शीर्षक - चिरैया
ओ री चिरैया,मेरे पास आना-२
तुझको हैं पिंजरे में बंद करना।
ओ री................................
बाहर है बहुत,सारे गिद्ध,
तुझको नहीं, बाहर है जाना।
ओ री चिरैया........................
लेकिन तुझको तो बाहर है जाना-२
तू तो,नहीं समझेगी,कैसा है जमाना।
ओ री चिरैया.............................
तेरे लिए मैंने,बनाया है आशियाना,
तुझको तो हैं इसी मै रहना-२
ओ री.....................................
--→(अब चिरैया कह रही है अपने मन की बात)
क्या मुझको कोई हक नहीं है-२
इस दुनिया को,एक बार देखना।
ओ री मम्मी,मुझे भी है बाहर जाना-२
मम्मी सुनो जरा,मुझे भी है ऊंची उड़ान भरना,
मुझे भी है,पंख फैलाना।
ओ री मम्मी मुझे भी है बाहर जाना।
--→(अब मम्मी अपनी चिरैया से कह रही है)
ओ री चिरैया....................
तुझको देती हु मैं एक हथियार पुराना,
कही तू जाना, उसको साथ ले जाना,
ओ री चिरैया......................
तुझको तो है पढ़ना-लिखना-२
और आगे बढ़ना,
पढ़ लिख कर तुझको तो है,
झुकाना जमाना -२।
ओ री चिरैया............................
ले खोल दिया मैंने,आशियाना पुराना-२
--→(अब चिरैया अपनी मम्मी से कहती है)
ओ री मम्मी,आज तूने मुझे पहचाना -२
ओ री मम्मी, आज दिया तूने खुला जमाना,
--→(सभी लड़कियों के लिए,सभी मम्मियों के तरफ से)
ओ री चिरैया -२, जा तू पंख फैलाना -२।।