
पीठ पर लादे ज़िम्मेदारियों की गठरी
अपने कारोबार से करें हमारी हर जरूरत पूरी
हां पिता ही तो है हमारे जीवन की धुरी।
आवाज में चाहे थोड़ी सख्ती सही
पर ज्ञान देते एकदम सही
ख्वाहिशें सभी समझ जाते जो हमने कभी कहीं नहीं
पनाह का पालना देने से कभी चूकते नहीं
परिवार को ताकत समझते ना समझते मजबूरी
मां के आंचल के साथ पिता का संरक्षण भी है जरूरी
हां पिता ही तो हमारे जीवन की धुरी।