फिर सभी बच्चों को समझा बुझाकर शांत किया और सभी बच्चों को स्कूल में जाने के लिए बोल दिया. फिर सभी बच्चे स्कूल में चले गए. पर लडकों की लडाई से में बहुत डर गया था. जिससे मेने दो चार दिनों तक तो स्कूल जाना ही बंद कर दिया. फिर थोडे दिन बाद फिर से स्कूल जाना शुरू किया. तो स्कूल में शिक्षक हर शनिवार बच्चों से अपने अपने लक्ष्यों के बारे में पुछते और उन लक्ष्यों को कैसे पुरा करेंगे. या फिर जिस बच्चे में जैसा हुनर हो उसे सभी बच्चों के सामने अपने हुनर को प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित करते थे. उस दिन शिक्षकों ने मुझसे भी पुछा कि मैं जीवन में क्या बनना चाहता हूं. और मैं इस कार्यक्रम में क्या बोलना चाहता हूं. कुछ शब्द, कोई गीत, कोई कला, कोई नाटक प्रस्तुत करुं. तो मैंने sir से कहा कि मैं एक राष्ट्रीय गीत गाना चाहता हूं. तो शिक्षकों ने कहा कि ठीक है गाओ तो मैंने एक राष्ट्रीय गीत हर करम अपना करेंगे ऐ वतन तेरे लिए गाया. तो शिक्षकों को मेरी आवाज अच्छी लगी. तो शिक्षकों ने कहा कि एक बार और गाओ तो मैंने दोबारा से गाया तो शिक्षकों ने आपस में कुछ बातचीत की और फिर मुझे बिठा दिया. फिर दुसरे बच्चों से भी पुछते रहे. तो सभी बच्चों से पुछते- पुछते कार्यक्रम को समाप्त कर स्कूल की छुट्टी कर दी. फिर अगले शनिवार को भी ऐसा ही किया. और शिक्षक पंद्रह अगस्त आने तक हर शनिवार को मुझसे प्रेक्टीस करवाते फिर पंद्रह अगस्त के दिन मुझसे गीत गवाया गया. तो सबने खूब तालियां बजाकर स्वागत किया फिर मुझे और बाकी दुसरे जितने भी बच्चों ने पंद्रह अगस्त के कार्यक्रम में प्रस्तुति प्रकट कि उन सभी बच्चों को पुरस्कार स्वरूप एक काॅपी और दो पेन और दो- दो लड्डु और पुरे स्कूल और पुरे गांव में नाम भी होता था कि किसका बच्चा है. जब गीत गाने पर प्रधान जी के हाथों से मुझे पुरस्कार मिला तो मोहल्ले वाले मेरी और मेरे माता पिता की तारीफ करने लगे कि दीपक बहुत अच्छा गीत गाता है. दीपक की आवाज बहुत अच्छी है. चलो कोई तो है मोहल्ले में, जिसकी वजह से लोग हमें पहचानेंगे. जब मोहल्ले वालों के मुंह से मेरे हुनर की तारीफ मेरी चाचीयों ने सुनी तो उन्होंने अपने बच्चों को सीखाना पढाना शुरू कर दिया कि तुम लोगों को ऐसे गाने गाते नहीं है. दीपक को देखा वह ईनाम जीतकर लाया है. और पुरे मोहल्ले और पुरे गांव में उसका और उसके माता- पिता का नाम हो रहा है. तुम लोग हमारा नाम कब करोगे. अब से तुम भी गीत गाया करों और दीपक को कहना की अब वह गीत नहीं गाए वह पुछेगा की क्युं नहीं गाऊ तो बोलना की लडके तुझे हंसते हैं. क्योंकि तेरी गर्दन गिरगिट की तरह हीलती है तो स्कूल के सभी बच्चे तेरे नाम से हमें चीढाते है हंसते हैं हमारा मजाक उडाते हैं. तो तु गाना मत गाया कर, पर मेरी अच्छी आवाज की वजह से शिक्षकों का और स्कूल का नाम होता था. तो शिक्षक मेरी प्रेक्टीस पर ज्यादा जोर दिया करते थे. तो इस बार चाचा के लडकों ने भी छब्बीस जनवरी के कार्यक्रम में भाग लिया था. और अगर मैं गीत गाऊंगा तो मुझे फिर से ईनाम मिलेगा. मेरा और मेरे माता- पिता का फिर से पुरे मोहल्ले में नाम होगा. तो मेरे और मेरे माता पिता का मोहल्ले में नाम ना हो इसके लिए चाचीयों ने अपने बच्चों को सिखा पडा दिया की दीपक को इस तरह की बातें करके डरा धमका देना कि तु गीत गाता है तो लोग और स्कुल के बच्चें हमें तेरे नाम से हंसते हैं और हमारा मजाक उडाते हैं. तो तु इस बार गीत मत गाना. तो जब चाचा के लडके मुझे ऐसी बातें बोले तो मुझे भी ऐसा ही लगने लगा कि मुझे गीत नहीं गाना चाहिए. क्योंकि मेरी वजह से मेरे चाचा चाची और उनके बच्चों की बेइज्जती होती है. बदनामी होती है. तो अब मैं गीत नहीं गाऊंगा. पर शिक्षकों को मेरी आवाज और मेरे गीत सुनना बहुत पसंद था. मैं स्कूल तो जाता था. पर गाना गाने पर मेरा कोई ध्यान नहीं था. पर शिक्षक मुझे गीत गाने के लिए बोलते थे. मैं गीत तो गाता था. पर गीत मैं उस लय में नहीं गाता था. यह सोचकर कि अगर मैं गीत गाऊंगा तो मेरी गर्दन गिरगिट की तरह हिलेगी और बच्चे फिर मेरे चाचा के लडकों को हंसेंगे. इसलिए फिर मैं गीत में पुरी लय में नहीं गाता था. पर अगर आप जैसे गाते हो उस आवाज को खराब कर नहीं सकते हैं. आप चाहकर भी अपनी आवाज को खराब नहीं कर सकते हैं. पर मैं टीचर्स के सामने जैसे तैसे करके गाता रहता था. पर पिछले कार्यक्रम में अच्छा प्रदर्शन करने की वजह से मोहल्ले के लोग भी मेरे गीत का इंतजार कर रहे थे. और स्कूल के बच्चे भी इंतजार कर रहे थे. लेकिन चाचा के लडकों ने मेरे दिमाग में डर भर दिया था. कि तु गीत गाता है तो. लोग हमें तेरे नाम से हंसते हैं. हमारा मजाक उडाते हैं. तो अब छब्बीस जनवरी का दिन भी आया. सभी बच्चे अपनी- अपनी प्रस्तुति की रिहर्सल करते हुए नजर आ रहे थे. लेकिन मैं अकेला गुमसुम रहता चाचा के लडके भी अपनी प्रस्तुति की रिहर्सल करते फिर झंडा वंदन के बाद टीचर्स ने एक- एक बच्चें को स्टेज पर परफॉर्म करने के लिए बुलाना शुरू किया सभी बच्चे अपना- अपना परफॉर्म करके बेठते जा रहे थे. फिर चाचा के लडकों का नंबर आया. तो जैसे ही चाचा के लडकों ने अपना परफार्मेंस दिया सभी बच्चों ने खूब हंसी उडाई. और तो और गांव के लोगों ने भी खूब हंसी उडाई, फिर शिक्षकों ने मेरा नाम लिया लेकिन मेने गीत नहीं गाया. जो दुसरो के हक का छीनता है. फिर भगवान उसको भी खाली हाथ ही रहने देता है. और वह हक भगवान किसी और को दे देता है. छब्बीस जनवरी के पहले इनाम पर मेरा अधिकार था. पर चाचा के लडकों ने मेरे दिमाग में गलतफमी डालकर मेरे हक का छीनना चाहा पर भगवान ने उनके हाथ भी खाली ही रखें. फिर मैंने कभी पंद्रह अगस्त और छब्बीस जनवरी पर गीत नहीं गाया. फिर चौथी कक्षा से पांचवीं कक्षा में प्रवेश लिया. फिर पांचवीं कक्षा से छटी कक्षा में प्रवेश कर लिया. अब मैं स्कूल में गीत नहीं गाता था. पर चाचा- चाची को पता था कि मेरी आवाज बहुत अच्छी है. अभी में स्कूल में नहीं गाता हूं. पर कभी ना कभी तो मैं कहीं और तो गा सकता ही हुं. तो मैं कहीं पर भी गीत नहीं गा पाऊं इसके लिए चाचीयों ने अपने बच्चों से मुझे तम्बाकू और शराब पीना सिखाने के लिए अपने बच्चों को पहले तम्बाकू और शराब पीने के लिए बोला. क्योंकि मैं भी अपने चाचा के लडकों के साथ ही खेलता घुमता था. और साथ में रहता था तो वै मुझे भी तम्बाकू और शराब पीने के लिए बोलते थे. ताकि तम्बाकू और शराब से मेरा गला बैठ जाय. और मैं कभी गाने के लायक ही नहीं रहुं. शराब तो नहीं पिता था. पर हां में तम्बाकू खाना जरुर सीख गया था. पहले चाचा के लडके अपने पैसों से खिलाते थे. फिर जब तम्बाकू खाने की लत लग गई, तब उन्होंने अपने पैसों से खिलाना बंद कर दिया और कहा कि अब तु अपने पैसों से खरीद कर लाया कर अब मेरे पास तो पैसे थे नहीं तो फिर मैं चाचा के लडकों के पास ही जाता था. कि मुझे भी खिलाओ तो चाचा के लडके मना कर दे कि हमारे पास नहीं है. तु अब अपने पैसों से खरीद कर खां. तो मैं उन्हें मना करता की मेरे पास पैसे नहीं हैं. तो फिर वै मुझे घर से पैसे चुराने की बात बोलते. तो मेने मना किया तो चाचा के लडके कहते कि हम भी तो घर मैं से ही पैसे चुरा लेते हैं. तो तु भी ऐसा कर लिया कर. फिर मैने कहा कि अगर घर में पता चल गया तो. तो चाचा के लडके बोलते थे कि तु किसी को बतायेगा नहीं और हम किसी को कहेंगे नही कि तु घर से पैसे चुराता है. असल में यह एक चाल थी मेरी चाचियों की मुझे पुरे मोहल्ले में बदनाम करने की कि मैं चौर हुं. अब मुझे तो तम्बाकू खाने की लत लगें और पैसे मेरे पास होते नहीं थें. तो अब मेने भी घर से पैसे चुराने शुरू कर दिए. पैसे चुरा- चुरा कर तम्बाकू खाने लगा. दो चार बार घर से पैसे निकाले तो किसी को शक नहीं हुआ पर फिर बाद में घर में पैसे कम हो तो भाई बहनों पर इल्जाम लगें. तो भाई बहन बोलते कि हम तो तुम्हारे साथ ही काम करने जाते हैं. हम कबं निकाले पैसे फिर मैंने पैसे निकालना बंद कर दिया और आनाज बेचना शुरू कर दिया. फिर एक दिन मां को आनाज कम दिखाई दिया तो मेरी चाचीयों ने ही मेरी मां को बता दिया कि चौरी में ही करता हूं और साथ ही मोहल्ले वालों को भी बता दिया कि घर का चौर में ही हुं. फिर मुझे घर से बहुत मार पडीं और पुरे मोहल्ले में मेरी बहुत बेइज्जती भी हुई. और साथ ही मेरी आवाज भी भारी हो गई, उस समय में सातवीं कक्षा में था. फिर चौरी की वजह से मेरी हर जगह बदनामी तो हो ही गयी थी. तो फिर बदनामी की वजह से मैं कहीं पर भी आता- जाता नहीं था. किसी से बात भी नहीं करता था. और ज्यादा समय घर के अंदर ही रहता था. बस घर से बाहर खाली स्कूल के लिए ही निकलता था. अब घर पर रहता था तो खाना पीना बनाना सीख गया था. तो माता- पिता भाई- बहन काम पर जाय. तो घर का सारा काम में ही कर लेता था. मां और बहन कीचन में जाते ही नहीं थें. क्योंकि किचन का सारा काम में ही कर दिया करता था. अब जब किचन का सारा काम में ही कर लेता था. तो फिर मेरी बातें होना स्वाभाविक सी बात है. तो मां बहन टिफिन पैक करके घर से जल्दी काम पर निकल जाते तो मोहल्ले की महिलाएं मां से पुछती कि इतनी जल्दी खाना कैसे बना लेते हो. तो मां और बहन महिलाओं को बता देती की दीपक हैं ना वह चुल्हे का सारा काम कर लेता है. तो हमें देखने की जरूरत ही नहीं पडती है. तो मोहल्ले की महिलाएं फिर जब मां के मुंह से मेरे बारे में ऐसी बातें सुनतीं तो फिर मोहल्ले की महिलाएं भी मेरी तारीफ करने लगी की तुम्हारे बच्चे कितने अच्छे हैं. जो तुम्हें थोडी सी तकलीफ भी नहीं उठाने देते हैं. और एक हमारे बच्चे हैं. जिन्हें खेलने- कुदने, घुमने- फिरने से फुर्सत ही नहीं मिलती है. फिर मेरी चौरी वाली बातें भुल कर तारीफ करने लगी इधर मेरी तारीफ चाचीयों के कानों तक पहुंची तो फिर से चाचियों का माथा ठनका की मेरी फिर से मोहल्ले में तारीफ होने लगी है. तो फिर से अपने बच्चों को सीखाना पढाना शुरू कर दिया कि दीपक को घर से बाहर लेकर आओं. उसे घर से बाहर लाने के लिए उसके पास दुसरे लडकों को भेजो जो दीपक को घर से बाहर लेकर आएंगे. और अगर घर से बाहर नहीं आये तो फिर उसे यह कहकर मोहल्ले में बदनाम करना की दीपक तो लडकियों की तरह घर में ही रहता है. उसके भीतर तो लडकियों जैसे गुण है. तभी तो वह घर में ही रहता है. उसके भीतर अगर लडकों जैसे गुण होते तो वह हमारी तरह सब जगह घुमता- फिरता सभी लडकों के साथ रहता. मुझे घर से बाहर निकालने के लिए चाचा के लडके दुसरे लडकों को मेरे पास भेजते तो मैं बाहर जाने से मना कर देता. तो फिर चाचा के लडके वहीं बातें फेलाते जो मेरी चाचियों ने उन्हें सीखाई थी. की दीपक में तों लडकियों जैसे गुण है. वह तो लडकियों की तरह घर में ही बैठा रहता है. मेरी इस तरह की बदनामी के बाद भी में घर से बाहर नहीं जाता तो. मेरी चाचियों के ऊपर सांप लोट जाता की उनकी बातों का मेरे ऊपर कोई असर नहीं हुआ. तो फिर चाचियां दुसरा प्लान बनाती इस बार मुझे घर से बाहर निकालने के लिए मेरे घर के आसपास के लोगों को मेरे खिलाफ भडका देती यह कहकर कि दीपक घर रहकर तुम्हारी पत्नीयों को देखता रहता है. घुरता रहता है. चाचियां आस- पास के लोगों को जब ऐसा बोलती तो वै लोग फिर मुझे काली- पीली नजरों से देखते. और मैं जिधर जाता उधर मुझपर नजर रखते. फिर मैंने घर से बाहर निकलना जरूरी समझा पर उस समय में आठवीं कक्षा में था.