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धरोहर

वन विभाग छतेसर में नए आए हुए रेंजर साहब नाथूराम सिंह (N.R.singh) को वनरक्षक रामखिलावन ने कहा– साहब नन्ना जी आये हैं आपसे मिलने |

रेंजर साहब ने कहा- कौन आया है?

रामखिलावन ने बताया - पंडित रमाशंकर तिवारी बहुत ही प्रतिष्ठित, धार्मिक, सम्मानित और न्यायप्रिय होने के साथ यहां के जमींदार हैं| जिन्हे हम सभी लोग नन्ना जी

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कहते हैं | अच्छा -तो उन्हें अंदर ही बुला लो| धोती कुर्ता पहने हुए लगभग 70 वर्ष की आयु में भी चेहरे पर तेज,हाथ में बेंत लिए हुए अच्छी कद काठी के नन्ना जी को देखकर रेंजर साहब ने कहा- आइए,बैठिए| अरे रामखिलावन, नन्ना जी के लिए चाय बनवाओ | विनम्र भाव से नन्ना जी ने कहा- नहीं साब रहने दीजिए| पता चला कि नए रेंजर साब आए हैं तो बस आपसे मिलने चले आए| आपके कार्यक्षेत्र में यदि हमारे सहयोग कि जरूरत पड़े तो आप निसंकोच हमें कहिएगा| विनम्रतापूर्वक चेहरे पर हल्की मुस्कान के साथ रेंजर साहब ने कहा - जी जरूर कहेंगे आपसे नन्ना जी |

इस मुलाकात के बाद तो नन्ना जी और रेंजर साहब की मुलाकात लगभग हर दिन होने लगी|

अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित, ईमानदार, गंभीर अधिकारी N. R. सिंह ने एक दिन कहा - नन्ना जी आप भी हमसे किसी भी सहयोग के लिए निसंकोच कहिएगा | नन्ना जी कहने लगे - रेंजर साहब मैं आपसे सहयोग के विषय में ही कहने वाला था| दरसअल आपके पहले बहुत रेंजर आए और चले गए| पर ये बात मैं आपसे कह रहा हूं| यहां गांव से पश्चिम दिशा की ओर एक "पहाड" है,जो हमारी आस्था का केंद्र है, साथ ही प्रकृति की बेजोड़ खूबसूरती का खजाना है| जिसे सिद्ध बाबा आश्रम के नाम से जानते हैं | पूर्व से ही प्रचलित एक नाम गौरैया दाई के नाम से भी जानते हैं|

पैसे के लालची लोग पहाड़ का ठेका करवाना चाहते हैं | ठेका करवाकर पत्थरों को बेचना चाहते हैं|गांव के कुछ लोगों के साथ मिलकर पहले भी सिद्ध आश्रम के पीछे वाले पत्थरों को तोड़ा जा चुका है,जिसको मै बहुत प्रयासों के बाद बचा पाया हूँ |

अगर आप उसकी सुरक्षा में चारों ओर से तार खिंचवा कर एक बड़ा दरवाजा लगवा दें तो हम सिर्फ पहाड़ ही नहीं,कई जीवों के घरों को बचा सकते हैं|

इतना सुनते ही रेंजर साब ने कहा -नन्ना जी क्या हम उस पहाड़ को चलकर देखें |

नन्ना जी ने कहा -जी बिल्कुल| सिद्ध आश्रम पर पहुंचकर रेंजर साहब कुदरत की अद्भुत कारीगरी देखकर हैरान रह गए| रेंजर साहब ने देखा कि पहाड़ पर पत्थर की बड़ी-बडी चट्टानों के ऊपर चट्टान कुछ इस तरह से है,जैसे मानो एक के ऊपर एक किसी ने रखे हों | लेकिन इतनी बड़ी चट्टानों को उठाना किसी साधारण मानव के वश की बात नहीं है,

वहीं पहाड़ के पीछे एक बड़ी सी चट्टान छातेनुमा यूं ही बस रखी थी | जो कभी गिरी नहीं|

पहाड़ के ऊपर एक ऐसा पत्थर भी, जिसको चोट करते ही किसी धातु की तरह टन टन की आवाज आती थी| टनटनाती आवाज के चलते स्थानीय ग्रामीण इसे सोने का पत्थर बोलते हैं|

पहाड़ पर दूध कुंड भी देखा|

पहाड़ पर दो गुफाएं भी देखीं|

एक गुफा में अजगर को देखा जो बहुत दिनों से वहां रह रहा था परंतु उसने कभी किसी को कोई नुक्सान नहीं पहुंचाया|

सब देखने के बाद रेंजर साहब ने कहा - नन्ना जी इसकी सुरक्षा और सुंदरीकरण की व्यवस्था जल्दी ही करवाना अब मेरी भी जिम्मेदारी है|

नन्ना जी ने रेंजर साहब के इस सहयोग के लिए उन्हें आभार व्यक्त किया| उस दिन के बाद रेंजर साहब व नन्ना जी के अथक प्रयासों से सिद्ध आश्रम की सुरक्षा के प्रबंध शुरु कर दिए गए | साथ ही पहाड़ का सुंदरीकरण भी करवाया गया| सिद्ध आश्रम से लेकर मुख्य मार्ग तक सड़क के दोनों ओर फलदार पेड़ भी लगवाए गए| तालाब में पानी भरा रहे इसके लिए छोटा चैकडेम भी नन्ना जी के अथक प्रयासों से बन गया | कई साल बीत गए, आज नन्ना जी नहीं है, परन्तु वो सिद्ध आश्रम पहाड़ ग्रामीणों व लोगों के लिए आस्था के साथ पर्यटन का केंद्र बना हुआ है| रेंजर साहब भी रिटायर्ड हो चुके हैं, जो कि जब कभी यहां आकर आश्रम में कुछ पल ठहरते हैं और हर पत्थर में नन्ना जी की वही मुस्कान ढूंढ लेते हैं तथा नन्ना जी के दिनों की कुछ सुनहरी यादें सुनाकर चले जाते हैं |

लेखक -देवेन्द्र नारायण तिवारी (देवन)

छतेसर, जिला -महोबा, उत्तर प्रदेश

मो. -9305819930

ईमेल - [email protected]

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