुझे शहर में रहने के तौर- तरीके सीखाए. मुझे खाना बनाना भी सीखाया. जब किचन का पुरा काम सीख गया तो फिर अप्लाई करना भी जरूरी है. असल में इंसान हमारे सामने दिखाता कुछ है. और भीतर से होता कुछ है. अब मैं प्रथम वर्ष के प्रथम सेमेस्टर में था. और वै दोनों दि्तिय वर्ष के तृतीय सेमेस्टर में थे. दोनों ने प्रथम वर्ष अच्छे नंबरों से पास किया था. तो दोनों को प्रथम वर्ष के बारे में अच्छा नाॅलेज था. मेरे साथ पडने वाले बच्चे प्रथम सेमेस्टर में ट्युशन जातें थे. पर मुझे कहीं ट्युशन जाना नहीं पडा. क्योंकि मुझे मेरे रुम पार्टनर्स ही बता दिया करें. तो मेरी भी सभी विषयों पर अच्छी पकड हों गई, अगर कोई व्यक्ति आपकों कुछ भी नाॅलेज फ्रि में देता है तो वह कोई न कोई दक्षिणा तो फिर भी आपसे लेगा ही लेगा. तो मुझसे दोनों किचन का काम करवाते थे. अब चूंकि मैं कुछ बोल भी नहीं पाता था कि मैं अकेला इतना काम नहीं करुंगा. क्योंकि एक तो उन्होंने मुझे अपने पास ही रखा था. दुसरा उन्होंने मुझे फ्रि में पढाई भी करवा दि थी. और तीसरा मुझे अपनी स्टेशनरी भी फ्री में देे दी थी. तो मेरे उपर दोनों के बहुत उपकार हो गए थे तो में उनके सामने कुछ बोल भी नहीं पाता था. और अगर बोलता तो फिर दोनों मुझे कमरे से भगा देते. फिर मैं इतने बडे इंदौर में कमरा कहां देखता. और अगर मुझे कोई रुम पार्टनर नहीं मिलता तो फिर मैं क्या करता. दुनिया में अकेले रहने से डर लगता था. अपनों से दूर होने का डर हमेशा बना रहता था. कोई तेज और ऊंची आवाज में मुझे कुछ भी बोल दे तो डर जाता था. अपना पक्ष रखने से डरता था कि अगर मेने अपनी बात लोगों के सामने रखी और अगर मेरी बात किसी को पसंद नहीं आई, और अगर मेरी बात का किसी को बुरा लगा और अगर मेरी बात की वजह से कहीं रिश्ता तोड दिया तो फिर मैं अकेला रह जाऊंगा. में ईश्वर का चुना हुआ व्यक्ति हुं यह बात मुझे पैंतिस वर्ष की आयु में पता चलीं. पैंतिस वर्ष के पहले मूझे अपने बारे में कुछ पता नहीं था. कि मैं कौन हूं. और ईश्वर ने धरती पर मुझे क्युं भेजा है. खैर मैं दोनों लडकों के बिहेवियर को सहता रहा. दोनों की परीक्षा का टाइम टेबल आ गया था. वै दोनों पढाई करते और मै उनके लिए कभी चाय बनाता तो कभी खाना बनाता. और अगर दोनों का कोई दोस्त आ जाता तो उसके लिए भी चाय और खाना बनाता. और अगर दोनों से मिलने चार पांच लडकें आ जाते तो फिर उनकेे लिए भी चाय और खाना बनाओं. लेकिन फिर मुझे आदत हो गई थी. फिर जब मेरी परीक्षा का टाइम टेबल आया तो. मदद तो करने लगे लेकिन मुझे भी अपने लिए चाय और खाना बनाना पडता था. जैसे में उनके लिए अकेले ही सबकुछ करता था. वैसा वै नहीं करते थे. फिर प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा हो गई, परीक्षा के एक महीने बाद परीक्षा का परिणाम भी आ गया. तो मैं एक विषय में फेल हो गया था. और बाकी चार विषय में पास हो गया था. तो सभी सीनियर्स ने मेरी और मेरे पार्टनर्स की तारीफ की कि अच्छा रिजल्ट बनाया है इसने तो चार मे पास और एक में फेल. अब इसमें अच्छा क्या है. अच्छा इसमें यह है कि जिन सीनियर्स ने तारीफ की थी उन्होंने प्रथम सेमेस्टर के सिर्फ दो विषयों को पास किया था. और बाकी तीन विषयों में फेल हो गए थे. फिर परीक्षा देकर सब अपने अपने गांव छुट्टियां मनाने आ गए थे. जब मैं घर आया तो मेरे नेचर बिहेवियर में भी बदलाव था. तो गांव में चाचा- चाचीयों ने भी मेरे नेचर बिहेवियर को देखा कि मैं बहुत बदल गया हुं. मोहल्ले के लोगों ने भी मेरे नेचर बिहेवियर में बदलाव देखा तो मोहल्ले वाले तो बोलते थे कि दीपक अब अच्छा दिखाई देता है. पर मेरी तारीफ चाचीयों के कानों तक पहुंची तो उनके मुंह से तो मेरे लिए बुरे शब्द ही निकलते हैं. फिर दो चार दिन घर पर रहा और वापस इंदौर चला गया. फिर दुसरा सेमेस्टर शुरू हो गया था तो पहले सेमेस्टर का एक विषय और दुसरे सेमेस्टर के पांच विषय सबकी एक साथ फिस भर दी और तैयारी करने लगा. और अब दोनों रुम पार्टनर्स का तों बिहेवियर वैसा ही रहा मदद तो करते थे. लेकिन काम सारा मुझसे ही करवातें थे. जैसे कि आटा में ही लगाता था रोटियां भी मे ही बनाऊ वैसे सिर्फ रोटियां सेकते थे. फिर सब्जि काटना, झाडू पोंछा चाय यह सारा काम मुझे ही करना पडता था. और बदलें में मुझे वै लोग पढाई करवा देते थे. फिर जब उनका फोर्थ सेमेस्टर चल रहा था तो मेरा दुसरा सेमेस्टर चल रहा था. फिर जब हम तीनों की परीक्षाएं शुरू हुई तो. दोनों की परीक्षाएं पहले शुरू हो गई, तो मैने उनके लिए चाय नाश्ता खाना बनाकर दिया लेकिन जब उनका आखिरी पेपर था. और मेरे पेपर शुरू हुए तो दोनों छुट्टियां मनाने घर चले गए. मुझे तो बहुत बुरा लगा कि कितने मतलबी है दोनों. खैर फिर मैंने दोनों को कुछ नहीं कहा और अपने पेपर देता रहा. जब पेपर खतम हुएं तो. में भी अपनी छुट्टियों में घर आ गया. फिर एक महीने बाद फिर परीक्षा का परिणाम आया तो में पांच विषय में पास हो गया था. और एक विषय में फिर से फेल हो गया था. फिर छुट्टियां खतम होने के बाद वापस इंदौर गया तो तीसरे सेमेस्टर में फिर पांच विषय और एक विषय दुसरे सेमेस्टर का ऐसे करके छः विषयों की परीक्षा फिस भर दी. अब दोनों पार्टनर्स का पांचवां सेमेस्टर चल रहा था. और मेरा तीसरा सेमेस्टर चल रहा था. तो दोनों को अब लगने लगा था कि मैं दोनों के नेचर बिहेवियर से अंदर ही अंदर चिढने लगा हुं तो नये साल के अवसर पर दोनों ने पैसे इकट्ठे किए और पांच बियर की बोतल रुम पर लेकर आये. और चिकन भी बनाया था. तो दोनों ने मुझे बिठाया और मुझसे बियर पीने के लिए कहा तो मैंने मना कर दिया कि मैं शराब नहीं पीता हूं. तो दोनों ने कहा कि अरे पगले यह शराब नहीं है. यह तो बियर है. इससे नशा थोडी होता है. यह तो सिर्फ शरीर के अंदर की गंदगी को साफ करने के लिए है. लेकिन पि ले तो मैंने एक घुट लिया तों बहुत ठंडी और कडवा टेस्ट आया तो मैंने फेंक दिया. तो दोनों बोले कि हां पहले कडवी लगती है फिर बाद में बहुत अच्छी लगती हैं. तो फिर मैंने दोबारा से पुरी बोतल गटक ली. उसमें तो नशा होता है. तो हुआं भी नशा. फिर खाना खाकर मैं सो गया सुबह सुबह sir इतना तेज दर्द करें कि मुझे तो कुछ भी समझ नहीं आएं. फिर एक डिस्प्रिन टेबलेट खाई और जैसे तैसे ठीक हुआं फिर चाय पी तो थोडा ठिक हुआं. फिर एक दो दिन बाद गांव वाले लडके और दुसरे लडके में भी नोंक झोंक शुरू हो गई थी. गांव वाला लडका दुसरे लडके की हर छोटी- बडी हरकतों पर रिएक्ट करने लगा था. असल में मेरे गांव वाला लडका मेरे साथ बेइमानी करने लगा था. गांव वाले लडके के नेचर बिहेवियर से ऐसा लगता था कि वह मुझे अपने साथ रखने के लिए नहीं बल्कि अपने काम करवाने लेकर गया था. पर जब भी वह दुसरा लडका मेरा सपोर्ट करें तो मेरे गांव वाला लडका मुझे उस दुसरे लडके के खिलाफ भडकाया करता था. कि वह तुझे बेवकुफ बना रहा है. वह तेरे सामने बहाने बना रहा है. कि वह बिमार है. वह खाना नहीं बना सकता है तों तुम ही खाना बना दिया करों. मेरे पेपर चल रहें. कमरे का सारा काम तुम ही देख लिया करों. अब दो लोगों के बीच मुझे कुछ समझ आ नहीं रहा था. कि कोन सच बोल रहा था. और मेरा झुकाव हमेशा दुसरे लडके की तरफ ज्यादा था. तो शायद इसी वजह से गांव वाला लडका मुझे इस तरह से समझाया करता था. कि मैं दुसरे लडके कि बातों पर ध्यान नहीं दुं. और उसका कोई भी काम नहीं करु हालांकि फायदा तो दोनों मेरे सिधेपन और भोलेपन का उठा रहे थे. फिर जब गांव वाले लडके ने देखा कि में, उसकी बातों पर अब ध्यान नहीं देता हूं तो फिर उसने हमारे पास से कमरा खाली कर दिया था. और अपने साथ पडने वालों के पास जाकर रहने लगा था. फिर हम दोनों काॅलेज में मिलते थे. लेकिन गांव वाला लडका काॅलेज में भी मुझे एक ही बात समझाता रहता था. कि तु भी वहां से कमरा खाली कर दें और अपने साथ पडने वाले किसी लडके के साथ रहने लग जा. वह दुसरा लडका ना तो शराब पीता था ना बियर पीता था और ना ही नाॅनवेज खाता था. पर उसको भी खाना पीना में गांव वाले ने ही सीखाया था. कमरे से मेरे गांव वाले के जाने के बाद में और दुसरे लडके ने फिर कभी बियर नहीं पी और ना ही नाॅनवेज लेकर आए. शायद भगवान यही चाहता था कि हमारे पास से मेरा गांव वाला लडका चला जाए क्योंकि वही शराब सिगरेट और नाॅनवेज खाता था. और अगर वह हमारे साथ रहेगा तो उसके साथ हम भी खायेंगे पीएंगे. तो उसे भगवान ने हमारे पास से दुर करवा दिया. जिस बिल्डींग में हम रहते थे वह बिल्डींग एक वकिल की थी. और उस बिल्डिंग में आठ- दस कमरे थे. जिसमें सबसे निचे एक फेमिली रहतीं थीं. और ऊपर सब पाॅलिटेक्निक डिप्लोमा करने वाले लडके ही रहते थे. जो लडका मेरे साथ रहता था. उसी के गांव का एक और लडका भी उसी बिल्डिंग में रहता था. पहले वह अकेला रहता था. फिर उसके मामा का लडका उसके पास रहने के लिए आ गया. तो वह दोनों लडके हमारे कमरे पर भी आतें रहते थे. और कभी चाय का बोले तो कभी खाना बनाने के लिए बोले. और बोलें भी तो रिक्वेस्ट करके नहीं order मारकर बोलते थे कि चाय बनाओं हमारे लिए. तो में मना कर देता था तो वै लडके मेरे साथ रहने वाले लडके से बोलते थे. और वह लडका मुझे बोलें तो मैं बना दिया करता था. और अब वै लडके हर दिन ऐसा ही किया करते थे. तो में उन लडकों के बारे में साथ वाले लडके को बोलता था कि इन लडकों को मत आने दिया करों कमरे पर. पर मेरे साथ वाला लडका मेरी बातों को नजरंदाज कर दिया करता था. और अपने गांव वाले लडकों का सपोर्ट करता था. फिर एक दिन में गांव आने की सोची तो मैं अपने लिए नई चप्पल खरीद कर लाया तो वह दुसरे लडके का मामा का लडका आकर बोलता है कि में तेरे चप्पल लेकर जा रहा हूं. तो मैंने उसे मना कर दिया कि दुसरे के चप्पलें पहनकर जाओ. तो वह लडका मुझसे बहस करने लगा. और और गाली गलौच पर आ गया. फिर भी मैंने उस लडके को कुछ नहीं कहा और चप्पलें देने से इंकार कर दिया तो वह लडका हाथापाई पर आ गया. जब वह मेरे साथ हाथापाई कर रहा था तो कुछ लडके सामने रहते थे. तो उन्होंने हमें हाथापाई करते हुए देख लिया और दोडकर हमारे पास आएं और हमें छुडा दिया और हाथापाई करने का कारण पूछ तो उसी लडके ने सफाई देते हुए कहा कि मैं बाहर जा रहा था तो मैंने इससे इसके चप्पल मांगी तो साला गालीयां देने लग गया. तो मुझे गुस्सा आ गया और मैंने फिर इसकी कुटाई कर दि. फिर मुझसे लडकों ने बीना सच्चाई जाने मुझे भला बुरा बोलना शुरू कर दिया. फिर लडके हमें समझा बुझाकर चलें गए. फिर वह लडका भी अपने कमरे में चला गया. और फिर शाम को वापस हमारे रुम पर आया और मेरे पार्टनर को चाय पिलाने के लिए बोला तो मेरे पार्टनर ने मुझसे कहा तो मैंने मना कर दिया और बाहर चला गया. फिर उस लडके ने मेरे पार्टनर को मेरे खिलाफ भडकाना शुरू कर दिया. फिर मैं जब रुम पर वापस आया तो वह लडका तब तक अपने कमरे पर जा चुका था. फिर मैंने शाम का खाना बनाया और खाने के बाद सो गया. फिर अगली सुबह अपने गांव आ गया. और गांव में हफ्तेभर रहने के बाद वापस इंदौर गया तो रास्ते में मेरी दीदी का घर है. तो मेरे भांजे ने मुझसे मिलने कि इच्छा प्रकट की थी. की मामा इन्दौर जातें समय मेरे घर आ जाना. तो मैं इंदौर जाते समय रास्ते में दीदी के घर चला गया था. दीदी के घर एक रात रूकने के बाद में अगली सुबह फिर इंदौर के लिए रवाना हुआं. तो मेरे भांजे ने मुझे नोकिया का मोबाइल देते हुए कहा कि मामा आपके पास मोबाइल नहीं है ना. तो आप यह मेरा मोबाइल ले जाओ मैं नया मोबाइल लेने वाला हूं. तो मैं उस फोन को अपने साथ लेकर चला गया. और जब मैं अपने कमरे पर गया तो रुम पार्टनर ने देखा कि मेरे पास नोकिया का छह हजार छह सौ छब्बीस माॅडल का मोबाइल है तो रुम पार्टनर तो शाबाशी देने लग गया. फिर वह लडका भी रुम पर आ गया. तो उसने भी मेरे पास इतना बडा मोबाइल देखा तो बोला तो कुछ नहीं पर मन ही मन जलभुन कर खाक हो गया. फिर सभी कमरे वाले लडके मेरे मोबाइल को देखें और मेरी तारीफ करें. तो उस लडके को मुझसे जलन होने लगी. तो उसने फेसला किया की अब वह मेरा फोन चोरी करेगा. और मुझे उस कमरे से भी निकलवा कर रहेगा. तो उसने उसकी बुआ का लडका मेरा रुम पार्टनर और दो तीन लडकें और हो गये. जब मैं और मेरा पार्टनर रात में सो गये तो सोने से पहले मेने कमरे के आगे का गेट और पिछे का गेट दोनों बंद करके सो गया था. फिर रात में सबने मिलकर चोरी को अंजाम दिया. मेरा मोबाइल, चप्पले और पार्टनर के पैसे चुरा लिए और पडोस वाली बिल्डिंग की छत पर मेरी सीम पटक दी. फिर सुबह सुबह पार्टनर ने अपने पेंट की जेब Check किए तो जेब में पैसे नहीं थे. फिर जैसा प्लान बनाया था. प्लान के अकोर्डिग तमाशा शुरू किया गया. इस प्लान में मकान मालिक भी शामिल था. फिर रुम पार्टनर ने मुझे जगाया और पुछने लगा कि दीपक मेरी पेंट में मेने पैसे रखे थे. तुने देखें क्या. तो मेने अपनी आंखें मसलते हुए कहा कि नहीं मेने नहीं देखें. इतना कहकर फिर मैंने अपने फोन को देखा तो मेरा फोन भी नहीं मिल रहा था. तो फिर मैंने पार्टनर से पुछा कि मेरा मोबाइल कहा है तो उसने कहा कि तेरा मोबाइल गायब है मेरे पैसे गायब है. कमरे में हो क्या रहा है. फिर पार्टनर ने मकान मालिक को यह बात बताई तो नाटक में तो वह भी शामिल था तो अब बनाएं हुए नाटक को थोडा फेलाना जरुरी था. तो फिर मकान मालिक ने पार्टनर से पुछा कि तुम्हें किसी पर शक है. तो पार्टनर ने कहा कि मैं किसका नाम बताऊ सब तो मेरे अपने ही में. तो मकान मालिक ने कहा कि तेरे साथ जो लडका रहता है वह कैसा है. तो पार्टनर ने कहा कि मैं क्या बताऊं तो मकान मालिक ने कहा कि मुझे उससे पुछताछ करने दे दो चार डंडे मारुंगा तो गुनाह कबुल कर लेगा. वैसे भी सीधा साधा और डरपोक तो हे ही वह तो पार्टनर ने कहा कि अगर आप उसे मारोगे और अगर उसने कोई पुलिस केस दर्ज करवा दिया तो सबके सब फसेंगे. तो मकान मालिक ने कहा कि तुम सब Tension मत लो वह कुछ नहीं करेगा. में पुलिस के नाम से उसे ऐसा डराऊगां कि वह निचे से ऊपर तक थर- थर कांपे गा. फिर मुझे बुलाया और बुलाने के बाद मुझसे सीधे बोला कि पैसे कहां छुपाएं तो मैंने कहा कि मैंने नहीं लिए तो वह मुझे लकडी से मारने लगा तो मैं डर गया. और फिर मेरे माता पिता को को बुलाने की धमकियां देने लगा. मेरे घर का पता पुछने लगा और मेरे घर पुलिस भेजने की धमकीं देने लगा तो मैं बहुत डर गया था. तो मेने मार से बचने के लिए चौरी कबुल कर ली. फिर उसने कहा कि यह काम तुने अकेले ने नहीं किया है. और कोन था. तेरे साथ वह ऊपर वाला लडका था. चलों दोनों मिलकर उस बच्चे के पैसे वापस करों. फिर यह बात काॅलेज जाने के बाद मेने अपने गांव वाले लडके को बताई तो उसने मेरे रुम पार्टनर से बात की तो रुम पार्टनर ने कहा कि मैं क्या कर सकता हूं. दीपक ने खुद चौरी कबुल की है.