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"मेरी छोटी-सी मदद"

*जब मैंने किसी की मदद की और खुद को बदला पाया*

एक दिन मैं अपने घर के पास जा रहा था। रास्ते में मैंने एक बुज़ुर्ग महिला को देखा। उनके हाथ में बहुत सारा सामान था और वे उसे उठाने में परेशान हो रही थीं।

मैंने उनके पास जाकर उनका सामान उठाने में मदद की और उन्हें सड़क पार करवा दी। उन्होंने मुझे दिल से धन्यवाद दिया और मेरे लिए दुआ की। उनकी मुस्कान देखकर मुझे बहुत खुशी हुई।

उस दिन मुझे महसूस हुआ कि किसी की मदद करने के लिए बहुत धन या बड़ी चीज़ की जरूरत नहीं होती। छोटी-सी मदद भी किसी के चेहरे पर खुशी ला सकती है। इस घटना से मेरे अंदर दूसरों की मदद करने और उनके प्रति सहानुभूति रखने की भावना बढ़ी।

पहले मैं सोचता था कि मेरी अपनी परेशानियाँ ही सबसे बड़ी हैं, लेकिन उस दिन मुझे समझ आया कि बहुत से लोग हमसे भी ज्यादा कठिनाइयों का सामना करते हैं। अब मैं कोशिश करता हूँ कि जब भी किसी को मेरी मदद की जरूरत हो, मैं उसकी मदद जरूर करूँ।

इस छोटी-सी घटना ने मेरे सोचने का तरीका बदल दिया। मैंने जाना कि दूसरों की मदद करने से केवल सामने वाले को ही खुशी नहीं मिलती, बल्कि हमें भी अंदर से सुकून और खुशी मिलती है।

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