
त्रिपाठी हाउस
मिश्री अपने कमरे में बैठी थी और दाई मां उसे तैयार कर रही थी,उसके एक ब्लू कलर का अनारकली सूट पहना था,तभी वहां पर मीना आती है और मिश्री के पास आकर बोलती है _ ये तूने क्या पहना है।
दाई मां मीना से बोलती है _ क्या हुआ बहुरानी कोई गलती हो गई। मीना _ अरे दाई आप भी ना ,ये क्या पहनाया है मिश्री को , ये देखकर वो लोग रिश्ता ठुकरा देगे , एक काम कीजिए ,आप नाश्ता पानी देखिए ,इसे में तैयार कर दूंगी।
दाई मां _ लेकिन बहुरानी,,,,,।
मीना_ लगता है,आप ने ठीक से सुना नहीं मैने क्या कहा।
मीना की बाते में इतना रूखापन था कि आगे दाई मां कुछ बोल ही नहीं पाई और कमरे बाहर निकल गई।
मीना मिश्री को एक पैकेट देते हुए बोलती है _ सुन इसमें नए कपड़े है उन्हें पहन कर आ फिर में तुझे तैयार कर दूंगी।
मिश्री_ जी भाभी। मिश्री इतना बोलकर वो पैकेट को लेकर बॉशरूम में चली जाती है।
10 मिनट बाद मिश्री वॉशरूम से बाहर निकलती है मिश्री ने एक मेहरून कलर का घाघरा और चोली पहन रखा था उसकी चुन्नी नहीं डाली थी। उस मेहरून कलर की घाघरा चोली में उसका गोरा रंग निखर कर आया था।
मीना मिश्री को ड्रेशिंग टेबल के पास बैठने का इशारा करती है , तो मिश्री ड्रेसिंग टेबल पर बैठ जाती है। मीना मिश्री की चोली पकड़ कर थोड़ा नीचे खिसका देती है। ये देखकर मिश्री बोलती है _ ये आप क्या कर रही हो,भाभी।
मीना बेहूदगी से हंसते हुए बोलती हैं _ तुझे क्या लगता है लड़का तेरी शक्ल देखकर ही तुझे पसंद कर लेगा ,उसे कुछ ओर भी दिखना पड़ेगा। ये बोलकर मीना मिश्री की चोली की डोर को खोलती हैं और टाइट करके फिर से बांध देती है।
चोली को नीचे खिसकाने से मिश्री के क्लीवेज थोड़े थोड़े दिखाई दे रहे थे। मीना मिश्री को तैयार करके बोलती हैं_ अब ठीक है, और हा ध्यान से सुन ,वो जितना पूछे उतना ही बोलना ,समझी।
मिश्री_ जी भाभी ।
मीना_ अभी मैं नीचे जा रही हूं,तुझे बुलाएंगे तब आना ठीक है। मीना की बात सुनकर मिश्री अपनी गर्दन हा में हिला देती है।
मीना नीचे चली जाती है।
ठाकुर कॉपरेशन
अधीर अपने केबिन में अपने लेपटॉप पर काम कर रहा था,तभी केबिन में रोहित आता है और एक फाइल अधीर के तरफ बढ़ाते हुए बोलता है _भाई ये रही वो फाइल ,इसमें उस प्रॉपर्टी की सारी इंफोमेशन है।
अधीर वो फाइल रोहित से लेकर खोलता है, फाइल को खोलते ही उसमें एक लड़की की फोटो थी ,उस फोटो को देखते ही अधीर दिल से एक आवाज आती है _ धक,,,,,धक,,,,,धक,,,,। उसके दिल धड़कनों की आवाज इतनी तेज थी कि रोहित वो आवाज आराम से सुन सकता था।
रोहित_क्या हुआ,भाई आप की हार्ट बीट काफी तेज चल रही हैं। रोहित की आवाज सुनकर अधीर अपने होश में आता क्योंकि वो बस उस फोटो को ही देखे जा रहा था।
अधीर जल्दी से फाइल बंद करता है। ओर सीधा होकर बैठता है। रोहित अधीर के कंधे पर हाथ रखकर बोलता है _ यू ऑल राइट भाई।
अधीर गहरी सांस ले कर बोलता है _ हा म,,, मै ठीक हूँ,तुम जाओ अपना काम करो।
रोहित _ok भाई। इतना बोलकर रोहित अपने केबिन में चला जाता है। और एक बार फिर वो फाइल को खोलता है,उसकी नजर फिर उस फोटो पर टिक जाती है।
त्रिपाठी हाउस
नीचे हॉल में सुमेर ( मिश्री का भाई) बैठा था और उसके सामने एक 32 साल आदमी बैठा था।
सुमेर _ वैसे राणा जी आप को शर्त पता है ना।
राणा_ तुम चिंता मत करो,सुमेर मुझे सब पता है। तुम बस अपनी बहन को बुलाओ।
सुमेर _ अभी बुलाता हूं। सुमेर फिर अपनी पत्नी मीना को इशारा करता है। सुमेर का इशारा समझ मीना मिश्री को लेने के लिए चली जाती है।
सुमेर और राणा बात कर रहे थे तभी राणा की नजर सीढ़ियां पर जाती है,जहां मीना मिश्री को लेकर आ रही। मिश्री को देखकर राणा के होश उड़ गए थे।
राणा अपने मन में बोलता है _तेरी तो निकल पड़ी राणा,ये लड़की स्वर्ग से उतरी अप्सरा है।
मीना मिश्री को लेकर आती है और सोफे पर बैठा देती है।
सुमेर_ राणा जी,ये मेरी बहन , मिश्री।
मिश्री अपना सिर झुकाए बैठी थी और राणा अपनी हवस भरी नजरों से मिश्री को ऊपर से नीचे तक देख रहा था।
मिश्री बस सब की बातें सुन रही थी तभी राणा बोलता है _ मुझे ये रिश्ता मंजूर है। ये सुनकर मीना ओर सुमेर खुश हो जाते हैं। सुमेर खुश होते हुए बोलता है _ ये बहुत अच्छी बात है राणा जी
राणा _ मैं अपनी होने वाली पत्नी से अकेले में बात करना चाहता हूं। ये सुनकर मीना हंसते हुए बोलती हैं _अरे क्यों नहीं, और वैसे भी, अब आप हमारे होने वाले दामाद जो है। आप छत पर चलिए, मैं मिश्री को लेकर आती हूं।
थोड़ी देर में मिश्री और राणा दोनों छत पर आमने सामने बैठे थे,जहां मिश्री अपनी गर्दन झुकाए बैठी थी,वही राणा को अपनी ललचाई निगाहों से देख रहा था।
तभी राणा मिश्री के पास बैठते हुए बोलता है _ तुम से एक बात कहे,हमने बहुत लड़कियां देखी ,लेकिन तुम्हारे जैसी लड़की आज तक नहीं देखी।
सच कहे तो हमें तो सब्र नहीं हो रहा है। फिर वो अपना हाथ मिश्री के हाथ पर रखता ओर मसलते हुए आगे बोलता है _ हम चाहते हैं,जल्दी हमारी शादी हो, सोचने में कितना मजा आता है ना ,कब हमारी सुहागरात होगी और तुम कब मेरी बाहों में आओगी। उफ्फ क्या रात होगी ,वो।
ये कहते हुए वो लगातार मिश्री का हाथ मसल रहा था और मिश्री को राणा से घिन आ रही थी,वो अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश कर रही थी पर राणा ने हाथ कस कर पकड़ा था।
मिश्री बहुत हिम्मत करके बोलती है _ प्लीज हमारा हाथ छोड़ दीजिए, हमें दर्द हो रहा है। ये सुनकर राणा मिश्री का हाथ छोड़ कर बोलता है _ अब इस दर्द की आदत डाल लो क्योंकि ये दर्द ज़िंदगी भर तुम्हारे साथ रहेगा।
ये बोलकर राणा नीचे चला जाता है और मिश्री रोते हुए अपने आप से बोलती हैं _ दाई मां ने बोला था कि राजकुमार आएगा,लेकिन ये तो राक्षस हैं।
राणा नीचे आता है और सोफे पर बैठ जाता है, राणा को देखकर सुमेर बोलता हैं _ अब जब, सब कुछ तय हो गया है, तो दाम भी तय कर

ले।
राणा _ बोलो ,कितना पैसा चाहिए।
जारी,,,,,
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