फिर चाचा- चाची ने देखा कि में घर पर रहकर घर के सारे काम कर लेता हूं. जिससे माता- पिता को काम कमाई में वृद्धि होती है. और दुसरा पुरे मोहल्ले में मेरी और माता- पिता कि भी तारीफ होती है. तो चाचा- चाची को मेरी और माता- पिता की मोहल्ले वालों से तारीफ सुनकर परेशानी होने लगी. साथ ही मेरी वजह से माता- पिता की कमाई में भी वृद्धि होती थी. जिससे चाचियों को और भी ज्यादा परेशानी होने लगी. तो अब मुझे घर से बाहर निकालने के लिए चाचियों ने अपने बच्चों को रविवार की छुट्टी में अपने साथ खेतों में काम पर ले जाना शुरू कर दिया. और मोहल्ले में अपने बच्चों की अफवाह उडवा दी कि हमारे बच्चे तो स्कूल की छुट्टियों में काम भी करते हैं. असल में मेरी चाचियां सारी लडाई- झगडे सारी प्लानिंग- प्लोटिंग मेरी मां को तकलीफ देने के लिए करतीं थीं. क्योंकी मेरे माता- पिता सत्य, धर्म, और ईमानदारी से कर्म करते थे. और चाचा- चाची बेइमानी, असत्य अधर्म, अन्याय, बेइमानी, अहंकार जलन, ईर्ष्या से कर्म करते थे. तो चाचा- चाची चाहते थे कि मेरे माता- पिता भी असत्य, अधर्म अन्याय ईर्ष्या से कर्म करें. लेकिन माता- पिता जब ऐसा नहीं करते तो चाचा- चाची उन्हें बदनाम करते उनकी अफवाह उडाते उन्हें दुःख तकलीफ परेशानी देते. ताकि माता- पिता दुःख तकलीफ से परेशान होकर माता- पिता भी गलत मार्ग पर चलना शुरू कर दें. माता- पिता के जीवन में मेरा आगमन हुआ तो में भी सत्य, और धर्म के मार्ग पर चल रहा हुं तो. चाचा- चाची और उनके बच्चे मुझे भी अपने जैसा बनाने की कोशिश करते हैं. लेकिन परमात्मा हमें किसी ना किसी रूप में मदद करके दोबारा सत्य और धर्म के मार्ग पर वापस ले आते हैं. माता- पिता को सत्य और धर्म के मार्ग में कोई तकलीफ आये इसके लिए ईश्वर ने मुझे चुना है. ताकि माता- पिता को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने में कोई परेशानी दुःख तकलीफ ना हो. और अगर कोई उन्हें मार्ग से विचलित करने की कोशिश करें तो मैं अपनी बुद्धि विवेक से उनका मार्गदर्शन करुं. अब अगर मैं माता- पिता की मदद करुंगा तो जाहिर सी बात है फिर लोग मुझे भी परेशान करेंगे. मेरे काम भी खराब करने की कोशिश करेंगे. मुझे भी तकलीफ पहुंचाएंगे. अब अगर मैं अपने माता- पिता को सहयोग, सम्मान दिलाउंगा तो फिर चाचा- चाची भी चाहेंगे कि उनके बच्चे भी उन्हें सहयोग और सम्मान दिलाए. पर मैं ईश्वर का चुना हुआ व्यक्ति हुं. मेरे पास स्प्रीचुअल गिफ्ट्स है. और ईश्वर का भी सहयोग है. क्योंकि मैं नेक कर्म करता हूं. लोगों की पशु- पक्षियों की पैड- पोधौ की जीव- जंतुओं की मदद करता हूं. भुले- भटके को राह दिखाता हूं. तो ईश्वर का भी सहयोग है. अब घर में रहते हुए मेरी तारीफ मोहल्ले में होने लगी तो चाचीयों को जलन होने लगी की में घर में रहकर घर का काम करके मेरे माता- पिता की मदद कर रहा हूं. तो मैं घर में रहकर माता- पिता की मदद ना कर पाऊं इसके लिए चाचीयों ने अपने बच्चों को रविवार की छुट्टी में अपने बच्चों को खेतों में काम पर ले जाना शुरू कर दिया और चार छः महिलाओं से मोहल्ले में अपने बच्चों की अफवाह भी उडवा दी कि हमारे बच्चे तो छुट्टियों में काम करके हमारी मदद करते हैं. हमारे बच्चे तो कहते हैं कि हम घर पर रहकर क्या करेंगे. छुट्टी हैं तो हम आपको काम करने लगते हैं. हमारी पाॅकेट मनी का खर्चा हम ही निकाल लेते हैं. तुम्हें भी तो देना ही पडेगा. इससे अच्छा है कि हम ही मेहनत करके हमारी पाॅकेट मनी निकाल लेते हैं. फिर चार छः महिलाएं मेरे माता- पिता को बोलते तो फिर माता- पिता मुझे भी अपने साथ खेतों में काम पर ले जाने लगे. जब चाचीयां ऐसा करतीं तो मुझे बहुत गुस्सा आता था. और फिर में पुरा गुस्सा काम पर निकालता था. तो काम ज्यादा होने लगें. जब काम ज्यादा होने लगें तो शाम को दिखाईं भी दें कि दीपक कितना काम करके आया है. जब मेरा काम मोहल्ले वालों को दिखाई दे तो मोहल्ले वाले तारीफ भी करें. तो चाचीयों को और परेशानी होने लगें. तो चाचीयां फिर अपने बच्चों को बोलने लगे कि दीपक कितना काम करता है. उसके कामों की भी तारीफ होती है और उसके माता- पिता की भी तारीफ होती है. तो तुम सब भी उसकी तरह ही काम करों. मेरी वजह से चाचा- चाची के बच्चे परेशान हो जाते थे. कि घर में कैद करके रखो तो भी यही जीतता है. और घर के बाहर रखो तब भी यही जीतता है. इसे मार डालते हैं. क्योंकि अगर यह जीवित रहा तो यह कारनामे करता रहेगा और इसके कारनामे देखकर हमारे माता- पिता हमें भी इसके जैसे कारनामे करने के लिए कहेंगे. और हम दीपक से जीत नहीं पाएंगे. और जीत नहीं पाएंगे तो घर वाले हमें बोल- बोलकर मार डालेंगे. तो अब हम ऐसा करते हैं कि सब बच्चें- बच्चे अकेले ही नदी के उस पार वाले खेतों में काम करने चलते हैं. और दीपक को भी लें चलते हैं. उधर से वापस आते समय दीपक से नदी तैरकर पार करने की शर्त रखेंगे. दीपक को नदी में कुदा देंगे. और दुर से बैठकर दीपक की मौत का तमाशा देखेंगे. सारा किस्सा ही खतम हो जायेगा. फिर सभी बच्चों ने अपने- अपने माता- पिता से यह कहकर कि आज हम अकेले खेतों में काम करने जायेंगे और नदी के उस पार काम करने जाएंगे. तो मेरी मां ने मुझे मना कर दिया कि तु मत जाएं दुसरे बच्चे जा रहे हैं तो उन्हें जाने दें. पर मेने भी मां से जीद की कि वै मुझे भी नदी पार काम करने जाने दें. पर मां ने साफ मना कर दिया. लेकिन मेने फिर से जीद की कि मैं नदी पार ही काम करने जाऊंगा. नहीं तो फिर मैं आप लोगों के साथ भी नहीं जाऊंगा. तो मां मेरी जीद के आगे हार गयी. लेकिन फिर भी मां ने मुझे अकेले नहीं भेजा. मेरे साथ दीदी को भी भेज दिया. शायद मां को भी चाचीयों के बच्चों पर भरोसा नहीं था. इसलिए मां ने दीदी को मेरे साथ काम पर भेज दिया. अब किसान ने हम सबको नाव से उस पार उतार दिया. और अपने खेत में लें गया. फिर सुबह- दोपहर तक काम किया और फिर लडके- लडके सभी मजाक मस्ती करते हुए नदी के पास आ गये. उन लडकों में मैं भी था. और लडकें मुझे जानबुझकर नदी पर अकेले लेकर आएं थे. लडकों को पता था कि मेरी दीदी भी आयी हुई है. अगर इसकी दीदी के सामने शर्त लगाएंगे तो इसकी दीदी इसे पानी में कुदने नहीं देगी. और अगर यह हमारे साथ अकेला रहा तो हम आसानी से दीपक को अपनी बातों में फसा लेंगे. और नदी तैरकर पार करने की शर्त लगा सकेंगे. और फिर जब मैं नदी में कुद जाऊं तो सभी लडके मुझे पानी में डुबते हुए मेरी मौत का तमाशा देख सकेंगे. पर मैं तो ईश्वर का चुना हुआ व्यक्ति हुं मुझे कोई कैसे हरा सकता है. और पाप करने वालों को षडयंत्र करने वालों को धोखा करने वालों को जवाब देने वाला तो ऊपर बैठा है. वह किसी मासूम के साथ अनहोनी कैसे होने दें सकता है. पर अब सब लडके आपस में बातें करने लगे कि हम सब नाव का इंतजार नहीं करते है. नाव पता नहीं कब आयेगी. हम सब लोग नहाते हुए तैरकर नदी पार कर लेते हैं. तो फिर एक लडके ने कहा कि चलो कुदो नदी में, फिर एक लडके ने कहा कि हां चलो कुदो नदी में, फिर एक तीसरे लडके ने कहा कि अरे कुदो ना नदी में, लगता है किसी ने भी अपनी मां का दूध नहीं पिया है. सब ने कुतिया का दुध पिया है. उस लडके ने ऐसा बोला तो मुझे गुस्सा आ गया और मैंने नदी में छलांग लगा दी. छलांग तो लगा दी एक तो पहले ही खेत में काम करके आये थे. काम करने से हाथ पहले ही दुख रहें थे. ऊपर से नदी में डेम से पानी अलग छोड रखा था. साथ ही में पुरे कपडे भी पहना हुआ था. नदी में पानी पुरे कपडे पहना हुआ और थका हुआ. तो नदी के बीचों- बीच आकर रुक गया थक गया. अब हाथों ने जवाब दे दिया था. तो मैंने पिछे पलट कर देखा तो मैं नदी के बीचों- बीच था. जितना तेरकर पिछे जाता उतना ही तेरकर आगे भी जाता. और अब तक दीदी और दुसरे लोग भी नदी पर आ चुके थे. जब दीदी को पता चला तो दीदी तो सुनकर ही बेहोश हो गई की नदी में मेरा भाई है. फिर मैं भी थक चुका था तो मैंने भी भोलेनाथ को याद किया और सरेंडर कर दिया. और भगवान को याद करते हुए कहा कि भगवान बचा लो. और फिर मैं पानी में निचे जाने लगा. तो सभी लडकों ने चैन की सांस ली कि अब मैं डुब गया और मर गया. पर मैं भी पानी की शतह से एक हाथ निचे गया. और मेरे पैरों में जमीन स्पर्श होने लगी. उसी समय मुंह से निकला बच गया भगवान फिर मैंने थोडी राहत की सांस ली और पानी के अंदर ही अंदर चलते हुए आगे की ओर बढने लगा. बाहर लडकों ने और साथ में काम करने जाने वाले दुसरे लोगों ने भी यही मान लिया कि मैं तो नदी में डुबकर मर गया हुं. पर फिर मैं जैसे- जैसे में नदी में आगे- आगे बढता जाऊं मेरा थोडा- थोडा sir दिखाई देने लगा. तो सब लोग बडे गौर से देखने लगें कि नदी में ऐसा काला- काला आगे बढते हुए क्या दिखाई दे रहा है. फिर थोडा और आगे बढा तो फिर मेरा पूरा sir दिखाई देने लगा तो सबके सब मुझे जिंदा देखकर तपाक रह गए. पर यह चमत्कार शिव का था जो मुझे मौत के मुंह से वापस ले आये थे. क्योंकि मैं बहुत भोला और मासुम था. तो लोगों की बातों में आसानी से भरोसा कर लिया करता था. असल में भगवान ने मुझे ऐसा बनाया ही था. ताकि भगवान मेरे माध्यम से लोगों को बता सकें कि भगवान हमेशा सीधे भोले मासुम और सच्चे लोगों का साथ कभी नहीं छोडते है. भगवान ऐसे लोगों के साथ हमेशा एक सांए की तरह रहते हैं. जब मैं पानी से बाहर निकला तो थकान के मारे किनारे पर गिर पडा और थकान मिटाने लगा. फिर थोडी देर बाद उठकर घर के लिए रवाना हो गया. फिर घर जाकर मां ने मुझे पुरा भिगा हुआ देखा तो मां ने पूछा कि भीगकर क्युं आया है. और दीदी कहां है. तो मैंने कह दिया कि मैं नदी में नहाकर आया हूं और दीदी पिछे आ रही है. मां से इतना कहकर मैं अपने गीले कपडे उतारकर सुखे कपडे पहनने लगा. फिर थोडी देर बाद दीदी भी घर आ गई और आतें ही रोने लगी तो आस- पास के लोग भी इकट्ठा हो गए. और मोहल्ले वाले और मां पूछने लगी कि क्या हुआ तो दीदी ने कहा कि तेरे लडके से पुछ क्या करके आया है- वो तो मां ने कहा कि क्युं क्या करके आया है. तो दीदी ने कहा कि कहा है वो उसको बुलाकर पुछो कि क्या कांड करके आया है वो. तो मां ने पूछा कि तु तो बता कि क्या करके आया है. वह फिर इतने में खेत में काम करने वाले दुसरे लोग भी आ गये. और फिर सारा वाकया मां को कहा सुनाया कि तुम्हारे लडके ने तो आज गजब कर दी. तो मां और बाकी लोगों ने कहा कि आखिर हुआं क्या है. ऐसा क्या काम करके घर आया है. दीपक बाहर आ तो. तो मैं समझ गया था कि अब मुझे मार पडेगी. तो मैं पेड पर चढ गया. फिर दीदी और दुसरे लोगों ने बताया कि हम सब खेत में थे और यह लडके- लडके आगे आकर नदी पर पहुंच गए और पता नहीं इन लडकों में आपस में बात हुई की नदी कोन पार कर सकता है. तो बाकि कोई भी लडका नदी में नहीं कुदा. लेकिन तुम्हारे दीपक को क्या समझ पडीं और बीना कपडे उतारे यह नदी में कुद गया. कुछ दुर तक तैरकर चला गया फिर नदी के बीचों- बीच जाकर रुक गया. थक गया फिर मुडकर हमारी तरफ देखता है. तो हमने कहा कि अब आगे ही तैर इधर वापस मत आएं. फिर थोडी देर हाथ पैर मारने के बाद पानी में गायब हो गया. हमने भी यही सोचा था कि दीपक गया. फिर थोडी देर बाद इसका sir हमें दिखाई दिया. फिर पुरा दीपक दिखाई देने लगा. तब हम सबकी जान में जान आई, फिर मां ने कहा हैं. फिर साथ काम पर गये लडकों में से किसी ने कहा कि दीपक को पानी के अंदर अंदर सांस रोककर तैरना भी आता है. तो मां ने कहा कि अगर पानी के अंदर अंदर तेरना नहीं आता तो आज तो यह गया था. कहां से लातीं में इतना बडा लडका. इतने से को इतना बडा किया. अगर आज इसे कुछ हो जाता तो हम क्या करते. फिर मां गुस्सा करते हुए कहा कि तभी में कहुं कि दीपक पानी में भीगकर और अकेला ही क्युं आया है. तो मुझे बोलता है कि मैं नदी में नहाकर आया हूं और दीदी पिछे पिछे आ रही है. मां ने कहा कि कहा है दीपक. तो सब लोग मेरे पास आ गए और मुझे पेड से निचे उतरने के लिए बोल रहे थे. पर मैं पेड से निचे नहीं उतरा. उतर जाता तो बहुत मार पडती. फिर सब मोहल्ले वाले आपस में बातें करने लगे कि जिस जगह दीपक पानी में कुदा था. उस जगह पानी की गहराई बहुत ही ज्यादा है. अभी तो उस जगह पानी का बहाव भी बहुत तेज है. और अभी तो डेम से पानी भी नदी में छोडा गया है. पानी के इतने तेज बहाव को चीरकर बाहर आना नामुमकिन है. क्योंकि यह खेत में से काम करके आया था. थका हुआ था. साथ ही पुरे कपडे भी पहना हुआ था. नदी में तेज बहाव भी था. कैसे आ सकता है तैरकर सभी लोग बस अंदाजा लगा रहे थे. किसी ने कहा कि उसे पानी के अंदर अंदर सांस रोककर तैरना भी आता है. तो लोगों ने कहा कि हां ठीक है. लेकिन नदी की लंबाई बहुत है. पंद्रह सो फिट का एरिया है. वहां पर कितनी देर तक सांस रोक सकता है. सब अंदाजा लगा रहे थे पर कोई यह नहीं सोच रहा था कि नदी के उस एरिया में भगवान भोलेनाथ का मंदिर भी है. कोई भी यह व्यक्ति यह नहीं सोच रहा था कि दीपक को भगवान ने ही बचाया होगा. अब लोग भगवान को क्युं याद नहीं कर रहे थे. क्योंकि मेरी चाचियो ने पुरे मोहल्ले में भगवान के नाम पर नकारात्मकता फैला रखी थी. कि भगवान ऐसे चमत्कार नहीं करते है. और फिर यह कलयुग चल रहा है. और कलयुग में भगवान नहीं होते हैं. कलयुग में तो भगवान कि सिर्फ मुर्तियां होती है. और फिर एक आदमी उसी जगह पानी में डुबकर मर गया था. तो लोग फिर यही बात सोचते हैं कि अगर भगवान ने दीपक को बचाया तो फिर भगवान ने उस आदमी को क्युं नहीं बचाया जो पहले डुबकर मर गया था. पर लोगों ने भगवान की बात निकाली ही नहीं और सभी मेरी ही तैराकी की तारीफ करने लगे. और कहने लगें कि चलो हमारे मोहल्ले में कोई तो ऐसा हे जिसके पास तैराकी का हुनर भी है. अगर दीपक को तैराकी competition में भाग दिलवा दें तो दीपक पहला इनाम तो जीत ही लाएं. जब मोहल्ले वालों के मुंह से मेरी इस तरह से तारीफ सुनकर चाचियों का फिर दिमाग घुस गया. और अपने बच्चों की तरफ देखने लगी. बच्चें समझ गये कि अब उन्हें भी तैराकी सीखना है. मेरी वजह से चाचा- चाची के बच्चे परेशान हो गए थे. क्योंकि चाचा- चाची मुझे निचे तो गिरा देते थे. पर मेरे निचे गिरने पर भी मेरे द्वारा एक रिकार्ड बन जाता था. जो चाचा- चाची के बच्चों के लिए टारगेट बन जाता था. कि अब इस टारगेट को पूरा करना है. पर इस बार चाचा- चाची को बच्चों ने मना कर दिया कि हमसे तैराकी नहीं होगी. अब अगर बच्चों ने मना कर दिया है तो फिर मुझे भी तैराकी करने से रोकना पडेगा. और अगर मुझे तैराकी करने से रोका नहीं गया तो फिर मेरी और मेरे माता- पिता कि फिर से मोहल्ले और गांव में तारीफ और नाम होगा. और यह चाचीयां चाहतीं नहीं थी. की मोहल्ले और गांव में मेरी और मेरे माता- पिता कि तारीफ हो नाम हो. तो फिर मुझे तैराकी करने से रोकने के लिए चाचीयों ने गांव की चार छः महिलाओं को बातें सीखाई और पुरे मोहल्ले में अफवाह उडा दी. कि जो लोग भी तैराकी में भाग लेने जाते हैं. लोग उनके खाने पीने की चीजों में कुछ डालकर खीला- पीला देते हैं. फिर वह व्यक्ति नशें की हालत में पानी में तैर भी नहीं पाता है. और हार जाता है. और कोई- कोई तो नशे की वजह से पानी में भी डुबकर मर जाता है. पता नहीं भाई हमारे जेठ- जेठानी भी अपने लडके को भेज रहे हैं. पता नहीं दीपक के साथ लोग क्या करेंगे. भगवान उसकी रक्षा करना. तुम सब मिलकर हमारे जेठ- जेठानी को अच्छे से समझा- बुझा देना कि अपने लडके की ध्यान रखें. अभी तो सिर्फ मोहल्ले वालों ने सिर्फ मेरे तैराकी की खाली बात छेडी थी. और मेरी चाचीयों ने बातों का पुरा पहाड बना लिया था. और उस पहाड की पुरे मोहल्ले में चर्चाएं भी करवा दी. मेरे माता- पिता तो वैसे भी बहुत सीधे- सादे भोले- भाले और डरपोक थे. जब से मेरी मां ने मेरे बारे में सुना है कि मैं नदी में डुबते- डुबते बचा हुं तब से मुझे सख्त हिदायत दी गई है कि मुझे गलती से भी नदी पर नहीं जाना है. और अगर तु नदी पर मुझे दिखाई दिया तो मैं तेरे सारे हाथ पैर तोड दुंगी. तो अब आप ही सोचिए कि मेरी मां मुझे तैराकी में हिस्सा लेने देंगी. नर्मदा नदी बहुत बडी है. और उसका क्षेत्रफल भी बहुत बडा है. पर मेरी चाचीयों ने पुरे मोहल्ले में यह बात फेला दी थीं. मेरी चाचीयो को मेरी वजह से बहुत परेशान रहना पडता है. मेरी देखरेख मेरी मां से ज्यादा मेरी चाचीयां करतीं हैं. ऐसा ना हो की में उनसे चोरी- छीपे कोई अविष्कार कर लु और उनको पता ही नहीं चले. खैर अब हमारी आठवीं की परीक्षाएं नजदीक आ गई थी. तो शिक्षकों ने एक दिन स्कूल में विदाई समारोह रखा. सभी बच्चों को परीक्षा के दिशा- निर्देश दिए साथ ही निर्देशों को पालन करने का तरीका बताया. और ढैर सारा आशिर्वाद देकर स्कूल से विदा कर दिया.फिर हम सभी बच्चे मतलब में और मेरे चाचा-चाची के बच्चे हम सब पढ़ाई करने में जुट गए। ताकि सभी विषयों का अच्छे से रिविजन हों जाएं। और हम सभी बच्चे आठवीं कक्षा पास कर जाएं।