अब गांव की तीनों चाचियों ने प्लान बनाया जेठानी के बच्चें को तांत्रिक से टोटका करवाकर दुध के साथ पिला देते हैं. फिर टोटके से हमेशा बिमार पढता रहेगा. ओर फिर गांव की कोई भी महिला जेठानी के बच्चें को लाड प्यार नहीं करेगा. कोई भी जेठानी की तारीफ नहीं करेगा. पर दवाई पिलाने का पाप दादी से करवाया जाय. अब इस काम के लिए दादी को तैयार करना जरूरी है. अगर दादी को प्लान के बारे में बता देंगी तो दादी यह पाप करेंगी नहीं. पर अगर दादी को यह कहा जाय की गांव की महिलाएं कह रही थी कि तुम्हारी जेठानी का बच्चा बहुत कमजोर है. अगर जेठानी के बच्चें को तांत्रिक के पास की दवाई लाकर पिलाई जाएं तो बच्चा अच्छा तंदुरुस्त रहेगा. तो दादी तीनों चाचीयों की बातों पर भरोसा कर लेती है. और कहती हैं कि बच्चे के लिए दवाई कहा से लाएंगे. तो चाचीयों ने कहा कि दवाई हमको भी दी है. लो हम देते हैं दवाई तुम दे आओं जेठानी को बच्चें को पिला देगी तो बच्चा अच्छा तंदुरुस्त हो जायेगा. अब दादी ने तीनों छातियों से दवाई ली और मेरे घर आई. और मां को दवाई के बारे में बताने लगी. तो मां ने भी दादी की बातों को मानकर दवाई दुध में मिलाकर मुझे पिला दि. भगवान देख रहे थे कि तीनों चाचीयों का प्लान काम कर गया है. लेकिन मैं तो चुना हुआ व्यक्ति हुं. तो मुझे बचाने वाला तो भगवान है. मेरे ऊपर टोटके का कोई असर नही हुआ. मैं तो अच्छा भला खेल रहा था. पर मुझे अच्छा भला देखकर चाचियो के शरीर पर सांप लोट गया हो. कि मेरे ऊपर टोटके का असर क्युं नहीं हुआं मेरे भाई बहनों पर तो हो जाता था. इस पर क्युं नहीं हुआं. यह तो अच्छा भला खेल रहा है. दोबारा से टोटका करते हैं. फिर दोबारा से टोटका करवाया तो दुसरी बार भी कोई असर नहीं हुआ. फिर तीसरी बार किया तो इस बार भगवान ने टोटका सफल होने दिया. और मुझे बिमार कर दिया. ताकि तीनों चाचीयों को तसल्ली हो जाय. फिर जब मैं बिमार हुआं तो फिर गांव की कोई भी महिलाएं मुझे देखने मिलने नहीं आये. फिर मेरी कोई तारीफ भी नहीं करते थे. तो तीनों चाचीयां बहुत खुश होने लगी. गांव की महिलाएं तारीफ तो नहीं करती थी पर बिमारी से ठीक होने की दुवाएं जरुर मांगती थी. अब गांव की सभी महिलाएं खेतों में काम करने जाएं तो मेरे लिए दुवाएं मांगती की में जल्दी से ठीक हो जाऊं. तो चाचीयां अपने बच्चों के बारे में बातें करें कि मेरा बच्चा ऐसा मेरा बच्चा वैसा. और गांव कि महिलाएं मेरी मां का नाम लेकर कहती की भगवान उसका बच्चा जल्दी से ठीक हो जाय दीपक जल्दी अच्छा हो जाय कितना भोला और मासुम हे वो. पता नहीं उसे क्या ही हो गया है. वह जल्दी से ठीक हो जायं. चाचीयां फिर से अपना मुंह सिकोडने लगी कि पहले ठीक था तो औरतें खुब तारिफे करती थी. अब बिमार हुआं है तो औरतें दुआएं मांग रही है. इस बच्चे का करे. क्या? फिर थोडे दिन बाद में बिमारी से ठीक हो गया. बिल्कुल स्वस्थ हो गया. और फिर से महिलाओं का जमावडा घर लगने लगा. फिर मैं धीरे- धीरे बडा होने लगा. स्कूल जाने लायक हुआं. था तो बहुत मासूम मेरी मासुमियत की वजह से लोग मेरी और आकर्षित भी होते हैं. और दया भी दिखाते है. जब स्कूल में मुझे भर्ती करवाया गया तो शिक्षकों ने बीना किसी आपत्ति बीना किसी दस्तावेज के मुझे भर्ती कर लिया. पर चाची के बच्चों को स्कूल में भर्ती करते वक्त बहुत से दस्तावेज मांगे गये थे. तो चाचीयों को लगा था कि शिक्षक मेरे माता पिता को भी दस्तावेजों के लिए यहां वहां भेजेंगे. और फिर यह हमारे पास आयेंगे. जानकारी लेने के लिए. कि तुम लोगों ने बच्चों के दस्तावेज कहां से बनवाएं. और हम फिर इन्हें यहां- वहां भगाएंगे पर ऐसा कुछ नहीं हुआ. और मुझे पहले ही दिन स्कूल में भर्ती कर लिया गया. यह सबकुछ देखकर चाचीयां आगबबूला हो गयी. कि शिक्षकों ने मेरे माता- पिता को बीना परेशान किए मुझे भर्ती कैसे कर लिया. खैर फिर पहली कक्षा में प्रवेश लिया फिर साल भर पढाई के बाद दुसरी फिर तीसरी फिर चौथी कक्षा में गया. फिर एक दिन स्कूल में एक बच्चा अपनी चाॅकपट्टी को पानी की टंकी पर रखकर खेलने चला गया और मेरा पानी की टंकी के पास जाना हुआं तो मेरे हाथ से चाॅकपट्टी को धक्का लग गया और चाॅकपट्टी पानी में गिर गई, चाॅकपट्टी को मेने जानबूझकर नहीं गिराया था. पर चाचा के लडकों ने मेरी और इशारा करते हुए बोल दिया कि मेने उसकी चाॅकपट्टी को जानबुझकर पानी में गिरा दिया है. तो उस बच्चे को बहुत गुस्सा आया और मेरे पास आते ही उसने मेरे गाल पर एक थप्पड जड दिया. और जोर जोर से डांट फटकार लगाने लगा. मैं बहुत भोला और मासुम था. तो मैं लडके की डांट फटकार से बहुत डर गया था. मेरे मुंह से आवाज ही नहीं निकले. मैं लडके के एक थप्पड पडने से निचे से ऊपर तक कांप गया. ओर मेने अपनी दोनों आंखें बंद कर ली. जब वह लडका मुझे डांट फटकार लगा रहा था. तो चाचा के लडके बहुत खुश हो रहें थे. मुझे बचा नहीं रहें थे. सिर्फ दूर से तमाशा देख रहे थे. फिर मैं बजरंगबली को याद करने लगा की बजरंगबली मुझे बचा लो. फिर हमारे ही गांव का एक लडका आया और उसने उस लडके को रोका की क्या हुआ तो लडके ने कहा कि इसने मेरी चाॅकपट्टी को पानी में गिरा दिया है. तो लडके ने कहा कि क्या हुआ. तेरी चाॅकपट्टी पानी में गिर गई तो. पानी में गिर गई थी तो तु वापस निकाल लेता तुने उसको मारा क्युं. तो लडके ने कहा कि जब तक यह मेरी पट्टी निकाल कर नहीं देता है. मैं तब तक इसको मारुंगा. तो जो दुसरा लडका आया था. उसने कहा कि अब हाथ लगाकर बता तो लडके को. तो उस लडके ने मुझे फिर हाथ लगा दिया. लडके का मुझे हाथ लगाना था कि दुसरे लडके ने उस लडके को बहुत मारा और उसे उठाकर पानी की टंकी में पटक दिया. और पानी की टंकी में भी उस लडके को बहुत मारा. फिर थोडी देर बाद शिक्षक आ गए.