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सरलता

राह पर जब चले तब ये सोचा न था

पथ कठिन होगा या कि सरलता भरा

जब गिरे तब हमें भी पता ये चला

विष भी पीना नहीं हैं सरलता भरा

पहले फूलों से जो थे नाजुक कभी

अब तो चलते सड़क पर खुली धूप में

अब स्वयं को भी हमने संभाला बहुत

लग रहा हैं ये जीवन सरलता भरा

अमन सिंह सौम्य ✍️✍️✍️✍️✍️

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