
लेकर हाथ में प्याली
एक चाय सुकून वाली
बालकनी में बैठ गई
खोल कर किताब
वो प्रेम कहानी वाली
सुबह की भागदौड़ के बाद
जो मिली है अब जाकर
ये चाय की प्याली
आंखे बंद करके
होठों से लगा लिया
ओर सुकून का घूंट
गले से उतार लिया
ये सुकून कही ओर
मिलता ही नहीं
किताब सा नशा
ओर चाय सा सुकून
कही नहीं कही नहीं