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श्री हरि

दिल की इस भूलभुलैया में

श्री हरि का बखान हो,

क्षण-क्षण में राम हो,

कण-कण हों राधाकृष्ण,

पग-पग श्री विष्णु साथ हों।

नहीं है कोई दूरी यहाँ

भक्त भगवन को रिझाते जाएं।

हो मन मन्दिर क्यारी जहाँ

वहीं श्री हरि दर्शन हो जाएं।

स्पष्ट भाव निष्कपट मन

सोच भी निष्पाप हो जाए

ऐसी निर्मल पवित्र हो तन

निष्कलुष रोम-रोम हो जाए।

राग द्वेष भय दूर हो सब

हर श्वास श्री हरि रटे जब।

झूठ ही बोले राम राम बोले,

सत्पथ दिखाएं, श्री राम भज।

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