
अपनी कलम से,
ज़िंदगी को प्यार भरी,
तेरी रंगत से रंग जाऊँ मैं.......
यूँ तेरी झील-सी आँखों की,हर बात पढ़ जाऊँ मैं,
तू जो देखे एक नज़र, उस नज़र में खो जाऊँ मैं!
तेरी काले केशों की घटाएँ,जब भी लहराएँ कहीं,
छाँव बन उन पलों का, हर वो सुख बस पाऊं मैं!
हर तस्वीर में हो बसी, हर दुआओं में भी हो तुम,
चल बन के हमसफ़र,हर सफ़र साथ निभाऊं मैं!
तेरे क़दमों के निशाँ भी, है लगें जैसे हो राह मेरी,
तेरे प्यार भरी राह में चल के,मंज़िल को पाऊँ मैं!
तेरी बातें- तेरी साँसें, तेरी यादें बन गई मेरी नशा,
लगे हर रोज़ तुझमें ही,हर पल बस खो जाऊँ मैं!
ग़र तेरी मुस्कान का जादू, असर कर जाए कभी,
ज़िंदगी को प्यार भरी, तेरी रंगत से रंग जाऊँ मैं!
तेरी रंगत से रंग जाऊँ मैं.....
तेरी रंगत से रंग जाऊँ मैं.....
༺꧁🖋️ डॉ. सूर्य प्रताप राव रेपल्ली 🙏꧂༻
मौलिक व स्वरचित @ सर्वाधिकार सुरक्षित
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