ज़िंदगी देखने की चीज है
और
इंसान दिखाने के लिए जीता रहा
यही कारण है कि वो ज़िंदगी से अनभिज्ञ ही रहा
अर्थात बनना था दर्शक
लेकिन बनता रहा
ज्ञानी और विज्ञानी
ज्ञानी बनके आँखे बंद करके अंतर्ध्यानी होकर ग्रंथो की रचना कर दी
वहीं विज्ञानी वनने के नाम पर उसने आँखों पर स्कोपिक चश्में पहन लिए और थ्यूरिओं की रचना करदी